अथर्ववेदः/काण्डं १/सूक्तम् १८

निर्लक्ष्म्यं ललाम्यं - श्लोक 1

निर्लक्ष्म्यं ललाम्यं निररातिं - श्लोक 1

निर्लक्ष्म्यं ललाम्यं निररातिं सुवामसि ।
अथ या भद्रा तानि नः प्रजाया अरातिं नयामसि ॥१॥

Hindi:
हे देवता! आप निर्लक्ष्मी और सुशांत हैं। आप उन शुभताओं को हमारे जीवन में लेकर आएँ, और प्रजा के लिए अरातियों को दूर करें।

English:
O Deities! You are free from misfortune and full of calmness. Bring auspiciousness into our lives and remove miseries for your people.

Word by Word:
निर्लक्ष्म्यं = दुर्भाग्य रहित | ललाम्यं = शांत / प्रिय | निररातिं = दुःख रहित | सुवामसि = आप हैं | अथ = और | या = जो | भद्रा = शुभताएँ | तानि = वे | नः = हमारे | प्रजाया = प्रजा के लिए | अरातिं = दुःख / कष्ट | नयामसि = दूर करें
निररणिं सविता साविषक्पदोर्निर्हस्तयोर्वरुणो मित्रो अर्यमा ।
निरस्मभ्यमनुमती रराणा प्रेमां देवा असाविषुः सौभगाय ॥२॥

Hindi:
सविता, वरुण, मित्र और अर्यमा, आप हमारे दुःखों को दूर कर, देवताओं का प्रेम और सौभाग्य हमारे लिए बनाए रखें।

English:
Savita, Varuna, Mitra, and Aryama, remove our miseries and grant divine love and fortune for us.

Word by Word:
निररणिं = दुःख दूर करने वाला | सविता = सूर्य देव | साविषक्पदः = शुभ पदधारी | निर्हस्तयोः = हाथों से दूर | वरुणः = वरुण देव | मित्रः = मित्र देव | अर्यमा = अर्यमा देव | निरस्मभ्यम् = हमारे कष्टों से दूर | अनुमती = अनुमति / कृपा | रराणा = प्रेम / सौभाग्य | देवाः = देवता | असाविषुः = हमारे लिए | सौभगाय = सौभाग्य
यत्त आत्मनि तन्वां घोरमस्ति यद्वा केशेषु प्रतिचक्षणे वा ।
सर्वं तद्वाचाप हन्मो वयं देवस्त्वा सविता सूदयतु ॥३॥

Hindi:
जो भय और कष्ट हमारे शरीर में या केशों में हैं, हे देवता! उन्हें दूर कर, हे सविता, प्रकाश फैलाएँ।

English:
Whatever fear or suffering is in our body or hair, O Deities! Remove it, O Savita, let the light shine.

Word by Word:
यत् = जो | आत्मनि = शरीर में | तन्वां = तुम्हारा / हमारे | घोरमस्ति = भय / कष्ट है | यद्वा = या | केशेषु = बालों में | प्रतिचक्षणे = दृष्टि से | सर्वं = सब | तद्वाचाप् = उसके शब्द / मन्त्र | हन्मो = हम नष्ट करें | वयं = हम | देवः = देवता | त्वा = तुम्हें | सविता = सूर्य देव | सूदयतु = प्रकाश फैलाएँ
रिश्यपदीं वृषदतीं गोषेधां विधमामुत ।
विलीढ्यं ललाम्यं ता अस्मन् नाशयामसि ॥४॥

Hindi:
हम ऋषियों और गायों को सुरक्षित रखने के लिए प्रयास करते हैं, और जो विपत्ति और भय हैं, उन्हें दूर करें।

English:
We strive to protect the sages and cows, and destroy the calamities and fears that threaten us.

Word by Word:
रिश्यपदीं = ऋषियों के चरण | वृषदतीं = गायों के लिए | गोषेधां = गोशालाओं / पशुओं की रक्षा | विधमामुत = हम करते हैं / स्थापित करते हैं | विलीढ्यं = खेल / क्रिया | ललाम्यं = प्रिय / सौम्य | ता = वह | अस्मन् = हमारे लिए | नाशयामसि = नष्ट करें

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