विवेकचूडामणि श्लोक व्याख्या
सर्वप्रकारप्रमितिप्रशान्तिः बीजात्मनावस्थितिरेव बुद्धेः । सुषुप्तिरेतस्य किल प्रतीतिः किञ्चिन्न वेद्मीति जगत्प्रसिद्धेः ॥ १२१॥
हिन्दी: गहरी नींद (सुषुप्ति) वह अवस्था है जहाँ बुद्धि के सभी कार्य शांत हो जाते हैं और वह बीज रूप में स्थित रहती है। "मैं कुछ नहीं जानता" यह अनुभव इस अवस्था का प्रमाण है।
English: Deep sleep is the cessation of all kinds of perceptions, where the intellect remains in a seed-like form. The universal experience of "I knew nothing" is the proof of this state.
देहेन्द्रियप्राणमनोऽहमादयः सर्वे विकारा विषयाः सुखादयः । व्योमादिभूतान्यखिलं च विश्वं अव्यक्तपर्यन्तमिदं ह्यनात्मा ॥ १२२॥
हिन्दी: शरीर, इंद्रियाँ, प्राण, मन, अहंकार, और सभी विकार, सुख-दुख के विषय, आकाश आदि पंचमहाभूत और अव्यक्त प्रकृति तक यह संपूर्ण विश्व "अनात्मा" है।
English: The body, senses, vital air (Prana), mind, ego, and all modifications; the objects of enjoyment like pleasure, the elements starting from space, and the whole universe up to the Unmanifested (Avyakta) are all "Anatma" (Not-Self).
माया मायाकार्यं सर्वं महदादिदेहपर्यन्तम् । असदिदमनात्मतत्त्वं विद्धि त्वं मरुमरीचिकाकल्पम् ॥ १२३॥
हिन्दी: माया और उसके कार्य (महत् से लेकर शरीर तक) सब असत्य और अनात्मा हैं। इसे तुम मरुस्थल की मरीचिका (मृगतृष्णा) के समान मिथ्या समझो।
English: Maya and all its effects—from the cosmic intellect (Mahat) to the physical body—are unreal and non-Self. Know them to be like a mirage in a desert.
अथ ते सम्प्रवक्ष्यामि स्वरूपं परमात्मनः । यद्विज्ञाय नरो बन्धान्मुक्तः कैवल्यमश्नुते ॥ १२४॥
हिन्दी: अब मैं तुम्हें परमात्मा के वास्तविक स्वरूप के बारे में बताऊंगा, जिसे जानकर मनुष्य सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर कैवल्य (मोक्ष) प्राप्त कर लेता है।
English: Now I shall explain to you the true nature of the Supreme Self (Paramatman), by knowing which a person is freed from bonds and attains absolute liberation (Kaivalya).
अस्ति कश्चित्स्वयं नित्यमहम्प्रत्ययलम्बनः । अवस्थात्रयसाक्षी सन्पञ्चकोशविलक्षणः ॥ १२५॥
हिन्दी: वह कोई स्वयं-प्रकाशित और नित्य तत्व है जो "मैं" के प्रत्यय का आधार है। वह तीनों अवस्थाओं (जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति) का साक्षी है और पाँचों कोशों से अलग है।
English: There is some self-existent, eternal entity that is the basis for the consciousness of "I". It is the witness of the three states (waking, dream, deep sleep) and is distinct from the five sheaths (Koshas).