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पक्षी से
सीख
अवधूत दत्तात्रेय हर क्षण किसी से ज्ञान प्राप्त करने के लिए तत्पर रहा करते
थे। वह पशु-पक्षियों एवं कीट- पतंगों की गतिविधियों को बड़े ध्यान से देखा करते और
विवेचना कर उनसे शिक्षा प्राप्त किया करते । दत्तात्रेय अकसर कहते थे, जिनसे मैं कोई भी शिक्षा लेता हूँ , वे मेरे गुरु हैं । एक दिन वे वन जा रहे थे ।
रास्ते में एक वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान् का स्मरण करने लगे । अचानक उनकी दृष्टि
आकाश की ओर गई । उन्होंने देखा कि एक पक्षी आगे - आगे उड़ा जा रहा है और एक दर्जन
पक्षी उसका पीछा कर रहे हैं । पीछा करने वाले पक्षी आगे के पक्षी से अलग नस्ल के
हैं । दत्तात्रेय ने ध्यान से देखा कि आगे वाले पक्षी की चोंच में रोटी का टुकड़ा
है और उसे छीनने के लिए ही सभी पक्षी उसका पीछा कर रहे हैं । इस क्रम में कुछ
पक्षी चोंच मारकर उसे घायल कर रहे हैं । पक्षियों के आक्रमण से लहूलुहान हुए उस पक्षी
ने अचानक चोंच से रोटी का टुकड़ा गिरा दिया । पीछा कर रहे किसी अन्य पक्षी ने उस
टुकड़े को लपक लिया । अब अन्य पक्षी उसे घेरकर चोंच मारने लगे । पहले वाला पक्षी
चोंचों के प्रहार से लहूलुहान हुआ नीचे उतरकर एक वृक्ष पर बैठ गया ।
दत्तात्रेय ने हाथ जोड़कर उसे संकेत करते हुए कहा, हे पक्षी, आज तू भी मेरा गुरु हुआ । मैंने तुझसे आज यही सीखा है कि संसार
में जिस वस्तु की प्राप्ति के लिए ज्यादा लोग अधिकार जताते हों, उसे छोड़ देना ही उचित है ।
100 Questions based on Rigveda Samhita
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