सूत्र: प्रमाणतर्कसाधनोपालम्भः सिद्धान्ताविरुद्धः पञ्चावयवोपपन्नः पक्षप्रतिपक्षपरिग्रहः वादः ।।
सरल व्याख्या: प्रमाण और तर्क के आधार पर, सिद्धान्त के विरुद्ध न जाकर पक्ष–प्रतिपक्ष की स्थापना करना वाद कहलाता है।
सूत्र: यथोक्तोपपन्नः छलजातिनिग्रहस्थानसाधनोपालम्भः जल्पः ।।
सरल व्याख्या: छल, जाति और निग्रहस्थान का सहारा लेकर किया गया विवाद जल्प कहलाता है।
सूत्र: सः प्रतिपक्षस्थापनाहीनः वितण्डा ।।
सरल व्याख्या: जिसमें स्वयं कोई पक्ष स्थापित न किया जाए, केवल दूसरे का खंडन हो, वह वितण्डा कहलाता है।
सूत्र: सव्यभिचारविरुद्धप्रकरणसमसाध्यसमकालातीताः हेत्वाभासाः ।।
सरल व्याख्या: जो कारण असत्य प्रतीत हो लेकिन वास्तव में दोषयुक्त हो, वह हेत्वाभास कहलाता है।
सूत्र: अनैकान्तिकः सव्यभिचारः ।।
सरल व्याख्या: जो हेतु निश्चित रूप से साध्य को सिद्ध न करे, वह सव्यभिचार दोष कहलाता है।
सूत्र: सिद्धान्तं अभ्युपेत्य तद्विरोधी विरुद्धः ।।
सरल व्याख्या: जो हेतु सिद्धान्त के विपरीत हो, वह विरुद्ध कहलाता है।
सूत्र: यस्मात्प्रकरणचिन्ता सः निर्णयार्थमपदिष्टः प्रकरणसमः ।।
सरल व्याख्या: जो हेतु मूल विषय से हटकर अन्य विषय में निर्णय चाहता है, वह प्रकरणसम है।
सूत्र: साध्याविशिष्टः साध्यत्वात्साध्यसमः ।।
सरल व्याख्या: जो हेतु स्वयं ही साध्य के समान हो, वह साध्यसम दोष है।
सूत्र: कालात्ययापदिष्टः कालातीतः ।।
सरल व्याख्या: जो हेतु समय की सीमा से बाहर दिया गया हो, वह कालातीत कहलाता है।
सूत्र: वचनविघातः अर्थविकल्पोपपत्त्या छलम् ।।
सरल व्याख्या: शब्दों के अर्थ को तोड़-मरोड़कर विरोध करना छल कहलाता है।
सूत्र: तत्त्रिविधं वाक्छलं सामान्यच्छलं उपचारच्छलं च इति ।।
सरल व्याख्या: छल तीन प्रकार का होता है: वाक्छल, सामान्यच्छल, उपचारच्छल।
सूत्र: अविशेषाभिहिते अर्थे वक्तुः अभिप्रायातर्थान्तरकल्पना वाक्छलम् ।।
सरल व्याख्या: वक्ता द्वारा किसी अर्थ का गलत या अंतरित अर्थ देना वाक्छल कहलाता है।
सूत्र: सम्भवतः अर्थस्य अतिसामान्ययोगातसम्भूतार्थकल्पना सामान्यच्छलम् ।।
सरल व्याख्या: अत्यधिक सामान्य उदाहरणों से अर्थ को गलत सिद्ध करना सामान्यच्छल है।
सूत्र: धर्मविकल्पनिर्देशे अर्थसद्भावप्रतिषेधः उपचारच्छलम् ।।
सरल व्याख्या: निर्देशित अर्थ के विरोध में कुछ उपाय करके किया गया छल उपचारच्छल कहलाता है।
सूत्र: वाक्छलं एव उपचारच्छलं ततविशेषात् ।।
सरल व्याख्या: उपचारछल वही वाक्छल है जो विशेष स्थिति में किया गया हो।
सूत्र: न ततर्थान्तरभावात् ।।
सरल व्याख्या: उपचारछल उस स्थिति में नहीं किया गया जो अर्थ को बदल देता।
सूत्र: अविशेषे वा किञ्चित्साधर्म्यातेकच्छलप्रसङ्गः ।।
सरल व्याख्या: यदि थोड़ी भी समानता का गलत प्रयोग हो, तो वह उपचारछल कहलाता है।
सूत्र: साधर्म्यवैधर्म्याभ्यां प्रत्यवस्थानं जातिः ।।
सरल व्याख्या: समानता या भिन्नता दिखाकर आपत्ति करना जाति कहलाता है।
सूत्र: विप्रतिपत्तिः अप्रतिपत्तिः च निग्रहस्थानम् ।।
सरल व्याख्या: असंगति या उत्तर न दे पाना निग्रहस्थान कहलाता है।
सूत्र: तद्विकल्पात्जातिनिग्रहस्थानबहुत्वम् ।।
सरल व्याख्या: विकल्पों की संख्या के कारण निग्रहस्थान का बहुता होना।
0 टिप्पणियाँ