Traita-vāda में तीन स्वतंत्र वास्तविकताओं का प्रस्ताव है: ईश्वर, जीव, और प्रकृति।
आधुनिक विज्ञान भी एक triadic perspective के करीब है, यदि हम इसे निम्न रूप में देखें:
Quantum physics और systems theory में भी देखा गया है कि:
यह बिलकुल Traita-vāda के जीव–प्रकृति–ईश्वर के दृष्टिकोण के समान है।
Neurology और Cognitive Science में चेतना (Consciousness) को emergent property के रूप में देखा जाता है।
Traita-vāda कहता है:
यह आधुनिक विचारों से थोड़ा अलग है, क्योंकि विज्ञान में चेतना हमेशा material interactions से जुड़ी रहती है।
लेकिन “Observer effect” और quantum measurement सिद्धांत यह सुझाव देते हैं कि:
यह Jīva का प्रभाव Traita-vāda में दर्शाता है।
Prakṛti (प्रकृति) को Traita-vāda में जड़ और परिवर्तनशील माना गया है।
विज्ञान भी इसे मानता है:
Traita-vāda कहता है कि प्रकृति स्वतंत्र है परंतु जीव और ईश्वर से प्रभावित होती है।
Physics में भी “Field theory” और “Environmental interactions” यही संकेत देते हैं।
Traita-vāda में ईश्वर को सर्वव्यापी नियम और आधार माना गया है।
विज्ञान में यह parallel पाया जाता है:
ईश्वर को केवल personal या anthropomorphic नहीं माना गया, बल्कि systematic, rational, और immutable के रूप में देखा गया।
यह आधुनिक वैज्ञानिक ontology के बिल्कुल अनुकूल है।
| Traita-vāda | Modern Science |
|---|---|
| Jīva (consciousness) | Observer / Mind |
| Prakṛti (matter) | Physical Universe / Matter |
| Īśvara (law) | Universal Laws / Principles |
यह तालमेल दर्शाता है कि:
Traita-vāda में ईश्वर और जीव के बीच संबंध नैतिकता भी स्थापित करता है।
Modern science में भी:
इस प्रकार Triadic ontology केवल दर्शन नहीं,
बल्कि नैतिक और वैज्ञानिक जीवन दोनों के लिए मार्गदर्शक बनती है।
👉 chapter 2.Ontology of Traita-vāda: Understanding the Threefold Reality of God, Self, and Nature
Chapter 4. Knowledge and Epistemology in Traita-vāda: Understanding True Wisdom
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