भर्तृहरि शृङ्गार शतक: श्लोक 61 से 66 व्याख्या | सौंदर्य और विवेक का द्वंद्व

वैराग्य और शृङ्गार, नीति श्लोक हिंदी अर्थ, संस्कृत श्लोक व्याख्या, भर्तृहरि के विचार। Sanskrit Shlokas - Bhartrihari Shatakam
श्लोक ६१: अधरमधु पान (The Nectar of Lips)
उरसि निपतितानां स्रस्तधम्मिल्लकानां
मुकुलितनयनानां किञ्चिदुन्मीलितानाम् ॥
उपरिसुरतखेदस्विन्नगण्डस्थलीनां
अधरमधु वधूनां भाग्यवन्तः पिबन्ति ॥ ६१॥
हिंदी अनुवाद

जिनके बाल बिखर गए हैं, जो हृदय पर स्थित हैं, जिनके नेत्र आधे बंद हैं और जो विपरीत रति के परिश्रम से पसीने से भीगी हुई हैं—ऐसी स्त्रियों के अधर-अमृत का पान भाग्यशाली ही करते हैं।

English Explanation

Only the fortunate ones enjoy the nectar of the lips of women who lie exhausted, with disheveled hair and perspiration on their cheeks after the act of love.

श्लोक ६२: प्रेम का वेग (The Force of Love)
उन्मत्तप्रेमसंरम्भादारभन्ते यदङ्गनाः ॥
तत्र प्रत्यूहमाधातुं ब्रह्माऽपि खलु कातरः ॥ ६२॥
हिंदी अनुवाद

अत्यधिक प्रेम के आवेग में स्त्रियां जो कार्य आरम्भ करती हैं, उसमें बाधा डालने में स्वयं ब्रह्मा भी असमर्थ या भयभीत रहते हैं।

English Explanation

Even Lord Brahma is hesitant or unable to create an obstacle in the actions initiated by women in a state of frenzied or intense love.

श्लोक ६३: कामनिर्वहण (The Fulfillment of Desire)
आमीलितनयनानां यत्सुरतरसोऽनु संविदं भाति ।
मिथुनैर्मिथोऽवधारितमवितथमिदमेव कामनिर्वहणम् ॥ ६३॥
हिंदी अनुवाद

नेत्रों के बंद होने पर जो सुख का अनुभव होता है, प्रेमियों द्वारा परस्पर अनुभव किया गया वह सुख ही काम-क्रीड़ा की वास्तविक पूर्णता है।

English Explanation

The shared consciousness of bliss that shines when eyes are half-closed in union is considered by couples to be the true fulfillment of love.

श्लोक ६४: धन्य पुरुष (The Blessed One)
मत्तेभकुम्भपरिणाहिनि कुङ्कुमार्द्रे कान्तापयोधरतटे रसखेदखिन्नः ॥
वक्षो निधाय भुजपञ्जरमध्यवर्ती धन्यः क्षपां क्षपयति क्षणलब्धनिद्रः ॥ ६४॥
हिंदी अनुवाद

वह पुरुष धन्य है जो रति-क्रीड़ा से थककर अपनी प्रिया के कुंकुम लगे स्तनों पर सिर रखकर, उसकी भुजाओं के घेरे में रात बिताता है।

English Explanation

Blessed is the man who, exhausted by the pleasures of love, spends the night resting his chest on the saffron-scented bosom of his beloved, held within the cage of her arms.

श्लोक ६५: एकचित्तता (Unity of Mind)
एतत्कामफलं लोके यद्द्वयोरेकचित्तता ।
अन्यचित्तकृते कामे शवयोरेव सङ्गमः ॥ ६५॥
हिंदी अनुवाद

संसार में काम का वास्तविक फल दो हृदयों का एक हो जाना है। यदि मन अलग-अलग हों, तो वह मिलन दो शवों के मिलन के समान है।

English Explanation

The true fruit of love in this world is the oneness of two minds. If minds are wandering elsewhere, union is merely the coming together of two corpses.

श्लोक ६५-अ: श्रेष्ठ चुनाव (The Best Choices)
एको देवः केशवो वा शिवो वा ह्येकं मित्रं भूपतिर्वा यतिर्वा ।
एको वासः पत्तने वा वने वा ह्येका भार्या सुंदरी वा दरी वा ॥ ६५-अ॥
हिंदी अनुवाद

देव एक हो (विष्णु या शिव), मित्र एक हो (राजा या सन्यासी), निवास एक हो (नगर या वन) और पत्नी भी एक हो (सुंदरी स्त्री या पर्वत की गुफा—वैराग्य के संदर्भ में)।

English Explanation

One should choose one of two extremes: one God (Vishnu or Shiva), one friend (King or Saint), one home (City or Forest), and one companion (a beautiful wife or a mountain cave).

श्लोक ६६: दुविधा (The Dilemma)
मात्सर्यमुत्सार्य विचार्य कार्यमार्याः समर्यादमिदं वदन्तु ॥
सेव्या नितम्बाः किमु भूधरणामुत स्मरस्मेरविलासिनीनाम् ॥ ६६॥
हिंदी अनुवाद

हे विद्वानों! ईर्ष्या छोड़कर विचारपूर्वक बताएं कि सेवा के योग्य क्या है—पर्वतों की ढलान (तपस्या के लिए) या सुंदरियों के नितंब?

English Explanation

Discarding envy, let the wise decide: which is more worthy of devotion—the slopes of mountains (for penance) or the hips of beautiful, playful women?

Shringar Shatakam Part 10

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