Traita-vada: Science aur Vedic Darshan ke beech ek pul
आज science और spirituality को अक्सर एक-दूसरे का विरोधी माना जाता है।
एक तरफ science है, जो brain, neurons और universe की बात करती है।
दूसरी तरफ Vedic दर्शन है, जो आत्मा, चेतना और मोक्ष की चर्चा करता है।
लेकिन क्या सच में दोनों अलग हैं?
या फिर समस्या हमारी समझ में है?
Science आमतौर पर reality को एक ही स्तर पर समझने की कोशिश करती है —
यानी जो मापा जा सके, वही सच।
लेकिन भारतीय दर्शन कहता है:
Reality एक नहीं, बहु-स्तरीय है।
इसी संदर्भ में आता है एक महत्वपूर्ण सिद्धांत —
Traita-vada के अनुसार अस्तित्व तीन मूल तत्वों से मिलकर बना है:
1️⃣ ईश्वर — सार्वभौमिक चेतना
2️⃣ जीव — व्यक्तिगत अनुभव करने वाला
3️⃣ प्रकृति — पदार्थ और ऊर्जा की दुनिया
यह न तो केवल भौतिकवाद है,
न ही केवल आध्यात्मिक कल्पना।
यह एक संतुलित ontological model है।
समस्या तब होती है जब:
Science चेतना को भी पदार्थ से समझाना चाहती है।
Traita-vada कहता है —
हर स्तर को उसके अपने स्तर पर समझो।
Traita-vada:
इस विषय पर हमने एक पूरा academic paper भी लिखा है,
जहाँ दर्शन और विज्ञान का गहन विश्लेषण है।
👉 पूरा शोध-लेख यहाँ पढ़ें:
(त्रैतवाद एक वैज्ञानि विवेचन)
Q. क्या Traita-vada द्वैतवाद है?
नहीं, यह उससे आगे का मॉडल है।
Q. क्या यह scientific है?
यह science के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके पूरक है।
👉 Consciousness kya sirf dimaag ki den hai? Science aur Veda ka sach
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