दिनांक - -२१ नवम्बर २०२४ ईस्वी

 🕉️🙏ओ३म् सादर नमस्ते जी 🙏🕉️

🌷🍃 आपका दिन शुभ हो 🍃🌷



दिनांक  - -२१ नवम्बर २०२४ ईस्वी


दिन  - - गुरुवार 


  🌖 तिथि -- षष्ठी ( १७:०३ तक तत्पश्चात  सप्तमी )


🪐 नक्षत्र - - पुष्य ( १५:३५ तक तत्पश्चात  आश्लेषा )

 

पक्ष  - -  कृष्ण 

मास  - -  मार्गशीर्ष 

ऋतु  - - हेमन्त 

सूर्य  - -  दक्षिणायन 


🌞 सूर्योदय  - - प्रातः ६:४९ पर  दिल्ली में 

🌞 सूर्यास्त  - - सायं १७:२५ पर 

 🌖चन्द्रोदय  --  २२:४३ पर 

 🌖 चन्द्रास्त  - - १२:०० पर 


 सृष्टि संवत्  - - १,९६,०८,५३,१२५

कलयुगाब्द  - - ५१२५

विक्रम संवत्  - -२०८१

शक संवत्  - - १९४६

दयानंदाब्द  - - २००


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 🚩‼️ओ३म्‼️


🔥आओ लौट चलें वेदों की ओर।

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      एक समय था जब भारत विश्वगुरु था ।संसार का सिरमौर था सारे संसार के लोग भारत के ऋषि मुनियों के चरणों मे बैठकर ज्ञान-विज्ञान और चरित्र की शिक्षा लिया करते थे।


      संसार के आदि सम्राट महर्षि मनु ने हिमाचल की चोटी पर खड़े होकर  भारतवर्ष के गौरव की डिण्डिम घोषणा करते हुए कहा था----

ऐतददेशप्रसूतस्य  सकाशादग्रजन्मनः।

स्वं स्वं चरित्रं शिक्षेरन पृथिव्यां सर्वमानवाः।।

 ----- मनु० २/२०

आर्यावर्त देश में उत्पन्न अग्रजन्मा=ब्रहामणों के चरणों में बैठकर संसार के लोग अपने अपने योग्य विद्या और चरित्र की शिक्षा ग्रहण करें।


      महर्षि दयानंद सरस्वती भारतवर्ष के गौरव और महिमा का वर्णन करते हुए  लिखते है-----

"यह आर्यावर्त्त देश ऐसा है,जिसके सदृश भूगोल में दूसरा कोई देश नहीं. है।इसलिए इस भूमि का नाम स्वर्णभूमि है,क्योंकि यही स्वर्णादि रत्नों को उत्पन्न करती है इसलिए सृष्टि के आदि मे आर्यलोग इसी देश में आकर बसे ।जितने भूगोल में देश हैं वे सब इसी की प्रशंसा करते हैं और आशा करते हैं कि इस देश की संस्कृति और सभ्यता से ही हमारा कल्याण होगा।"


    फ्रैंच लेखक जैकालियट महोदय ने अपने ग्रंथ Bible in Indiya  में "भारतवर्ष को सभ्यता का हिंडोला कहा है।"

भारतवर्ष को ज्ञान और धर्म का आदिस्रोत स्वीकार करते हुए प्रो०हीरेन लिखते हैं----

"भारतवर्ष ही वह स्रोत है,जिससे न केवल एशिया ने अपितु समस्त पाश्चात्य जगत् ने भी अपनी विद्या और धर्म प्राप्त किया।"

मेजर डी० ग्राह्मपोल का कथन है------

"भारत उस समय सभ्यता और विद्या के उच्च शिखर पर पहुँचा हुआ था,जिस समय हमारे पूर्वज अभी वृक्षों की छाल के बने हुए कपड़े पहनकर अफ्रातफ्री में इधर-उधर भटक रहे थे।"


      मुसलमान लेखक वस्साफ़ अपने ग्रंथ 'तारीखे वस्साफ़  में लिखते हैं---"सभी इतिहासवेत्ता यह मानते है कि भारतवर्ष भूमंडल का एक अतीव रमणीय और चित्ताकर्षक देश है।इसकी पावन पुनीत मिट्टी के रजकण वायु से भी अधिक हल्के और पवित्र हैं और इसकी वायु की पवित्रता स्वयं पवित्रता से भी अधिक पवित्र है।इसके ह्रदयग्राही मैदान स्वर्ग की स्मृति को जगाने वाले हैं।"

वे पुनः लिखते हैं----

"यदि मैं यह दावा करूँ कि स्वर्ग भारत में ही है तो तू आश्चर्य मत करना क्योंकि स्वयं स्वर्ग भी भारत की समानता नहीं कर सकता ।"


     परन्तु दुर्भाग्य हमने अपनी सभ्यता, संस्कृति ज्ञान-विज्ञान, धर्म सबको भुलाकर इस पवित्रतम धरा को पाप ,हत्या, बलात्कार,हिंसा,, लूट-खूसूट और अपराध की भूमि बना दिया।अंधाधुंध प्रदूषण कर जल,वायु और भूमि को अपवित्र कर दिया ।

यदि आज भी हम अपने स्वर्णिम अतीत को देखें और परमात्मा प्रदत्त ज्ञान वेदों का अध्ययन करें और उसका अनुसरण करे तो भारत पुनः उतना ही गौरवशाली, समृद्ध  पवित्र ,संस्कारी देश बन संसार का सिरमौर बन सकता है ।आज भी हममें वो क्षमता है की हम विश्वगुरु का पद प्राप्त कर सकें ।अपने ,सामर्थ्य को जगाओ .....जुड़ो जड़ों से लौटो वेदों की ओर।


जय आर्य ।जय आर्यावर्त ।जय भारत ।


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💐🚩 आज का वेद मंत्र 🚩💐


🌷 ओ३म् ये देवानां यज्ञिया यज्ञियानां मनोर्यजत्रा अमृता ऋतज्ञा: । ते नो रासन्तामुरूगायमद्य यूयं पात स्वस्तिभि: सदा न:। (ऋग्वेद ७|३५|१५ )


💐 अर्थ :-  पूजनीय विद्वान् यज्ञमय जीवन वाले ज्ञानी, यशस्वी देव जन, धर्म के जानने हारे हमको उत्तम ज्ञान का उपदेश करें ।हे देवों सुखों द्वारा सदा हमारी रक्षा करें ।


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 🔥विश्व के एकमात्र वैदिक  पञ्चाङ्ग के अनुसार👇

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 🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ 🕉🚩🙏


(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त)       🔮🚨💧🚨 🔮


ओ३म् तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीये प्रहरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- पञ्चर्विंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२५ ) सृष्ट्यब्दे】【 एकाशीत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०८१) वैक्रमाब्दे 】 【 द्विशतीतमे ( २००) दयानन्दाब्दे, काल -संवत्सरे,  रवि- दक्षिणायने , हेमन्त -ऋतौ, मार्गशीर्ष - मासे, कृष्ण पक्षे, षष्ठम्यां

 तिथौ, पुष्य 

 नक्षत्रे, गुरुवासरे

 , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे, आर्यावर्तान्तर गते, भारतवर्षे भरतखंडे...प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ,  आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे


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