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दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

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Consciousness kya sirf dimaag ki den hai? Science aur Veda ka sach

 

Science aur Vedic darshan ke madhyam se consciousness ki vyakhya


क्या Consciousness सिर्फ दिमाग की देन है?

Science और Veda का एक गहरा सवाल**

हम सब कभी न कभी यह सवाल पूछते हैं —

मैं कौन हूँ?
क्या मैं सिर्फ यह शरीर हूँ?
क्या मेरी सोच, मेरी चेतना, सिर्फ दिमाग के कारण है?

आज की science कहती है कि दिमाग (brain) ही सब कुछ है।
लेकिन Vedic दर्शन इससे अलग बात करता है।

तो सवाल यह है —
सही कौन है? Science या Veda?

या फिर… दोनों कुछ अलग-अलग स्तरों पर सच कह रहे हैं?


🧠 Science Consciousness के बारे में क्या कहती है?

आधुनिक विज्ञान के अनुसार:

  • दिमाग में neurons होते हैं
  • neurons के बीच signals चलते हैं
  • इन्हीं signals से सोच, याददाश्त और भावना बनती है

यानि:

Consciousness = Brain activity

लेकिन यहाँ एक बड़ी समस्या है।

👉 Science आज तक यह नहीं बता पाई कि
“अनुभव” (experience) कहाँ से आता है?

  • दर्द महसूस होना
  • प्रेम का अनुभव
  • “मैं हूँ” की अनुभूति

ये सब signal नहीं, अनुभव हैं।

इसे ही scientists कहते हैं:

The Hard Problem of Consciousness


📜 Veda इस विषय में क्या कहते हैं?

Vedic दर्शन कहता है —

  • दिमाग एक यंत्र है
  • शरीर एक साधन है
  • लेकिन चेतना (Chaitanya) इनसे अलग है

उपनिषद कहते हैं:

“जिससे मन सोचता है, वही आत्मा है”

यानि:

  • दिमाग बदलता है
  • विचार बदलते हैं
  • लेकिन जो देख रहा है, वह नहीं बदलता

वही है — चेतना / आत्मा

Academic paper 


⚖️ Science बनाम Veda — असली फर्क कहाँ है?

यह समझना बहुत ज़रूरी है:

❌ Science गलत नहीं है
❌ Veda अवैज्ञानिक नहीं हैं

दोनों बस अलग स्तर पर काम करते हैं।

Science Veda
बाहर की दुनिया भीतर की दुनिया
पदार्थ चेतना
माप अनुभव
brain awareness

Science पूछती है:

“यह कैसे काम करता है?”

Veda पूछते हैं:

“यह अनुभव किसे हो रहा है?”


🧩 क्या कोई बीच का रास्ता है?

हाँ — और वही सबसे दिलचस्प है।

कुछ भारतीय दर्शन कहते हैं कि:

  • Reality सिर्फ एक नहीं
  • सिर्फ दो भी नहीं
  • बल्कि तीन स्तरों में काम करती है

इसे कहा जाता है:

Traita-vada (त्रैतवाद)

इसमें तीन मूल तत्व माने जाते हैं:

  1. ईश्वर / सार्वभौमिक चेतना
  2. जीव / व्यक्तिगत चेतना
  3. प्रकृति / पदार्थ

यही मॉडल:

  • विज्ञान को भी जगह देता है
  • और आध्यात्म को भी

🔍 क्या यह सिर्फ आस्था है?

नहीं।

इस विषय पर हमने एक गंभीर academic paper तैयार किया है,
जिसमें:

  • Vedic दर्शन
  • आधुनिक science
  • Consciousness studies

तीनों को तुलनात्मक रूप से समझाया गया है।

👉 पूरा गहन लेख यहाँ पढ़ें:
🔗 (त्रैतवाद एक वैसेज्ञानिक विवेचन )


❓ कुछ सामान्य सवाल (FAQ)

Q1. क्या Consciousness दिमाग से अलग हो सकती है?
👉 Veda हाँ कहते हैं, science अभी शोध में है।

Q2. क्या आत्मा को science prove कर सकती है?
👉 Science अनुभव को माप नहीं पाती, लेकिन उसे नकार भी नहीं सकती।

Q3. क्या Veda Big Bang को मानते हैं?
👉 Vedic ग्रंथ सृष्टि को चक्र (cycle) के रूप में देखते हैं, जो आधुनिक cosmology से मेल खाता है।


🌱 अंत में एक विचार

शायद सच यह नहीं है कि —

Science गलत है या Veda सही

बल्कि सच यह है कि —

हमने अभी Reality को पूरा समझा ही नहीं।

और यही खोज —
मनुष्य को मनुष्य बनाती है।



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