Veda and quantum similarity



ज्ञान, विज्ञान और ब्रह्मज्ञान: वेदों का महासंग्रह (GVB - The University of Veda)

प्रस्तावना: वेदों की प्रासंगिकता

सृष्टि के प्रारंभ से ही मनुष्य के मन में जिज्ञासा रही है—"मैं कौन हूँ? यह जगत क्या है? और इसे चलाने वाली शक्ति क्या है?" इन प्रश्नों का उत्तर हमारे ऋषियों ने वेदों के माध्यम से दिया। 'वेद' शब्द का अर्थ ही है 'ज्ञान'। यह ज्ञान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ज्ञान (Knowledge), विज्ञान (Science) और ब्रह्मज्ञान (Supreme Wisdom) का त्रिवेणी संगम है।

भाग 1: ज्ञान (The Foundation of Knowledge)

ज्ञान क्या है?

सामान्य अर्थ में, किसी वस्तु या विषय की जानकारी प्राप्त करना 'ज्ञान' है। लेकिन वेदों के अनुसार, "सा विद्या या विमुक्तये"—वही विद्या है जो हमें बंधनों से मुक्त करे।

1.1 ज्ञान के स्रोत

भारतीय दर्शन में ज्ञान के चार मुख्य स्रोत माने गए हैं:

 * प्रत्यक्ष: जो हम अपनी आँखों से देखते हैं।

 * अनुमान: जो हम तर्क (Logic) के आधार पर समझते हैं।

 * उपमान: तुलना के माध्यम से समझना।

 * शब्द (आगम): वेदों और महापुरुषों के वचन।

1.2 गायत्री मंत्र और ज्ञान

गायत्री मंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) साक्षात् ज्ञान का प्रतीक है। इसमें हम 'धियो यो नः प्रचोदयात्' कहते हैं, जिसका अर्थ है—"हे प्रभु, हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।" बिना शुद्ध बुद्धि के प्राप्त किया गया ज्ञान 'अज्ञान' के समान है।

भाग 2: विज्ञान (The Science of Existence)

आज का आधुनिक युग 'विज्ञान' का युग माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वेदों में विज्ञान के बीज हज़ारों साल पहले बो दिए गए थे? 'वि' + 'ज्ञान' = 'विशेष ज्ञान' यानी प्रयोग और अनुभव पर आधारित ज्ञान।

2.1 वेदों में आधुनिक विज्ञान

 * गणित (Mathematics): 'शून्य' की अवधारणा और 'यजुर्वेद' में दी गई बड़ी संख्याएं (जैसे परार्ध) वेदों की ही देन हैं। 'शुल्ब सूत्र' रेखागणित (Geometry) का आधार हैं।

 * खगोल विज्ञान (Astronomy): ऋग्वेद में सूर्य के आकर्षण बल (Gravity) और पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने का वर्णन मिलता है। मंत्रों में बताया गया है कि सूर्य स्थिर है और पृथ्वी उसके चारों ओर घूमती है (ऋग्वेद 1.164.13)।

 * आयुर्वेद (Medical Science): अथर्ववेद पूरी तरह से स्वास्थ्य और औषधियों का विज्ञान है। यह केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है।

2.2 मंत्र और ध्वनि विज्ञान (Vibrational Science)

मंत्र केवल शब्द नहीं हैं, वे ऊर्जा की तरंगें (Energy Waves) हैं। जब हम 'ॐ' का उच्चारण करते हैं, तो हमारे शरीर के कण-कण में एक कंपन पैदा होता है, जो तनाव को कम करता है और एकाग्रता बढ़ाता है। आधुनिक विज्ञान अब इसे 'Cymatics' के रूप में स्वीकार कर रहा है।

भाग 3: ब्रह्मज्ञान (The Supreme Realization)

ज्ञान और विज्ञान की पराकाष्ठा 'ब्रह्मज्ञान' है। जब मनुष्य को यह बोध हो जाता है कि वह केवल एक शरीर नहीं, बल्कि उस अनंत 'ब्रह्म' (Cosmic Consciousness) का हिस्सा है, तो वह ब्रह्मज्ञानी कहलाता है।

3.1 अहम् ब्रह्मास्मि (I am Brahman)

उपनिषदों का महावाक्य है—'अहम् ब्रह्मास्मि'। इसका अर्थ अहंकार नहीं, बल्कि यह समझना है कि मेरे अंदर जो चेतना है, वही चेतना पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त है।

3.2 ब्रह्मज्ञान का मार्ग

ब्रह्मज्ञान तक पहुँचने के तीन चरण हैं:

 * श्रवण: गुरु या वेदों से सत्य को सुनना।

 * मनन: जो सुना है उस पर तर्क और विचार करना।

 * निदिध्यासन: ध्यान के माध्यम से उसे अपने भीतर अनुभव करना।

3.3 विज्ञान और ब्रह्मज्ञान का मिलन

आज के 'क्वांटम फिजिक्स' (Quantum Physics) के वैज्ञानिक जैसे अर्न्स्ट श्रोडिंगर और निकोला टेस्ला ने भी स्वीकार किया था कि वेदों का 'अद्वैत सिद्धांत' (Non-duality) ही अंतिम सत्य है। ऊर्जा न तो पैदा की जा सकती है और न नष्ट, वह केवल रूप बदलती है—यही ब्रह्मज्ञान है।

भाग 4: महामृत्युंजय मंत्र—स्वास्थ्य और अमरत्व

मंत्र:

> ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

> उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

यह मंत्र ज्ञान (शिव की भक्ति), विज्ञान (कोशिकाओं का पुनर्जीवन) और ब्रह्मज्ञान (मृत्यु के भय से मुक्ति) का अद्भुत उदाहरण है। यह हमें सिखाता है कि जिस तरह एक ककड़ी पकने के बाद खुद बेल से अलग हो जाती है, वैसे ही हम भी संसार के मोह से छूटकर अमृत (मोक्ष) को प्राप्त करें।

निष्कर्ष: GVB - एक नया दृष्टिकोण

GVB (Gyan Vigyan Brahmgyan) का उद्देश्य केवल मंत्र पढ़ना नहीं है, बल्कि उन्हें अपने जीवन में जीना है।

 * ज्ञान हमें समझ देता है।

 * विज्ञान हमें तर्क और शक्ति देता है।

 * ब्रह्मज्ञान हमें शांति और मुक्ति देता है।

वेदों की ओर लौटना ही मानवता के कल्याण का एकमात्र मार्ग है। आइए, हम सब मिलकर इस 'University of Veda' का हिस्सा बनें और स्वयं को प्रकाशित करें।

समापन संदेश:

"सत्यं वद, धर्मं चर" (सत्य बोलो, धर्म के मार्ग पर चलो)। यही वेदों का सार है।

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आधुनिक भौतिकी (Modern Physics) के सबसे महान वैज्ञानिक जैसे निकोला टेस्ला, अल्बर्ट आइंस्टीन, वर्नर हाइजेनबर्ग और अर्न्स्ट श्रोडिंगर ने स्वयं यह स्वीकार किया था कि उनके सिद्धांतों की जड़ें वेदों और उपनिषदों के दर्शन में मिलती हैं।

यहाँ वेदों और क्वांटम फिजिक्स के बीच की प्रमुख समानताओं का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:

1. चेतना और प्रेक्षक (Consciousness and the Observer)

 * क्वांटम फिजिक्स: 'डबल स्लिट एक्सपेरिमेंट' (Double Slit Experiment) ने यह साबित किया कि जब तक किसी कण (Particle) को देखा नहीं जाता, वह एक 'लहर' (Wave) की तरह व्यवहार करता है। यानी, प्रेक्षक (Observer) की चेतना भौतिक वास्तविकता को प्रभावित करती है।

 * वेद: उपनिषदों का मुख्य सिद्धांत है 'प्रज्ञानं ब्रह्म' (चेतना ही ब्रह्म है)। वेदों के अनुसार, यह संसार केवल इसलिए अस्तित्व में है क्योंकि इसे देखने वाली एक चेतना मौजूद है। बिना दृष्टा (Observer) के दृश्य (Matter) का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है।

2. ऊर्जा की अविनाशिता (Energy is Eternal)

 * क्वांटम फिजिक्स: 'लॉ ऑफ कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी' कहता है कि ऊर्जा न तो पैदा की जा सकती है और न ही नष्ट, वह केवल अपना रूप बदलती है। क्वांटम फील्ड थ्योरी के अनुसार, पूरा ब्रह्मांड एक ही 'क्वांटम फील्ड' की लहरों से बना है।

 * वेद: ईशावास्य उपनिषद का मंत्र कहता है:

   > ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।

   > पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

   > (अर्थ: वह पूर्ण है, यह पूर्ण है। पूर्ण से पूर्ण निकलता है, फिर भी पूर्ण ही शेष रहता है।)

   > यह मंत्र सीधे तौर पर ब्रह्मांड की अनंत और अविनाशी ऊर्जा (ब्रह्म) की ओर इशारा करता है।

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3. अद्वैत और क्वांटम एंटैंगलमेंट (Non-duality and Entanglement)

 * क्वांटम फिजिक्स: 'क्वांटम एंटैंगलमेंट' (Quantum Entanglement) के अनुसार, ब्रह्मांड के दो कण चाहे करोड़ों मील दूर हों, वे एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। एक में बदलाव होने पर दूसरे में तुरंत बदलाव होता है। यह साबित करता है कि मूल रूप से सब कुछ 'एक' है।

 * वेद: वेदों का 'अद्वैत' दर्शन (Non-dualism) कहता है कि 'अहं ब्रह्मास्मि' और 'तत्त्वमसि'। यानी, जो मुझमें है, वही तुझमें है और वही ब्रह्मांड के कण-कण में है। अलगाव (Separation) केवल एक भ्रम या 'माया' है।

4. माया और पदार्थ का भ्रम (Maya and the Illusion of Matter)

 * क्वांटम फिजिक्स: परमाणु (Atom) का 99.99% हिस्सा खाली होता है। जिसे हम ठोस पदार्थ समझते हैं, वह वास्तव में केवल ऊर्जा के वाइब्रेशन (Vibrations) हैं। भौतिक संसार एक 'होलोग्राम' जैसा है।

 * वेद: वेदों में इस जगत को 'माया' कहा गया है। माया का अर्थ यह नहीं कि संसार है ही नहीं, बल्कि इसका अर्थ है कि जैसा यह दिखता है, वैसा वास्तव में है नहीं। यह केवल इंद्रियों का भ्रम है, जबकि वास्तविक आधार केवल 'ब्रह्म' (ऊर्जा) है।

5. शून्य और अनंत (The Void and the Infinite)

 * क्वांटम फिजिक्स: 'क्वांटम वैक्यूम' (Quantum Vacuum) का मतलब खाली स्थान नहीं है, बल्कि यह असीमित ऊर्जा का भंडार है जहाँ से कण पैदा होते हैं और विलीन हो जाते हैं।

 * वेद: वेदों में 'शून्य' की अवधारणा दी गई है। शून्य केवल 'जीरो' नहीं है, बल्कि वह 'पूर्ण' है—एक ऐसा महाशून्य जहाँ से सृष्टि का सृजन होता है और अंत में सब उसी में मिल जाता है।

निष्कर्ष

वैज्ञानिक अर्न्स्ट श्रोडिंगर (Schrödinger) ने अपनी पुस्तक 'What is Life?' में स्पष्ट लिखा था कि:

> "ब्रह्मांड की एकता का विचार उपनिषदों के 'अहं ब्रह्मास्मि' के दर्शन से प्रेरित है।"

GVB (Gyan Vigyan Brahmgyan) के माध्यम से हम यही समझाना चाहते हैं कि जिसे विज्ञान आज 'खोज' रहा है, उसे हमारे ऋषियों ने हज़ारों साल पहले 'अनुभव' कर लिया था। विज्ञान बाहर की खोज है, और अध्यात्म अंदर की—सत्य दोनों का एक ही है।



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