अथर्ववेदः/काण्डं १/सूक्तम् ३०

विश्वे देवा वसवो - श्लोक 1

विश्वे देवा वसवो रक्षतेममुतादित्या जागृत यूयमस्मिन् - श्लोक 1

विश्वे देवा वसवो रक्षतेममुतादित्या जागृत यूयमस्मिन् ।
मेमं सनाभिरुत वान्यनाभिर्मेमं प्रापत्पौरुषेयो वधो यः ॥१॥

Hindi:
हे देवों! सभी देव और वसव (इन्द्र जैसे शक्तिशाली देवता) इस जगत में जाग्रत रहें और हमें सुरक्षा दें। हमारे लिए यह शक्ति और पुरुषार्थ प्रदान करें।

English:
O all gods! May the Vasus and other gods stay awake in this world and protect us. Grant us strength and courage.

Word by Word:
विश्वे = सभी | देवा = देवता | वसवः = इन्द्रादि देवता | रक्षते = रक्षा करें | अमुत = हमसे | आदित्या = सूर्य | जागृत = जाग्रत | यूयम् = आप लोग | अस्मिन् = इस (जगत में) | मेमं = हमें | सनाभि = शक्ति सहित | उत = और | वान्यनाभिः = बाहरी तत्वों से | प्रापत् = प्राप्त करें | पौरुषेयो = पुरुषार्थ/शक्ति | वधो यः = वह जो नाश कर सके शत्रुओं को
ये वो देवाः पितरो ये च पुत्राः सचेतसो मे शृणुतेदमुक्तम् ।
सर्वेभ्यो वः परि ददाम्येतं स्वस्त्येनं जरसे वहाथ ॥२॥

Hindi:
हे देवताओं और पूर्वजों! जो भी मेरे आदेश सुनते हैं, उन सभी के लिए मैं कल्याण और सुरक्षा का आशीर्वाद दूँ।

English:
O gods and ancestors! To all who heed my words, I grant blessings of welfare and protection.

Word by Word:
ये = ये | वो = वे | देवाः = देवता | पितरो = पूर्वज | पुत्राः = संतान | सचेतसो = जो ध्यानपूर्वक सुनते हैं | मे = मेरे | शृणुते = सुनते हैं | एदमुक्तम् = यह वचन | सर्वेभ्यः = सभी के लिए | वः = आप लोगों के लिए | परि ददाम्येतम् = मैं प्रदान करता हूँ | स्वस्त्येनम् = कल्याण | जरसे = सुरक्षा | वहाथ = बनाए रखे
ये देवा दिवि ष्ठ ये पृथिव्यां ये अन्तरिक्ष ओषधीषु पशुष्वप्स्वन्तः ।
ते कृणुत जरसमायुरस्मै शतमन्यान् परि वृणक्तु मृत्यून् ॥३॥

Hindi:
हे देवों! जो आकाश, पृथ्वी, अंतरिक्ष, औषधियों, पशु और पानी में निवास करते हैं, वे हमारे जीवन को दीर्घायु और सुरक्षा प्रदान करें।

English:
O gods residing in sky, earth, space, herbs, animals, and waters! Grant long life and protection.

Word by Word:
ये = ये | देवा = देवता | दिवि = आकाश में | ष्ठ = स्थित | पृथिव्यां = पृथ्वी में | अन्तरिक्ष = अंतरिक्ष में | ओषधीषु = जड़ी-बूटियों में | पशुष्वप्स्वन्तः = पशु और पानी में | ते = वे | कृणुत = करें | जरसमायुः = दीर्घायु | अस्मै = हमारे लिए | शतमन्यान् = कई वर्षों तक | परि वृणक्तु = सुरक्षित रखें | मृत्यून् = मृत्यु से
येषां प्रयाजा उत वानुयाजा हुतभागा अहुतादश्च देवाः ।
येषां वः पञ्च प्रदिशो विभक्तास्तान् वो अस्मै सत्रसदः कृणोमि ॥४॥

Hindi:
हे देवों! जिनके लिए यज्ञ, हवन और भेंट अर्पित की जाती है, उनके लिए मैं इस यज्ञ में सुरक्षा और संपन्नता प्रदान करता हूँ।

English:
O gods! For those offered sacrifices and oblations, I ensure protection and prosperity through this ritual.

Word by Word:
येषां = जिनके | प्रयाजा = यज्ञ में अर्पित | उत = और | वानुयाजा = अन्य अर्पण | हुतभागा = हवन के भाग | अहुतादश्च = अनार्पित | देवाः = देवता | येषां = उनके लिए | वः = आपके लिए | पञ्च प्रदिशः = पांच दिशाओं में | विभक्ताः = विभाजित | तान् = उन्हें | वो = वे | अस्मै = हमारे लिए | सत्रसदः = यज्ञ में सुरक्षित | कृणोमि = मैं करता हूँ

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