ॐ शांति मंत्र एवं पुरुष सूक्त विवेचन



ॐ शांति मंत्र एवं पुरुष सूक्त विवेचन


॥ शांति मंत्र ॥

मंत्र:

ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै ।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

Transliteration:
Om Saha Nau Avatu | Saha Nau Bhunaktu | Saha Veeryam Karavaavahai |
Tejasvi Nau-Adhitam-Astu Maa Vidvishaavahai | Om Shantih Shantih Shantih ||

विस्तृत अर्थ (हिंदी में)

यह मंत्र गुरु और शिष्य के मध्य दिव्य समन्वय का प्रतीक है। यहाँ प्रार्थना की जा रही है कि परमात्मा हम दोनों की रक्षा करें, हमारा पालन करें और हमें मिलकर साहस, पराक्रम एवं उत्साह के साथ ज्ञान साधना करने की शक्ति दें। हमारा अध्ययन ऐसा हो जो तेजस्वी हो, ज्ञानवर्धक हो, और हमारे बीच राग, द्वेष, अहंकार या विरोध उत्पन्न न करे।

अंत में तीन बार "शान्तिः" का उच्चारण त्रिविध दुखों की शांति के लिए किया जाता है — भौतिक (Adhibhautika), मानसिक (Adhidaivika), आध्यात्मिक (Adhyatmika)।

English Meaning:

Om, May God protect us both (Teacher and Student). May He nourish us both. May we work together with great energy and courage. May our study be enlightening and not give rise to hostility. Om Peace, Peace, Peace.


॥ शं नो मित्रः मंत्र ॥

ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः ।
शं नो भवत्वर्यमा ।
शं नो इन्द्रो बृहस्पतिः ।
शं नो विष्णुरुरुक्रमः ॥

Transliteration:
Om Sham No Mitrah Sham Varunah | Sham No Bhavatv Aryamaa | Sham No Indro Brihaspatih | Sham No Vishnur Urukramah ||

विस्तृत व्याख्या

इस मंत्र में प्रकृति की दिव्य शक्तियों से कल्याण की प्रार्थना की गई है।

  • मित्र – प्रकाश एवं ऊर्जा का प्रतीक (सूर्य शक्ति)
  • वरुण – जल तत्व एवं संतुलन का प्रतीक
  • अर्यमा – नैतिकता और सामाजिक अनुशासन
  • इन्द्र – शक्ति और प्रेरणा
  • बृहस्पति – ज्ञान एवं वाणी
  • विष्णु – व्यापकता और संरक्षण

यह मंत्र हमें प्रकृति और दिव्यता के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देता है।

English Meaning:

May Mitra be auspicious to us. May Varuna bless us. May Aryama be gracious to us. May Indra and Brihaspati guide us. May Vishnu of great strides protect us.


॥ नमो ब्रह्मणे मंत्र ॥

नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो ।
त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि ।
त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि ।
ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि ॥

अर्थ एवं दर्शन

यहाँ साधक ब्रह्म को प्रणाम करता है और वायु को प्रत्यक्ष ब्रह्म कहता है। वायु जीवन का आधार है — श्वास ही चेतना का प्रवेश द्वार है। साधक प्रतिज्ञा करता है कि वह ऋत (सार्वभौमिक सत्य) और सत्यम् (व्यवहारिक सत्य) बोलेगा।

English Meaning:

Salutations to Brahman. Salutations to Vayu. You are the visible Brahman. I speak the cosmic truth. I speak the absolute truth.


॥ पुरुष सूक्त ॥

मंत्र 1

सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात् ।
स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशाङुलम् ॥

विस्तृत अर्थ

यहाँ "पुरुष" का अर्थ ब्रह्मांडीय चेतना से है। सहस्र (हजार) का अर्थ अनंत है। परमात्मा अनंत सिर, नेत्र और चरणों से युक्त है — अर्थात वह प्रत्येक जीव में विद्यमान है।

वह संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त है, फिर भी उससे परे है। "दशाङुलम्" का संकेत हृदय क्षेत्र की सूक्ष्म चेतना से है।

English Meaning:

The Purusha has thousands of heads, eyes, and feet. He pervades the entire universe and yet transcends it.


मंत्र 2

पुरुष एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यम् ।
उतामृतत्वस्येशानो यदन्नेनातिरोहति ॥

अर्थ

जो भूत, वर्तमान और भविष्य है — सब वही पुरुष है। वही अमृत का स्वामी है। वही अन्न है, वही भोगी है। वही सृष्टि करता है और वही पालन करता है।

English Meaning:

The Purusha alone is all that has been and all that will be. He is the Lord of immortality.


मंत्र 3

एतावानस्य महिमा अतो ज्यायांश्च पुरुषः ।
पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि ॥

विस्तृत अर्थ

यह सम्पूर्ण दृश्य जगत परमात्मा का केवल एक अंश है। उसके तीन भाग अदृश्य, दिव्य और अमृत स्वरूप हैं। अर्थात जो हम देखते हैं वह संपूर्ण सत्य नहीं है — सत्य उससे कहीं अधिक विशाल है।

English Meaning:

All beings are but one quarter of Him; Three quarters of Him are the immortal in heaven.


ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः

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