विवेकचूडामणि: जगत की ब्रह्मरूपता
श्लोक २२६ - २३०
न ह्यन्यदस्ति किञ्चित् सम्यक् परमार्थतत्त्वबोधदशायाम् ॥ २२६॥
हिन्दी: यह जो 'सत्' (ब्रह्म) है, यही परम अद्वैत है क्योंकि इससे अलग किसी दूसरी वस्तु का अस्तित्व ही नहीं है। परमार्थ तत्व के यथार्थ ज्ञान की अवस्था में ब्रह्म के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं रहता।
English: This Absolute Existence is the Supreme Non-duality, for there is nothing else besides It. In the state of realization of the Highest Truth, nothing else exists but Brahman.
तत्सर्वं ब्रह्मैव प्रत्यस्ताशेषभावनादोषम् ॥ २२७॥
हिन्दी: यह सारा विश्व जो अज्ञान के कारण अनेक रूपों में प्रतीत होता है, वह सब वास्तव में ब्रह्म ही है। समस्त कल्पनाओं और दोषों से मुक्त होने पर केवल ब्रह्म ही शेष रहता है।
English: This entire universe, which through ignorance appears as a variety of forms, is nothing but Brahman, free from all mental limitations and defects.
न कुम्भरूपं पृथगस्ति कुम्भः कुतो मृषा कल्पितनाममात्रः ॥ २२८॥
केनापि मृद्भिन्नतया स्वरूपं घटस्य सन्दर्शयितुं न शक्यते ।
अतो घटः कल्पित एव मोहान्मृदेव सत्यं परमार्थभूतम् ॥ २२९॥
हिन्दी: मिट्टी का कार्य होने के कारण घड़ा मिट्टी से भिन्न नहीं है, क्योंकि वह हर जगह मिट्टी के रूप में ही है। घड़े का अपना कोई अलग अस्तित्व नहीं है, वह तो केवल एक कल्पित नाम मात्र है। कोई भी व्यक्ति घड़े को मिट्टी से अलग करके नहीं दिखा सकता, इसलिए घड़ा केवल मोहवश कल्पित है, वास्तव में मिट्टी ही सत्य है।
English: A jar, though an effect of clay, is not different from clay, for its essence is always clay. The "jar" has no independent existence; it is just a falsely imagined name. No one can show the jar apart from the clay. Thus, the jar is imagined through delusion; the clay alone is the enduring reality.
अस्तीति यो वक्ति न तस्य मोहो विनिर्गतो निद्रितवत्प्रजल्पः ॥ २३०॥
हिन्दी: इसी प्रकार ब्रह्म का कार्य यह सारा जगत भी ब्रह्म ही है, उससे अलग कुछ भी नहीं। जो कोई यह कहता है कि जगत ब्रह्म से अलग 'है', उसका मोह अभी गया नहीं है और उसकी बातें नींद में बड़बड़ाने वाले व्यक्ति के समान हैं।
English: Similarly, the entire universe, being the effect of Brahman, is Brahman itself and nothing else. He who says it exists independently is still under delusion, and his words are like the ravings of a person talking in his sleep.