🕉️🙏ओ३म् सादर नमस्ते जी 🙏🕉️
🌷🍃 आपका दिन शुभ हो 🍃🌷
दिनांक - - १३ दिसम्बर २०२४ ईस्वी
दिन - - शुक्रवार
🌔 तिथि -- त्रयोदशी ( ७:४० तक तत्पश्चात चतुर्दशी )
🪐 नक्षत्र - - भरणी ( ७:५० तक तत्पश्चात कृत्तिका ) [ २९:४८ से रोहिणी ]
पक्ष - - शुक्ल
मास - - मार्गशीर्ष
ऋतु - - हेमन्त
ऋतु - - दक्षिणायन
🌞 सूर्योदय - - प्रातः ७:०५ पर दिल्ली में
🌞 सूर्यास्त - - सायं १७:२६ पर
🌔चन्द्रोदय -- १५:२६ पर
🌔 चन्द्रास्त - - २९:५४ पर
सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२५
कलयुगाब्द - - ५१२५
विक्रम संवत् - -२०८१
शक संवत् - - १९४६
दयानंदाब्द - - २००
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🚩 ‼️ओ३म् ‼️ 🚩
🔥अमूल्य―उपदेश!!!
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(१) आश्चर्य की बात―आश्चर्य है उस मानव पर जिसे मृत्यु का निश्चय है और फिर भी पापासक्त है। आश्चर्य है उस इन्सान पर जो संसार को नाशवान जानता है फिर भी उसमें फंसा है, आश्चर्य है उस मनुष्य पर जो ईश्वर विश्वासी हो और फिर भी चिन्तातुर रहे। आश्चर्य है उस बुद्धिमान पर जो दुर्गति से बचना चाहता है और फिर भी दुष्कर्म करता है। आश्चर्य है उस व्यक्ति पर जो ईश्वर भक्त होकर भी उसके स्थान पर दूसरी वस्तु का पूजन करे, आश्चर्य है ऐसे योगी पर जो मुक्ति का इच्छुक है और विषयों में लीन है।
(२) पाप― जो मनुष्य पाप करते समय किवाड़ों को बन्द कर लेता है, लोगों से छिप जाता है और एकान्त में उसकी आज्ञा को भंग करता है तो प्रभु कहता है, ओ मूर्ख, तूने अपनी ओर देखने वालों में मुझे ही सबसे कम समझा है कि सबसे परदा करना आवश्यक समझता है और मुझ से लोगों के बराबर भी लज्जा नहीं करता।
(३) अनिष्ट वस्तुएं― विद्वानों में कुकर्म, हाकिमों में लोभ, धनवानों में कृपणता, स्त्रियों में निर्लज्जता, वृद्धों में व्यभिचार। पांचों पर प्रभु की मार।
(४) क्रोध और अभिमान― जब तक तेरे अन्दर क्रोध और अभिमान है तब तक अपने को ज्ञानियों में मत समझ―क्योंकि तू मूर्ख ही है।
(५) प्रभु से दूर― तुम ऐसी वस्तुएं एकत्रित करने में प्रयत्नशील हो जिन्हें तुम खा न सकोगे। ऐसी वस्तुओं की इच्छा करते हो जिन्हें तुम पा न सकोगे। ऐसे मकान बनाते हो जिनमें तुम बस न सकोगे। ये सब वस्तुएं तुम्हें उस दाता से दूर ले जाने वाली हैं।
(६) ईश्वर से डरो― जो ईश्वर से डरता है, उसे किसी से डरने की आवश्यकता नहीं।
(७) भाग्यशाली― भाग्यशाली वह है जो नेकी करे और डरे। भाग्यहीन वह है जो बदी करे और सर्वप्रिय होने की आशा करे।
(८) दिल दुखाना―नास्तिकता के पश्चात् सबसे बड़ा पाप किसी का दिल दुखाना है।
(९) सुकर्म― सुकर्मियों को ईश्वरीय ज्ञान की प्राप्ति होती है और कुकर्मी उससे वंचित रहते हैं।
(१०) मन की मलीनता― तीन वस्तुएं मन की मलीनता को प्रकट करती हैं―(१) ईर्ष्या करना, (२) दिखावा करना, (३) अपने को बड़ा तथा दूसरे को छोटा समझना।
(११) वास्तविक ज्ञान― वास्तविक ज्ञान वह है जो पाप से बचाये, निजी न्यूनता को बताये, ईश्वर-भक्ति में लगाये, विषयों से हटाये तथा धर्म कार्यों में जुटाये।
(१२) स्त्री से व्यवहार― स्त्री के साथ सद्व्यवहार कर। स्वयं कष्ट सह परन्तु उसे कष्ट न दे।
(१३) दुश्चिन्तन― किसी के प्रति बुरा विचार भी मन में मत लाओ। स्मरण रखो का उसका प्रतिबिम्ब उसके दिल पर भी अवश्य पड़ता है।
(१४) अधोगति― (१) परलोक पर विश्वास न होना (२) एकान्त में दुश्चिन्तन करना (३) मृत्यु को भूल जाना (४) प्रभु की प्रसन्नता से संसार की प्रसन्नता को उत्तम समझना (५) विषयों में आसक्त रहना (६) आस्तिक जनों की वाणी पर विश्वास न करना। ये छ: बातें अधोगति की ओर ले जाने वाली होती हैं।
( १५) सच्चा ज्ञानी― जो धनवानों को शिक्षा लेने की दृष्टि से देखता है, ईर्ष्या से नहीं। स्त्रियों को मातृदृष्टि से देखता है काम वासना से नहीं। सन्तों को सेवा की दृष्टि से देखता है अभिमान भरी दृष्टि से नहीं, वह ही वास्तविक ज्ञानी है।
(१६) विनम्रता― यदि बड़ा बनना चाहते हो तो प्रथम छोटे बनने का प्रयत्न करो।
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🕉️🚩 विदुर नीति श्लोक 🕉️🚩
🌷यथा यथा हि पुरुषः कल्याणे कुरुते मनः ।
तथा तथास्य सर्वार्थाः सिध्यन्ते नात्र संशयः ।।-(३/४१)
भावार्थ:- जैसे-जैसे मनुष्य शुभ कार्यों में मन लगाता है,वैसे-वैसे उसकी सभी इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं,इसमें कोई सन्देह नहीं है।
🌷इज्याध्ययनदानादि तपः सत्यं क्षमा घृणा ।
अलोभ इति मार्गोऽयं धर्मस्याष्टविधः स्मृतः ।।-(३/५५)
तत्र पूर्वचतुर्वर्गो दम्भार्थमपि सेव्यते ।
उत्तरश्च चतुर्वर्गो नामहात्मसु तिष्ठति ।।-(३/५६)
भावार्थ:-यज्ञ,अध्ययन,दान,तप,सत्यभाषण,क्षमा,दया और लोभ-त्याग-यह धर्म का आठ प्रकार का मार्ग कहा गया है।
इनमें से प्रथम चार (यज्ञ,अध्ययन,दान और तप) को दुर्जन लोग दम्भ=दिखावे के लिए भी सेवन कर सकते हैं,परन्तु अगले चार गुण (सत्य,क्षमा,दया और लोभ-त्याग) ये दुर्जनों में कभी नहीं रह सकते।
🌷 न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धा
वृद्धा न ते ये न वदन्ति धर्मम् ।
नासौ धर्मो यत्र न सत्यमस्ति
न तत्सत्यं यच्छलेनाभ्युपेतम् ।।-(३/५७)
भावार्थ:- वह सभा ही नहीं है जिसमें वृद्ध न हों,वे वृद्ध ही नहीं हैं जो धर्म का कथन नहीं करते,वह धर्म नहीं है
जिसमें सत्य न हो और वह सत्य नहीं है जो छल से युक्त हो।
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🔥विश्व के एकमात्र वैदिक पञ्चाङ्ग के अनुसार👇
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🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ 🕉🚩🙏
(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त) 🔮🚨💧🚨 🔮
ओ३म् तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीये प्रहरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- पञ्चर्विंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२५ ) सृष्ट्यब्दे】【 एकाशीत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०८१) वैक्रमाब्दे 】 【 द्विशतीतमे ( २००) दयानन्दाब्दे, काल -संवत्सरे, रवि- दक्षिणायने , हेमन्त -ऋतौ, मार्गशीर्ष - मासे, शुक्ल पक्षे, त्रयोदश्यां
तिथौ,
भरणी नक्षत्रे, शुक्रवासरे
, शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे, आर्यावर्तान्तर गते, भारतवर्षे ढनभरतखंडे...प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ, आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे
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