स्वस्तिदा विशां पतिर्वृत्रहा - श्लोक 1

स्वस्तिदा विशां पतिर्वृत्रहा - श्लोक 1

स्वस्तिदा विशां पतिर्वृत्रहा विमृधो वशी ।
वृषेन्द्रः पुर एतु नः सोमपा अभयंकरः ॥१॥

Hindi:
हे देव! आप सभी का कल्याण करें, व्रत्रों को हराएं और हमें सुरक्षा दें। सोम और इंद्र हमारे लिए अभयंकर (अभय प्रदान करने वाले) हों।

English:
O Deva! May you bless all beings, destroy the enemies, and grant us protection. May Soma and Indra provide fearlessness to us.

Word by Word:
स्वस्तिदा = कल्याण देने वाला | विशां = सभी | पति: = अधिपति / स्वामी | वृत्रहा = वृत्र को हराने वाला | विमृधो = विजयी / शक्तिशाली | वशी = प्रभु | वृषेन्द्रः = इंद्र | पुर = नगर / हमारे क्षेत्र में | एतु नः = हमारे पास आए | सोमपा = सोम + अभय | अभयंकरः = भय न देने वाला
वि न इन्द्र मृधो जहि नीचा यच्छ पृतन्यतः ।
अधमं गमया तमो यो अस्मामभिदासति ॥२॥

Hindi:
हे इंद्र! जो नीच कर्म करता है उसे दूर भगाइए और जो हमारे ऊपर अंधकार फैलाता है उसे हराइए।

English:
O Indra! Drive away the one who does vile deeds, and destroy the one who spreads darkness upon us.

Word by Word:
वि न = दूर करें | इन्द्र = इंद्र देव | मृधो = शक्तिशाली / हरने वाला | जहि = नष्ट कर | नीचा = नीच | यच्छ = जो करता है | पृतन्यतः = अन्यायपूर्ण कार्य | अधमं = नीच / पतित | गमया = ले जाओ / समाप्त कर दो | तमः = अंधकार | यो = जो | अस्मामभिदासति = हमारे ऊपर हमला करता है
वि रक्षो वि मृधो जहि वि वृत्रस्य हनू रुज ।
वि मन्युमिन्द्र वृत्रहन्न् अमित्रस्याभिदासतः ॥३॥

Hindi:
इंद्र! वृत्रों और शत्रुओं को हराइए। हमारे लिए सुरक्षा सुनिश्चित कीजिए।

English:
Indra! Defeat the enemies and the Vrtras; protect us from all foes.

Word by Word:
वि = दूर करो | रक्षो = रक्षा | मृधो = शक्तिशाली | जहि = मारो | वृत्रस्य = वृत्र का | हनू = नाश | रुज = शत्रु | वि मन्यु = मन्यु (शत्रु) | इन्द्र = इंद्र | वृत्रहन्न् = वृत्र हन | अमित्रस्य = शत्रु का | अभिदासतः = हमला करने वाला
अपेन्द्र द्विषतो मनोऽप जिज्यासतो वधम् ।
वि महच्छर्म यच्छ वरीयो यावया वधम् ॥४॥

Hindi:
हे इंद्र! शत्रुओं के मन में द्वेष रखने वालों को हराइए। हमारे चारों ओर श्रेष्ठ कर्म करने वालों का संरक्षण करें।

English:
O Indra! Destroy those who harbor enmity; protect those who perform superior deeds around us.

Word by Word:
अपेन्द्र = हे इंद्र | द्विषतो = द्वेष रखने वालों | मनः = मन | अप = भी | जिज्यासतो = इच्छुक | वधम् = वध / नाश | वि महच्छर्म = हमारे चारों ओर श्रेष्ठ कर्म | यच्छ वरीयो = जो श्रेष्ठ है | यावया वधम् = हानिकारक कर्म