संभोग संसार से उत्थान

वेदों और सृष्टि की उत्पत्ति की वैदिक काल-गणना – ब्राह्मदिन और युग चक्र

सृष्टि की आयु

वैदिक काल गणना

ब्राह्मदिन और ब्राह्मरात्रि

मन्वन्तर क्या है

चार युगों की अवधि

वैदिक समय विज्ञान


वेदों और सृष्टि की उत्पत्ति: वैदिक काल-गणना का वैज्ञानिक विवेचन

प्रश्न

वेदों और सृष्टि की उत्पत्ति को कितने वर्ष हो चुके हैं?

उत्तर (संक्षेप में)

वैदिक काल-गणना के अनुसार वर्तमान ब्राह्मदिन में
1,96,08,52,976 (196 करोड़ 8 लाख 52 हजार 976) वर्ष
वेदों तथा सृष्टि की उत्पत्ति से व्यतीत हो चुके हैं।

वर्तमान वर्ष 77वाँ चल रहा है, जिसे आज लोग विक्रम संवत 1933 के नाम से जानते हैं।


यह गणना कैसे निश्चित की जाती है?

यह गणना अनुमान या कल्पना पर नहीं, बल्कि मन्वन्तर, युग और ब्राह्मदिन की सुव्यवस्थित परम्परा पर आधारित है।

🔹 वर्तमान मन्वन्तर

इस समय सातवाँ वैवस्वत मनु का मन्वन्तर चल रहा है।

इससे पूर्व छह मन्वन्तर बीत चुके हैं:

  1. स्वायम्भव
  2. स्वारोचिष
  3. औत्तमि
  4. तामस
  5. रैवत
  6. चाक्षुष

कुल मिलाकर:

  • 14 मन्वन्तर = 1 कल्प
  • प्रत्येक मन्वन्तर = 71 चतुर्युगी

चतुर्युगी और युगों की गणना

चार युग और उनके वर्ष

युग वर्ष
सतयुग 17,28,000
त्रेता 12,96,000
द्वापर 8,64,000
कलियुग 4,32,000

➡️ चारों मिलकर 1 चतुर्युगी = 43,20,000 वर्ष


वर्तमान स्थिति (आज कहाँ खड़े हैं?)

  • सातवें वैवस्वत मनु की
    28वीं चतुर्युगी चल रही है
  • इसमें कलियुग के
    4,976 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं
  • अभी 4,27,024 वर्ष शेष हैं

वैवस्वत मनु के कुल वर्ष

  • बीत चुके: 12,05,32,976 वर्ष
  • शेष: 18,61,87,024 वर्ष

ब्राह्मदिन और ब्राह्मरात्रि का सिद्धान्त

ब्राह्मदिन क्या है?

  • 1000 चतुर्युगी = 1 ब्राह्मदिन
  • इस काल में सृष्टि प्रकट अवस्था में रहती है

ब्राह्मरात्रि क्या है?

  • उतनी ही अवधि में सृष्टि प्रलय में लीन रहती है

➡️ दिन = सृष्टि
➡️ रात्रि = प्रलय

वर्तमान ब्राह्मदिन की स्थिति

  • बीत चुके वर्ष: 1,96,08,52,976
  • शेष वर्ष: 2,33,32,20,024

वैदिक संख्या-पद्धति (संक्षेप)

वैदिक ग्रन्थों में संख्या की परिभाषा अत्यन्त सूक्ष्म है:

  • एक (1)
  • दश (10)
  • शत (100)
  • सहस्र (1000)
  • लाख
  • करोड़
  • अरबुद
  • वृन्द
  • खर्व
  • निखर्व
  • शंख
  • पद्म
  • सागर
  • अन्त्य
  • मध्य
  • परार्ध

इसी गणित के आधार पर सूर्यसिद्धान्त और ज्योतिष ग्रन्थ रचे गये।


परम्परा और प्रमाण

  • यह गणना पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखी गई
  • पंचांग, तिथिपत्र, ज्योतिष ग्रन्थ — सभी में समानता
  • किसी भी शास्त्र में इस विषय पर विरोध नहीं मिलता

यही कारण है कि यह गणना आज तक अखंड चली आ रही है।


एक महत्वपूर्ण टिप्पणी

इस महान ज्ञान-परम्परा को
कुछ लोगों ने केवल धन कमाने का साधन बना दिया —
यह दुखद है।

परन्तु यही ज्ञान आज तक बचा रहा,
यह भी परमेश्वर की कृपा है।


निष्कर्ष

वैदिक काल-गणना केवल धार्मिक विश्वास नहीं,
बल्कि सुसंगठित समय-विज्ञान (Time Science) है।

इसका उद्देश्य:

  • अतीत, वर्तमान और भविष्य का स्पष्ट बोध
  • सृष्टि के चक्र को समझना
  • मानव को कालबोध से जोड़ना
  • यह लेख वैदिक ग्रन्थों, मनुस्मृति और ज्योतिष शास्त्रों में वर्णित काल-गणना पर आधारित है।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ