Vigyan Stakam bhrtrihari sloka16 to 30 hindi english Expectations

🌸 श्लोक १६: श्रीरङ्ग की शरण

न चेत्ते सामर्थ्यं भवनमरणातङ्कहरणे
        मनोऽनिर्दिष्टेऽस्मिन्नवगतगुणे ज्ञातुमकले ।
तदा मेघश्यामं कमलदलदीर्घाक्षममलं
        भजस्व श्रीरङ्गं शरदमृतधामाधिकमुखम् ॥ १६॥
🔸 शब्दार्थ:

भवन-मरण-आतङ्क: जन्म और मृत्यु का भय | अकले: अखंड/अविनाशी | मेघश्यामं: बादलों के समान श्याम वर्ण | कमलदलदीर्घाक्ष: कमल की पंखुड़ियों जैसे विशाल नेत्र | भजस्व: भजन करो।

🔸 हिंदी भावार्थ:

हे मन! यदि तुझमें जन्म-मृत्यु के इस भयानक चक्र को रोकने की शक्ति नहीं है और तू उस निर्गुण-निराकार ब्रह्म को जानने में असमर्थ है, तो तू उन मेघ के समान श्याम वर्ण, कमल नयनों वाले और शरद पूर्णिमा के चंद्रमा जैसी कांति वाले भगवान श्रीरङ्ग (विष्णु) की शरण ले और उनका भजन कर।

🔸 English Meaning:

If you lack the power to stop the cycle of birth and death, and find it difficult to comprehend the formless Brahman, then surrender yourself to Lord Shriranga, who is cloud-complexioned with lotus-like eyes and a face more radiant than the autumn moon.

🌸 श्लोक १७: विद्याराम मुनि का बोध

क्वयातः क्वायातो द्विज कलयसे रत्नमटवी-
        मटन्व्याघ्राघ्रातो मरणमगमद्विश्वमहितः ।
अयं विद्यारामो मुनिरहह केनापि विदुषा
        न खल्वात्मप्रायो भवतु सुकरो ज्ञातुमशिवः ॥ १७॥
🔸 शब्दार्थ:

द्विज: हे ब्राह्मण! | अटवी-मटन्: वन में भटकते हुए | व्याघ्राघ्रातो: बाघ द्वारा सूंघा गया (आक्रांत) | विश्वमहितः: संसार में पूजनीय | अशिवः: अमंगलकारी मृत्यु।

🔸 हिंदी भावार्थ:

संसार में पूजनीय विद्याराम मुनि भी वन में रत्न खोजते हुए व्याघ्र का शिकार हो गए और मृत्यु को प्राप्त हुए। मृत्यु किसी को नहीं छोड़ती; वह विद्वानों के लिए भी उतनी ही अनपेक्षित और कठिन है। यह सत्य है कि आत्मा के वास्तविक स्वरूप को जाने बिना इस संसार के अमंगलकारी जाल को समझना सुगम नहीं है।

🔸 English Meaning:

Even the revered sage Vidyarama met his end while wandering in the forest. Death is unpredictable and strikes everyone. Without self-realization, it is impossible for even the wise to escape the inauspicious traps of this worldly existence.

🌸 श्लोक १८: भिक्षाटन और संतोष

अहं श्रान्तोऽध्वानं बहुविषमतिक्रम्य विषमं
        धनाकाङ्क्षाक्षिप्तः कुनृपतिमुखालोकनपरः ।
इदानीं केनापि स्थितिमुदरकूपस्य भरणे
        कदन्नेनारण्ये क्वचिदपि समीहे स्थिरमतिः ॥ १८॥
🔸 शब्दार्थ:

श्रान्तो: थका हुआ | धनाकाङ्क्षाक्षिप्तः: धन की इच्छा से व्याकुल | कुनृपति: दुष्ट राजा | उदरकूप: पेट रूपी कुआँ | कदन्नेन: रूखा-सूखा भोजन।

🔸 हिंदी भावार्थ:

धन की लालसा में मैंने बहुत से कठिन मार्ग तय किए और दुष्ट राजाओं की चापलूसी की, जिससे मैं अब थक चुका हूँ। अब मैं स्थिर बुद्धि होकर केवल इतना चाहता हूँ कि इस पेट रूपी कुएँ को भरने के लिए वन में जो भी रूखा-सूखा भोजन मिल जाए, उसी में संतोष करूँ।

🔸 English Meaning:

Exhausted by the pursuit of wealth and the flattery of wicked kings, I now seek peace. I am content to fill the void of my stomach with whatever simple food I find in the forest, living with a steady and detached mind.

🌸 श्लोक १९: हरि भक्ति का प्रभाव

यमाराध्याराध्यं त्रिभुवनगुरोराप्तवसतिः
        ध्रुवो ज्योतिश्चक्रे सुचिरमनवद्यं शिशुरपि ।
अवाप प्रह्लादः परमपदमाराध्य यमितः
        स कस्यालं क्लेशो हरति न हरिः कीर्तितगुअणः ॥ १९॥
🔸 शब्दार्थ:

ज्योतिश्चक्रे: नक्षत्र मंडल (ध्रुव तारा) | शिशुरपि: बालक होते हुए भी | परमपदम्: मोक्ष/ईश्वर का धाम | क्लेशो हरति: दुखों को दूर करना।

🔸 हिंदी भावार्थ:

जिन भगवान की आराधना करके बालक ध्रुव ने नक्षत्र मंडल में अटल स्थान प्राप्त किया और प्रह्लाद ने परम पद पाया, वे भगवान हरि किसके दुखों का नाश नहीं करते? उनके गुणों का कीर्तन करने मात्र से ही मनुष्य के समस्त क्लेश दूर हो जाते हैं।

🔸 English Meaning:

Lord Hari, by whose grace the child Dhruva attained an eternal place in the stars and Prahlada reached the supreme abode, is the remover of all sorrows. Who is there whose miseries are not ended by praising His divine glories?

🌸 श्लोक २०: प्रारब्ध और धन

कदाचित्कष्टेन द्रविणमधमाराधनवशा-
        न्मया लब्धं स्तोकं निहितमवनौ तस्करभयात् ।
ततो नित्ये कश्चित्क्वचिदपि तदाखुर्बिलगृहेऽ-
        नयल्लब्धोऽप्यर्थो न भवति यदा कर्म विषमम् ॥ २०॥
🔸 शब्दार्थ:

द्रविणम्: धन | स्तोकं: थोड़ा सा | अवनौ: भूमि में | तस्करभयात्: चोरों के डर से | आखु: चूहा | कर्म विषमम्: विपरीत भाग्य।

🔸 हिंदी भावार्थ:

बड़ी कठिनाई और नीच लोगों की सेवा करके मैंने थोड़ा सा धन कमाया और उसे चोरों के डर से जमीन में गाड़ दिया। किंतु मेरा भाग्य इतना विपरीत था कि एक चूहा उस धन को अपने बिल में खींच ले गया। सत्य है कि यदि कर्म (प्रारब्ध) पक्ष में न हो, तो प्राप्त धन भी पास नहीं टिकता।

🔸 English Meaning:

With great effort and by serving the unworthy, I earned a little wealth and buried it for safety. Yet, a rat dragged it away into its hole. Indeed, when one's fate is unfavorable, even earned wealth does not remain in one's possession.

🌸 श्लोक २१: गंगा तट की अभिलाषा

जगाम व्यर्थं मे बहुदिनमथार्थार्थिततया
        कुभूमीपालानां निकटगतिदोषाकुलमतेः ।
हरिध्यानव्यग्रं भवितुमधुना वाञ्छति मनः
        क्वचिद्गङ्गातीरे तरुणतुलसीसौरभभरे ॥ २१॥
🔸 शब्दार्थ:

अर्थार्थिततया: धन की याचना के कारण | कुभूमीपालानां: दुष्ट राजाओं के | निकटगति: पास जाने से | तरुणतुलसी: नवीन तुलसी के पौधों | सौरभभरे: सुगंध से भरे हुए।

🔸 हिंदी भावार्थ:

धन की इच्छा में दुष्ट राजाओं की सेवा करते हुए मेरे जीवन के बहुत से दिन व्यर्थ ही बीत गए, जिससे मेरी बुद्धि भी कलुषित हो गई। अब मेरा मन चाहता है कि मैं गंगा के उस तट पर जाऊँ जहाँ तुलसी की भीनी-भीनी सुगंध फैली हो और वहाँ एकाग्र होकर भगवान हरि का ध्यान करूँ।

🔸 English Meaning:

Many days of my life were wasted in seeking wealth by serving wicked kings, which only clouded my mind. Now, my soul longs to be on the banks of the Ganges, filled with the fragrance of fresh Tulsi, and immerse itself in the meditation of Lord Hari.

🌸 श्लोक २२: गंगा तट पर एकांत ध्यान

कदा भागीरथ्या भवजलधिसन्तारतरणेः
        स्खलद्वीचीमालाचपलतलविस्तारितमुदः ।
तमस्स्थाने कुञ्जे क्वचिदपि निविश्याहृतमना
        भविष्याम्येकाकी नरकमथने ध्यानरसिकः ॥ २२॥
🔸 शब्दार्थ:

भागीरथ्या: गंगा के तट पर | भवजलधि: संसार रूपी समुद्र | सन्तारतरणेः: पार उतारने वाली नौका | वीचीमाला: लहरों की पंक्तियाँ | नरकमथने: नरक का नाश करने वाले (कृष्ण)।

🔸 हिंदी भावार्थ:

वह समय कब आएगा जब मैं भवसागर से पार उतारने वाली गंगा माँ के तट पर, जहाँ लहरें निरंतर आनंद बिखेरती हैं, किसी शांत निकुंज (कुटिया) में अकेला बैठूँगा और नरक का नाश करने वाले भगवान कृष्ण के ध्यान में पूरी तरह लीन हो जाऊँगा?

🔸 English Meaning:

When will that day come when I sit alone in a quiet grove by the Ganges—the boat that carries one across the ocean of existence—and become completely absorbed in the meditation of Lord Krishna, the destroyer of hell?

🌸 श्लोक २३: गोविंद नाम का अमृत

कदा गोविन्देति प्रतिदिवसमुल्लासमिलिताः
        सुधाधाराप्रायास्त्रिदशतटिनीवीचिमुखरे ।
भविष्यन्त्येकान्ते क्वचिदपि निकुञ्जे मम गिरो
        मरालीचक्राणां स्थितिसुखरवाक्रान्तपुलिने ॥ २३॥
🔸 शब्दार्थ:

सुधाधारा: अमृत की धारा | त्रिदशतटिनी: गंगा (देवों की नदी) | वीचिमुखरे: लहरों के शब्द से गूँजती हुई | मरालीचक्राणां: हंसों के झुंड का मधुर स्वर।

🔸 हिंदी भावार्थ:

कब वह शुभ दिन आएगा जब मैं गंगा के उस तट पर, जहाँ हंसों का मधुर स्वर गूँजता है, किसी एकांत कुंज में बैठकर प्रतिदिन हर्षोल्लास के साथ 'गोविंद-गोविंद' पुकारूँगा? मेरी वाणी से निकलने वाले वे शब्द अमृत की धारा के समान शीतल और पवित्र होंगे।

🔸 English Meaning:

When will I find myself in a secluded grove by the Ganges, chanting 'Govinda' every day with joy? In that serene place where swans sing, my words will flow like a stream of nectar, praising the Divine.

🌸 श्लोक २४: माया और अधिष्ठान

यदध्यस्तं सर्वं स्रजि भुजगवद्भाति पुरतो
        महामायोद्गीर्णं गगनपवनाद्यं तनुभृताम् ।
भवेत्तस्या भ्रान्तेर्मुररिपुरधिष्ठानमुदये
        यतो नस्याद्भ्रान्तिर्निरधिकरणा क्वापि जगति ॥ २४॥
🔸 शब्दार्थ:

स्रजि: माला/रस्सी में | भुजगवद्: सर्प की तरह | तनुभृताम्: शरीरधारियों (मनुष्यों) को | मुररिपुर: भगवान विष्णु (मुर राक्षस के शत्रु) | अधिष्ठान: आधार।

🔸 हिंदी भावार्थ:

जैसे माला में सांप का भ्रम होता है, वैसे ही यह आकाश, वायु आदि पंचभूतों से बना संसार महामाया का एक भ्रम मात्र है। जब हृदय में भगवान विष्णु (मुरारि) का उदय होता है, तब यह भ्रम नष्ट हो जाता है, क्योंकि बिना आधार (ईश्वर) के कोई भी भ्रम टिक नहीं सकता।

🔸 English Meaning:

Just as a garland is mistaken for a snake, the entire universe made of elements is an illusion created by Maya. When Lord Vishnu arises as the foundation of knowledge within, this delusion vanishes, for no illusion can exist without a base.

🌸 श्लोक २५: चैतन्य का ध्यान

चिदेव ध्यातव्या सततमनवद्या सुखतनु-
        र्निराधारा नित्या निरवधिरविद्यादिरहिता ।
अनास्थामास्थाय भ्रमवपुषि सर्वत्र विषये
        सदा शेषव्याख्यानिपुणमतिभिः ख्यातयतिभिः ॥ २५॥
🔸 शब्दार्थ:

चिदेव: चैतन्य (Consciousness) ही | अनवद्या: दोषरहित | सुखतनु: आनंद स्वरूप | निरवधिर: असीम | अविद्यादिरहिता: अज्ञान से मुक्त।

🔸 हिंदी भावार्थ:

विद्वान संन्यासियों और ऋषियों का मत है कि इस नाशवान संसार और इसके विषयों से मोह त्यागकर सदैव उस शुद्ध 'चेतना' (चित्) का ध्यान करना चाहिए। वह चैतन्य तत्व दोषरहित, आनंदमय, निराधार, नित्य, असीम और अज्ञान से पूरी तरह परे है।

🔸 English Meaning:

Renouncing interest in transient worldly objects, one should constantly meditate on Pure Consciousness. This Divine Essence is flawless, blissful, eternal, infinite, and beyond all ignorance, as realized by the great sages.

🌸 श्लोक २६: मन की विचित्रता

अहोऽत्यर्थेऽप्यर्थे श्रुतिशतगुरुभ्यामवगते
        निषिद्धत्वेनापि प्रतिदिवसमाधावति मनः ।
पिशाचस्तत्रैव स्थिररतिरसारेऽपि चपलं
        न जाने केनास्य प्रतिकृतिरनार्यस्य भविता ॥ २६॥
🔸 शब्दार्थ:

श्रुतिशत: सैकड़ों वेदों के वचन | निषिद्धत्वेनापि: मना किए जाने पर भी | पिशाच: प्रेत/पिशाच की तरह | स्थिररति: दृढ़ आसक्ति | प्रतिकृति: उपचार/समाधान।

🔸 हिंदी भावार्थ:

बड़ा आश्चर्य है! गुरुओं और वेदों द्वारा बार-बार यह बताए जाने पर भी कि ये सांसारिक विषय निषिद्ध और नाशवान हैं, यह मन उन्हीं की ओर दौड़ता है। यह चंचल मन किसी पिशाच की तरह इन असार विषयों में ही सुख ढूँढता है। पता नहीं इस दुष्ट मन का सुधार कैसे होगा?

🔸 English Meaning:

It is astonishing that despite being warned by scriptures and masters about the transient nature of worldly pleasures, the mind still chases them. Like a ghost obsessed with the unreal, this restless mind finds joy in the worthless. One wonders how such a stubborn mind can ever be tamed.

🌸 श्लोक २७: सुकृती (पुण्यवान) के लक्षण

नित्यानित्यपदार्थतत्त्वविषये नित्यं विचारः सतां
        संसर्गे मितभाषिता हितमिताहारोऽनहङ्कारिता ।
कारुण्यं कृपणे जने सुखिजने प्रीतिः सदा यस्य स
        प्रायेणैव तपः करोति सुकृती चेतोमुकुन्दप्रियः ॥ २७॥
🔸 शब्दार्थ:

नित्यानित्य: शाश्वत और नाशवान | मितभाषिता: कम बोलना | मित-आहार: संयमित भोजन | कृपणे: दीन-दुखी | मुकुन्दप्रियः: भगवान विष्णु का प्रिय।

🔸 हिंदी भावार्थ:

जो व्यक्ति नित्य और अनित्य के बीच का अंतर समझता है, सत्संग करता है, कम बोलता है, संयमित भोजन करता है और अहंकार रहित है; जो दीन-दुखियों पर दया और सुखी लोगों से प्रेम करता है—वही वास्तव में तपस्वी और पुण्यवान है। ऐसा व्यक्ति भगवान मुकुन्द को अत्यंत प्रिय होता है।

🔸 English Meaning:

One who reflects on the eternal vs. the transient, keeps good company, speaks little, eats moderately, and remains humble is a true ascetic. With compassion for the poor and joy for the happy, such a virtuous soul becomes beloved to Lord Mukunda.

🌸 श्लोक २८: सब कहाँ गए? (नश्वरता)

सा गोष्ठी सुहृदां निवारितसुधास्वादाधुना क्वागम-
        त्तेधीरा धरणीधरोपकरणीभूता ययुः क्वापरे ।
ते भूपा भवभीरवो भवरताः क्वागुर्निरस्तारयो
        हा कष्टं क्व च गम्यते नहि सुखं क्वाप्यस्ति लोकत्रये ॥ २८॥
🔸 शब्दार्थ:

सुहृदां: मित्रों की | धरणीधरोप: राजाओं के सहायक | भूपा: राजा | लोकत्रये: तीनों लोकों में | हा कष्टं: बड़े दुख की बात है।

🔸 हिंदी भावार्थ:

वे मित्रों की गोष्ठियाँ कहाँ गईं? वे धैर्यवान पुरुष और महान राजा कहाँ चले गए? जो कभी इस पृथ्वी पर शासन करते थे, वे सब काल के गाल में समा गए। बड़े दुख की बात है कि इस संसार में कहीं भी स्थायी सुख नहीं है, सब कुछ समय के साथ नष्ट हो जाता है।

🔸 English Meaning:

Where are those gatherings of friends now? Where have the great kings and wise men gone? They all vanished into the flow of time. Alas! There is no permanent happiness to be found in the three worlds, as everything eventually fades away.

🌸 श्लोक २९: ग्रहों की भी विवशता

भानुर्भूवलयप्रदक्षिणगतिः क्रीडारतिः सर्वदा
        चन्द्रोप्येषकलानिधिः कवलितः स्वर्भानुना दुःखितः ।
ऱ्हासं गच्छति वर्धते च सततं गीर्वाणविश्रामभू-
        तत्स्थानं खलु यत्र नास्त्यपहतिः क्लेशस्य संसारिणाम् ॥ २९॥
🔸 शब्दार्थ:

भानु: सूर्य | स्वर्भानुना: राहु द्वारा (ग्रहण) | ऱ्हासं: घटना (Waning) | गीर्वाणविश्रामभू: स्वर्ग/देवलोक | अपहति: निवारण।

🔸 हिंदी भावार्थ:

सूर्य निरंतर पृथ्वी की परिक्रमा में लगा है, चंद्रमा को राहु निगल लेता है (ग्रहण) और वह घटता-बढ़ता रहता है। जब स्वर्ग के इन देवताओं और ग्रहों को भी शांति नहीं है, तो फिर इस संसार में रहने वाले साधारण मनुष्यों के क्लेशों का अंत कैसे हो सकता है?

🔸 English Meaning:

The Sun revolves endlessly around the Earth, and even the Moon is eclipsed by Rahu and constantly waxes and wanes. When even the celestial bodies are not free from cycles and afflictions, how can ordinary mortals find total freedom from suffering?

🌸 श्लोक ३०: परोपकार का फल

संसारेऽपि परोपकारकरणख्यातव्रता मानवा
        ये सम्पत्तिगृहा विचारचतुरा विश्वेश्वराराधकाः ।
तेऽप्येनं भवसागरं जनिमृतिग्राहाकुलं दुस्तरं
        गम्भीरं सुतरां तरन्ति विविधव्याध्याधिवीचीमयम् ॥ ३०॥
🔸 शब्दार्थ:

परोपकार: दूसरों की भलाई | जनिमृतिग्राह: जन्म-मृत्यु रूपी मगरमच्छ | दुस्तरं: जिसे पार करना कठिन हो | व्याध्याधिवीची: मानसिक और शारीरिक रोगों की लहरें।

🔸 हिंदी भावार्थ:

जो मनुष्य परोपकार करने का व्रत लेते हैं, बुद्धिमान हैं और भगवान विश्वेश्वर (शिव) के अनन्य भक्त हैं, केवल वे ही इस भयंकर भवसागर को पार कर पाते हैं। यह संसार रोगों की लहरों और जन्म-मृत्यु रूपी मगरमच्छों से भरा हुआ है, जिसे भक्ति और सेवा के बिना पार करना असंभव है।

🔸 English Meaning:

Only those who are dedicated to helping others, possess wisdom, and worship the Lord of the Universe can cross this treacherous ocean of existence. Filled with the waves of disease and the crocodiles of birth and death, this world is only surmountable through service and devotion.

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