Bhartrihari
शृंगार शतक भाग 9 (श्लोक 46–50) – वर्षा, विरह और प्रेम मिलन का अद्भुत दर्शन | Bhartrihari Shringara Shatak
🌸 शृंगार शतक – भाग 9 (श्लोक 46–50) वर्षा, विरह और मन की उत्कंठा शृंगार शतक भाग 9 Bhartrihari Shrin…
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🌸 शृंगार शतक – भाग 8 (श्लोक 41–45) वसंत, सौंदर्य और मन की उत्कंठा शृंगार शतक भाग 8 Bhartrihari Shring…
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समिद्धो अद्य मनुषो दुरोणे देवो देवान् यजसि जातवेदः । आ च वह मित्रमहश्चिकित्वान् त्वं दूतः कविरसि …
कथं महे असुरायाब्रवीरिह कथं पित्रे हरये त्वेषनृम्णः । पृश्निं वरुण दक्षिणां ददावान् पुनर्मघ त्वं मन…
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