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Atharvaveda kand 5 sukta 1

ऋधङ्मन्त्रो योनिं य आबभूवामृतासुर्वर्धमानः सुजन्मा । अदब्धासुर्भ्राजमानोऽहेव त्रितो धर्ता दाध…

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