Editors Choice

जीवन का उद्देश्य

दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

कुल पेज दृश्य

About Us

About Us
Gyan Vigyan Brhamgyan (GVB the university of veda)

यह ब्लॉग खोजें

Contribute

Contribute
We are working for give knowledge, science, spiritulity, to everyone.

Ad Code

राजा बाबू

 *राजा बाबू - 



नवंबर का 24वा दिन चल रहा है। इस महीने राजा बाबू ने लगभग 20 बार सुबह पाँच बजे उठकर पढ़ने की रणनीति बनाई और बीस की बीस बार राजा बाबू फैल हो गए। कभी वो अलार्म नहीं सुन पाते, कभी मन नहीं रहता और कभी अच्छा दिन नहीं रहता, कभी कुछ। इसलिए, राजा बाबू सुबह अब आराम से उठते हैं। सबसे पहले टेलीग्राम पर 'आन्सर की' की प्रतीक्षा में तड़प रहे लोगों के उटपटाँग मैसेज पढ़ते हैं और फिर अपने लौटेभर ज्ञान से एक दो बूंद दूसरों पर छिड़क देते हैं। ज्ञान देना राजा बाबू का दूसरा धर्म है। पहला धर्म तो उनका - बाबगिरी है। 


जी हाँ! लेटे-लेटे मोबाईल चलाते हुए, 4000 रील्स देखते-देखते दस बज जाते हैं। नाश्ता-पानी करते-करते बारह बज जाते हैं। बारह बजे जब पढ़ने बैठते हैं तो तीन पन्ने पलटने के बाद राजा बाबू का चाय पीने का मन करता है। फिर राजा बाबू वहाँ भी प्रवचन देते हैं। जीआमिट्री, ऐल्जब्रा, रैशीओ, कोडिंग-डिकोंडींग के ऊपर खूब चर्चा करते हैं। जब इनसे कोई पुराने CGL का अंक पूछ ले तो घरवालों के फोन का नाटक कर वापस लौट आते हैं। घर लौटते हैं तो वापस पढ़ने बैठते हैं। टेबल के सामने चिपकाए हुए फॉर्मूले चार्ट पर "आई लव यू ****" लिखा देख फिर इनका ध्यान भटक जाता है। और फिर मोबाईल पर उनकी तस्वीर देखते रहते हैं। ऐसे उनकी याद में खोए-खोए शाम कब हो जाती है पता ही नहीं चलता। 


राजा बाबू बड़े सिद्धांत वादी है। वो अपने सिद्धांतों का हमेशा पालन करते हैं। ऐसे ही उनका एक सिद्धांत है कि जब तक रिजल्ट ना आजाये तब तक मैंस की तैयारी शुरू नहीं करनी चाहिए। राजा बाबू का दिन ऐसे ही निकल जाता है। और फिर साल भी। आप राजा बाबू मत बनिएगा। और अगर आपके आस-पास ऐसे राजघराने के लोग दिखे तो उनसे दो गज दूरी बनाकर रखे। क्योंकि, कोरोना वायरस का इलाज तो मिल गया है लेकिन बाबगिरी के वायरस का इलाज सरकार अभी भी ढूंढ रही है।


 *अपनी समस्याओं को हम तक पहुंचाने के लिए इस नंबर पर व्हाट्सएप करें -* 9305008616


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ