Editors Choice

जीवन का उद्देश्य

दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

कुल पेज दृश्य

About Us

About Us
Gyan Vigyan Brhamgyan (GVB the university of veda)

यह ब्लॉग खोजें

Contribute

Contribute
We are working for give knowledge, science, spiritulity, to everyone.

Ad Code

बिद्दो ब्राह्मण, भारत का एक मशहूर पंजाबी पहलवान।

बिद्दो ब्राह्मण,  भारत का एक मशहूर पंजाबी पहलवान। 
बिद्दो ब्राह्मण का जन्म 1872 को पंजाब के शहर गुजरांवाला में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ ।  इन्होंने 8 साल की उम्र में अखाड़ा लगाना शुरू कर दिया था । इनके उस्ताद का नाम गंडेशा  मिश्र था । 

जवानी में कदम रखते ही बिद्दो एक बड़े नामी पहलवान बन गए । इनका कद 5 फ़ीट 9 इंच था जो  आम पहलवानों से काफी लम्बा था । इन्होंने जालो माशकी,  चनन  कसाई, प्रतापा , करीम बख्श और खलीफा घोड़ा जैसे बड़े पहलवानों को हराया। इनकी बड़ी कामयाबी तब के सबसे बड़े पहलवान रहमानी को हराना था जिनको इन्होंने उठा कर अखाड़े से बाहर पटक दिया था ।        
                 
पर इनका सबसे बड़ा कारनामा था लाहौर में गमु बलीवाला पहलवान को हराना। गमु पहलवान जब अखाड़े में हाथी पर बैठ कर पहुंचा तो उस पहलवान ने कहा की वो चावल की खेती करने वाले इस किसान ब्राह्मण को 2 मिनट में मसल देगा। पर कुश्ती जब शुरू हुई तो 3 मिनट चली और ब्राह्मण पहलवान ने गमु को पटक दिया। गुस्से से भरा ब्राह्मण गमु के सीने पर पैर रख कर खड़ा हो गया और हटने से मना कर दिया और गमु को माफ़ी मांगने को कहा। जब रेफरी ब्राह्मण को हटाने में नाकामयाब रहे तो पुलिस बुलानी पड़ी । उसके बाद गमु पहलवान ने ब्राह्मण को फिर से चुनोती दी दो बार। दूसरी बार 6 मिनट में ब्राह्मण ने उसे हरा दिया। और तीसरी बार 8 मिनट चली लड़ाई में ब्राह्मण पहलवान ने उसकी कूल्हे की हड्डी तोड़ दी।             
           
ब्राह्मण पहलवान को इसके बाद सितारा - ऐ - हिन्द का खिताब दिया गया । उनके साफ़ सुथरे स्वभाव, शुद्ध  शाकाहार और ईश्वर में आस्था के लिए उन्हें लोग देवता जी कह कर बुलाते थे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ