Traita-vāda, या त्रैतवाद, मानव जीवन के तीन मूल तत्व – ज्ञान, कर्म और उपासना – का वैज्ञानिक और दार्शनिक विवेचन प्रस्तुत करता है। यह दर्शन प्राचीन वैदिक ग्रंथों के ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और चेतना अध्ययन के साथ जोड़ता है।
इस पुस्तक और ब्लॉग श्रृंखला का उद्देश्य है:
यह श्रृंखला पाठकों को वैदिक त्रैतवाद की गहन समझ देती है और जीवन में इसके तात्त्विक प्रयोगों को अपनाने की दिशा दिखाती है।
मानव जीवन के तीन मूल तत्व – ज्ञान, कर्म और उपासना – का वैज्ञानिक विवेचन प्राचीन वैदिक दर्शन में Traita-vāda या त्रैतवाद के रूप में मिलता है। यह दर्शन न केवल आध्यात्मिक है, बल्कि आधुनिक विज्ञान, भौतिक ब्रह्मांड और जीवन विज्ञान के साथ भी गहरे सम्बन्ध रखता है।
इस पुस्तक का उद्देश्य Traita-vāda की **वैदिक त्रैतवाद पर आधारित वैज्ञानिक और दार्शनिक व्याख्या** प्रस्तुत करना है। इसमें हम देखेंगे कि कैसे:
मूल वैदिक मंत्रों, महर्षियों के कथनों, और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संयोजन इस पुस्तक का आधार है। पाठक इस पुस्तक को पढ़कर न केवल **वैदिक त्रैतवाद की गहन समझ** प्राप्त करेंगे, बल्कि अपने जीवन में **ज्ञान, कर्म और उपासना** के तात्त्विक प्रयोगों को भी अपनाने में सक्षम होंगे।
Proposed Chapter Structure – Traita-vāda Book
Chapter 1 – Introduction to Traita-vāda
(त्रैत-वाद का परिचय, इतिहास और दर्शन का अवलोकन)
Chapter 2 – Ontology: The Threefold Reality
(त्रि-आधारभूत अस्तित्व और त्रैतीय दृष्टिकोण)
Chapter 3 – Scientific Parallels of Traita-vāda
(विज्ञान और दर्शन में समानताएँ, आधुनिक शोध के दृष्टिकोण)
Chapter 4 – Epistemology and Knowledge in Traita-vāda
(ज्ञानमीमांसा, ज्ञान के स्रोत, चेतना और बोध)
Chapter 5 – Karma, Action, and the Ethical Dimension
(कर्म सिद्धांत, नैतिकता, मोक्ष और सामाजिक जीवन)
Chapter 6 – Consciousness, Mind, and Traita-vāda
(चेतना, मनोविज्ञान, और मन की त्रैत दृष्टि)
Chapter 7 – Spiritual Practices and Experiential Knowledge
(ध्यान, साधना, Upāsanā, अनुभवजन्य ज्ञान)
Chapter 8 – Traita-vāda and Comparative Philosophy
(अन्य दार्शनिक धाराओं से तुलनात्मक अध्ययन)
Chapter 9 – Practical Applications of Traita-vāda
(जीवन, समाज और विज्ञान में व्यवहारिक उपयोग)
Chapter 10 – Conclusion and Future Perspectives
(सारांश, भविष्य के अनुसंधान और समकालीन प्रासंगिकता)
Chapter. 1 चेतना मस्तिष्क नहीं है — एक दार्शनिक–वैज्ञानिक विवेचन)
0 टिप्पणियाँ