बुद्धि यस्य बलमं तस्य, अहम् इन्द्रं न शरीरम्
।। शून्य की नाव भाव की जिज्ञासा ।। नमः शम्भवाय च मयोभवाय च। नमः शङ्कराय च मयस्कराय च। न…
।। शून्य की नाव भाव की जिज्ञासा ।। नमः शम्भवाय च मयोभवाय च। नमः शङ्कराय च मयस्कराय च। न…
भगवान सूर्य का ध्यान एवं पूजन ब्रह्माजी बोले - याज्ञवल्क्य! एक बार मैंने भगवान सूर्यनारायण की स्तुति की । …
चिंता ' चिता ' समान और चिंतन ' अमृत ' की तरह आयुर्वेद में दो प्रकार के रोग बताए गए हैं। पहल…
संस्कृत प्रणालि परिचय “भाषा” यह मानव सभ्यता के आविष्कारों मे सबसे अप्रतिम आविष्कार है । भाषा वह साधन है जो…
जीवन, नियम और ब्रह्मज्ञान की अनिवार्यता मानव जीवन का यथार्थ, भोग का भ्रम और शाश्वत शान्ति का वैदिक मार्ग ज…
विद्वान कौन है? भारत की आत्मा, ऋषि परंपरा और वैदिक चेतना भूमिका: प्रश्न जो युगों से अनुत्त…
भगवान कपिल -देवहुति संवाद : भक्ति का स्वरूप क्या है ? देवहुति बोली : भूमन् ! प्रभो ! इन दुष्ट इन्द्रि…
सृष्टि का सर्वोत्कृष्ट प्राणी मानव है। मानव को अपनी इस स्थिति के विषय में कदाचित् अभिमान हो सकता है, पर अधि…
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