जीवन का उद्देश्य

दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

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अंगद बिष्ट की, जिन्होंने चीन में आयोजित सबसे खतरनाक फाइट, MMA (मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स) के मुकाबले में भारत का परचम लहराया 🎖️

 



उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के एक छोटे से गांव का साधारण युवक, जिसने अपनी मेहनत और हिम्मत से वह कर दिखाया जो किसी ने सोचा भी नहीं था—हम बात कर रहे हैं अंगद बिष्ट की, जिन्होंने चीन में आयोजित सबसे खतरनाक फाइट, MMA (मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स) के मुकाबले में भारत का परचम लहराया 🎖️💪। अंगद, जो कभी अपने गांव की गलियों में दौड़ते थे, आज दुनिया के सबसे खतरनाक रिंग में अपना लोहा मनवा रहे हैं। चीन की जमीन पर हुए फ्लाईवेट कैटेगरी के इस मुकाबले में उन्होंने फिलीपींस के जॉन अल्मांजा को हराते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली 🥋🔥।


अंगद की इस शानदार जीत ने न सिर्फ उन्हें एक चैंपियन बनाया, बल्कि पूरे देश को गर्व से भर दिया 🇮🇳🌟। उनकी जीत इतनी प्रभावशाली थी कि रेफरी को उन्हें टेक्निकल नॉकआउट (TKO) के जरिए विजेता घोषित करना पड़ा। यह जीत महज एक मुकाबला नहीं, बल्कि एक साधारण युवक के असाधारण बनने की कहानी है 💥🎯।


रुद्रप्रयाग के इस छोटे से गांव में जन्मे अंगद के पास बड़े सपने थे। उनके पिता, जो एक साधारण किसान हैं, ने शायद कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा एक दिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करेगा 🌾👨‍🌾। अंगद ने अपनी शुरुआती ट्रेनिंग देहरादून में की और अब उनका खुद का ट्रेनिंग सेंटर भी है, जहां वह अन्य युवाओं को भी प्रेरित कर रहे हैं 🏋️‍♂️🤼‍♂️।


अब उनकी नजरें सेमीफाइनल पर टिकी हैं, जहां उनका सामना कोरिया के दिग्गज रेसलर चाई डोंग से होगा 🥇⚔️। यह मुकाबला आसान नहीं होगा, लेकिन अंगद का आत्मविश्वास और तैयारी बता रही है कि वह किसी भी चुनौती के लिए तैयार हैं 🔥💪।


अंगद बिष्ट का यह सफर हर उस युवा के लिए एक प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करने की हिम्मत रखता है 🌠🚀। उन्होंने साबित कर दिया है कि चाहे आप कहीं से भी आएं, अगर आपके इरादे मजबूत हैं, तो आप दुनिया के किसी भी कोने में अपना नाम रोशन कर सकते हैं 🌍👏

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