जीवन का उद्देश्य

दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

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Consciousness and the Inner Journey of Awareness चेतना और जागरूकता की आंतरिक यात्रा : Traita-vāda का अनुभवात्मक आयाम

Inner journey of awareness and consciousness in Traita-vāda philosophy



Chapter 8 – Consciousness and the Inner Journey of Awareness

चेतना और जागरूकता की आंतरिक यात्रा : Traita-vāda का अनुभवात्मक आयाम


1. भूमिका: Awareness की यात्रा क्यों आवश्यक है

पिछले अध्याय में हमने देखा कि Meditation एक scientific tool है —
एक method जिसके माध्यम से मन को instrument बनाया जाता है और चेतना को स्पष्ट किया जाता है।

अब अगला प्रश्न स्वाभाविक है:

  • ध्यान के बाद क्या घटित होता है?
  • Awareness केवल क्षणिक अनुभव है या एक यात्रा (journey)?
  • चेतना स्वयं को कैसे पहचानती है?

Traita-vāda के अनुसार awareness कोई static state नहीं है।
यह एक inner journey है — गहराती हुई, परतें खोलती हुई, और अंततः जीव को उसकी मूल सत्ता से जोड़ती हुई।


2. Consciousness और Awareness: एक सूक्ष्म भेद

आम तौर पर consciousness और awareness को समानार्थी समझ लिया जाता है।
Traita-vāda इनमें एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण अंतर बताता है।

  • Consciousness (चेतना) = मूल प्रकाश
  • Awareness (जागरूकता) = उस प्रकाश का अनुभवात्मक प्रकट होना

Consciousness always present रहती है,
लेकिन awareness fluctuate करती है।

उदाहरण:

  • गहरी नींद में चेतना रहती है
  • लेकिन जागरूकता अनुपस्थित होती है

इससे स्पष्ट होता है:

Awareness cultivated होती है, consciousness नहीं।


3. Inner Journey का प्रारंभ: From Noise to Noticing

Inner journey का पहला चरण है — noticing

मन सामान्य अवस्था में:

  • विचारों से भरा होता है
  • प्रतिक्रियाओं से संचालित होता है
  • अहंकार के noise से घिरा होता है

Traita-vāda कहता है:

जागरूकता तब शुरू होती है
जब व्यक्ति सोच को देखने लगता है,
न कि उसमें बहने लगता है।

यह कोई mystical घटना नहीं,
बल्कि psychological shift है।


4. The Witness Emerges (साक्षी भाव का उदय)

जब noticing स्थिर होता है,
तो धीरे-धीरे Witness (Sākṣī) प्रकट होता है।

Witness का अर्थ:

  • जो विचारों को देखता है
  • जो भावनाओं को देखता है
  • जो अनुभवों से अछूता रहता है

महत्वपूर्ण बिंदु:

Witness कोई नया entity नहीं है।
वही चेतना है, जो अब स्वयं को पहचान रही है।

यहीं Traita-vāda Advaita से जुड़ता है,
लेकिन एक भेद के साथ —
यह witness जीवन से कटता नहीं,
बल्कि जीवन को स्पष्ट करता है।


5. Layers of Awareness (जागरूकता की परतें)

Traita-vāda awareness को stages में समझता है:

1️⃣ Sensory Awareness

  • शरीर की अनुभूति
  • श्वास, स्पर्श, ध्वनि

2️⃣ Mental Awareness

  • विचारों का अवलोकन
  • memory, imagination

3️⃣ Emotional Awareness

  • भय, सुख, क्रोध
  • attachment का दर्शन

4️⃣ Ego Awareness

  • “मैं कौन हूँ?” की पहचान
  • role-based identity का दिखना

5️⃣ Pure Awareness

  • बिना विषय के जागरूकता
  • silent presence

यह क्रम linear नहीं,
लेकिन experiential है।


6. Awareness and Time

Traita-vāda में awareness और time का संबंध विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

  • मन हमेशा past या future में रहता है
  • awareness हमेशा present में होती है

जब awareness गहराती है:

  • समय का psychological दबाव कम होता है
  • urgency dissolve होती है
  • clarity बढ़ती है

इसलिए कहा गया:

Awareness is timeless presence in time.


7. Awareness ≠ Withdrawal

एक आम गलतफहमी:

जागरूक व्यक्ति निष्क्रिय हो जाता है

Traita-vāda इसका खंडन करता है।

Awareness से:

  • कर्म कम नहीं होते
  • बल्कि अधिक कुशल (skillful) हो जाते हैं

Awareness का अर्थ:

  • reaction कम
  • response अधिक
  • confusion कम
  • विवेक अधिक

यही कारण है कि Traita-vāda awareness को
जीवन-विमुख नहीं, जीवन-परिष्कृत मानता है।


8. Inner Journey and Identity Dissolution

Inner journey का एक निर्णायक चरण है —
identity dissolution

यहाँ व्यक्ति देखता है:

  • roles temporary हैं
  • नाम, पद, विचार सब बदलते हैं

यह डरावना लग सकता है,
क्योंकि ego security खोता है।

लेकिन Traita-vāda कहता है:

जो गिरता है, वह तुम नहीं हो।
जो बचता है, वही तुम हो।

यह insight liberation की दिशा में पहला वास्तविक कदम है।


9. Awareness, Compassion, and Ethics

जैसे-जैसे awareness गहराती है:

  • compassion spontaneous होती है
  • morality imposed नहीं रहती
  • ethical clarity natural बनती है

Traita-vāda ethics को command नहीं मानता,
बल्कि awareness का by-product मानता है।

जब दूसरे की पीड़ा स्पष्ट दिखने लगती है, तो हिंसा असंभव हो जाती है।


10. Awareness and Death Understanding

Traita-vāda में awareness का एक गहरा आयाम है —
मृत्यु का बोध

Awareness में व्यक्ति देखता है:

  • विचार आते-जाते हैं
  • भावनाएँ आती-जाती हैं
  • शरीर बदलता है

लेकिन awareness बनी रहती है।

इससे:

  • मृत्यु भय घटता है
  • attachment ढीले पड़ते हैं
  • जीवन गहरा होता है

Awareness मृत्यु की तैयारी नहीं,
मृत्यु-भय का अंत है।


11. The Inner Journey is Ongoing

Traita-vāda में कोई अंतिम “state” नहीं घोषित की जाती।

Awareness:

  • deepen होती रहती है
  • refine होती रहती है
  • integrate होती रहती है

यह journey:

  • साधक को साधारण नहीं बनाती
  • बल्कि अधिक मानवीय बनाती है

12. Contemporary Relevance

आज की दुनिया में:

  • anxiety
  • distraction
  • identity crisis

Awareness inner journey इन सबका उत्तर नहीं,
लेकिन दृष्टि प्रदान करती है

Traita-vāda awareness को:

  • mental health
  • leadership
  • education
  • science

सबसे जोड़ता है।


13. निष्कर्ष: Awareness as Living Consciousness

Traita-vāda के अनुसार:

  • Consciousness मूल है
  • Awareness उसका जाग्रत रूप

Inner journey कोई पलायन नहीं,
बल्कि घर लौटना है।

जहाँ मन शांत है
जहाँ शरीर उपस्थित है
जहाँ चेतना स्वयं को जानती है

वहीं Traita-vāda की जागरूकता है।


14. Next Chapter Bridge

अब अगला प्रश्न उठता है:

  • Awareness ethical जीवन में कैसे प्रकट होती है?
  • कर्म और नैतिकता का संबंध क्या है?
  • समाज में Traita-vāda कैसे कार्य करता है?

👉 इसका उत्तर मिलेगा
Chapter 8 – Ethical Dimensions of Traita-vāda में।


🔗 Internal Links (अंत में जोड़ें)

Previous Chapter:
Chapter 6 – Meditation as a Scientific Tool

Next Chapter:
Chapter 8 – Ethical Dimensions of Traita-vāda

Series TOC:
https://gyanvigyanbrhamgyan.blogspot.com/2026/01/traita-vadatoc.html



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