पिछले अध्याय में हमने देखा कि Meditation एक scientific tool है —
एक method जिसके माध्यम से मन को instrument बनाया जाता है और चेतना को स्पष्ट किया जाता है।
अब अगला प्रश्न स्वाभाविक है:
Traita-vāda के अनुसार awareness कोई static state नहीं है।
यह एक inner journey है — गहराती हुई, परतें खोलती हुई, और अंततः जीव को उसकी मूल सत्ता से जोड़ती हुई।
आम तौर पर consciousness और awareness को समानार्थी समझ लिया जाता है।
Traita-vāda इनमें एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण अंतर बताता है।
Consciousness always present रहती है,
लेकिन awareness fluctuate करती है।
उदाहरण:
इससे स्पष्ट होता है:
Awareness cultivated होती है, consciousness नहीं।
Inner journey का पहला चरण है — noticing।
मन सामान्य अवस्था में:
Traita-vāda कहता है:
जागरूकता तब शुरू होती है
जब व्यक्ति सोच को देखने लगता है,
न कि उसमें बहने लगता है।
यह कोई mystical घटना नहीं,
बल्कि psychological shift है।
जब noticing स्थिर होता है,
तो धीरे-धीरे Witness (Sākṣī) प्रकट होता है।
Witness का अर्थ:
महत्वपूर्ण बिंदु:
Witness कोई नया entity नहीं है।
वही चेतना है, जो अब स्वयं को पहचान रही है।
यहीं Traita-vāda Advaita से जुड़ता है,
लेकिन एक भेद के साथ —
यह witness जीवन से कटता नहीं,
बल्कि जीवन को स्पष्ट करता है।
Traita-vāda awareness को stages में समझता है:
यह क्रम linear नहीं,
लेकिन experiential है।
Traita-vāda में awareness और time का संबंध विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
जब awareness गहराती है:
इसलिए कहा गया:
Awareness is timeless presence in time.
एक आम गलतफहमी:
जागरूक व्यक्ति निष्क्रिय हो जाता है
Traita-vāda इसका खंडन करता है।
Awareness से:
Awareness का अर्थ:
यही कारण है कि Traita-vāda awareness को
जीवन-विमुख नहीं, जीवन-परिष्कृत मानता है।
Inner journey का एक निर्णायक चरण है —
identity dissolution।
यहाँ व्यक्ति देखता है:
यह डरावना लग सकता है,
क्योंकि ego security खोता है।
लेकिन Traita-vāda कहता है:
जो गिरता है, वह तुम नहीं हो।
जो बचता है, वही तुम हो।
यह insight liberation की दिशा में पहला वास्तविक कदम है।
जैसे-जैसे awareness गहराती है:
Traita-vāda ethics को command नहीं मानता,
बल्कि awareness का by-product मानता है।
जब दूसरे की पीड़ा स्पष्ट दिखने लगती है, तो हिंसा असंभव हो जाती है।
Traita-vāda में awareness का एक गहरा आयाम है —
मृत्यु का बोध।
Awareness में व्यक्ति देखता है:
लेकिन awareness बनी रहती है।
इससे:
Awareness मृत्यु की तैयारी नहीं,
मृत्यु-भय का अंत है।
Traita-vāda में कोई अंतिम “state” नहीं घोषित की जाती।
Awareness:
यह journey:
आज की दुनिया में:
Awareness inner journey इन सबका उत्तर नहीं,
लेकिन दृष्टि प्रदान करती है।
Traita-vāda awareness को:
सबसे जोड़ता है।
Traita-vāda के अनुसार:
Inner journey कोई पलायन नहीं,
बल्कि घर लौटना है।
जहाँ मन शांत है
जहाँ शरीर उपस्थित है
जहाँ चेतना स्वयं को जानती है
वहीं Traita-vāda की जागरूकता है।
अब अगला प्रश्न उठता है:
👉 इसका उत्तर मिलेगा
Chapter 8 – Ethical Dimensions of Traita-vāda में।
Previous Chapter:
Chapter 6 – Meditation as a Scientific Tool
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Chapter 8 – Ethical Dimensions of Traita-vāda
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