अथर्ववेदः/काण्डं १/सूक्तम् १९

मा नो विदन् विव्याधिनो - श्लोक 1

मा नो विदन् विव्याधिनो मो अभिव्याधिनो - श्लोक 1

मा नो विदन् विव्याधिनो मो अभिव्याधिनो विदन् ।
आराच्छरव्या अस्मद्विषूचीरिन्द्र पातय ॥१॥

Hindi:
हे इन्द्र! हम पर कोई रोग और कष्ट न आए। हमारे शत्रु और बुरे प्रभावों को आप दूर करें।

English:
O Indra! May no disease or suffering afflict us. Protect us from enemies and harmful influences.

Word by Word:
मा = न | नो = हमारे ऊपर | विदन् = रोग करें | विव्याधिनः = रोग / कष्ट | अभिव्याधिनः = शत्रुजन्य संकट | आराच्छ = दूर करें | रव्याः = शत्रु / बुराई | अस्मद् = हमारे | विषूचीरिन् = दुश्मन | इन्द्र = इन्द्र देव | पातय = बचाएँ / रखें
विष्वञ्चो अस्मच्छरवः पतन्तु ये अस्ता ये चास्याः ।
दैवीर्मनुष्येषवो ममामित्रान् वि विध्यत ॥२॥

Hindi:
हे देवता! जो भी हमारे आसपास बुराई और संकट फैलाते हैं, उन्हें हमसे दूर रखें।

English:
O Deities! Let all those who spread evil and danger around us be kept away.

Word by Word:
विष्वञ्चः = सभी | अस्मत् = हमारे | शरवः = शत्रु / संकट | पतन्तु = दूर हों | ये = जो | अस्ता = उपस्थित | चास्याः = उसके | दैवीः = देवता | मनुष्येषु = मनुष्यों में | मम = मेरे | अमित्रान् = शत्रु | वि विध्यत = नष्ट करें / दूर रखें
यो नः स्वो यो अरणः सजात उत निष्ट्यो यो अस्मामभिदासति ।
रुद्रः शरव्ययैतान् ममामित्रान् वि विध्यतु ॥३॥

Hindi:
जो हमारे मित्र हैं या जो हमारे पास हानिकारक हैं, उन्हें दूर करें। हे रुद्र! हमारे शत्रुओं का विनाश करें।

English:
Whoever is a friend or foe, O Rudra! destroy all our enemies.

Word by Word:
यो = जो | नः = हमारे | स्वो = मित्र | अरणः = शत्रु | सजात = समान जाति | उत = या | निष्ट्यो = जो | अस्माम् = हमारे लिए | अभिदासति = करता है / नष्ट करता है | रुद्रः = रुद्र देव | शरव्यय = शत्रुजन्य | एतान् = इन | मम = मेरे | अमित्रान् = शत्रु | वि विध्यतु = नष्ट करें
यः सपत्नो योऽसपत्नो यश्च द्विषन् छपाति नः ।
देवास्तं सर्वे धूर्वन्तु ब्रह्म वर्म ममान्तरम् ॥४॥

Hindi:
जो हमारे खिलाफ़ दुश्मनी रखते हैं, चाहे वे मित्र हों या शत्रु, हे देवता! उन्हें हमारी रक्षा से दूर रखें।

English:
Whoever opposes us, friend or foe, O Deities! keep them away from our protection.

Word by Word:
यः = जो | सपत्नो = शत्रु | असपत्नो = नॉन-शत्रु / मित्र | यश्च = और जो | द्विषन् = द्वेष रखते हैं | छपाति = हमला करता है | नः = हमारे | देवाः = देवता | तं = उन्हें | सर्वे = सभी | धूर्वन्तु = दूर रहें | ब्रह्म वर्म = दिव्य सुरक्षा | मम अन्तरम् = हमारे भीतर

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