अथर्ववेदः/काण्डं १/सूक्तम् १७

अमूर्या यन्ति योषितो - श्लोक 1

अमूर्या यन्ति योषितो हिरा लोहितवाससः - श्लोक 1

अमूर्या यन्ति योषितो हिरा लोहितवाससः ।
अभ्रातर इव जामयस्तिष्ठन्तु हतवर्चसः ॥१॥

Hindi:
हिरा और लोहित वस्त्र धारण करने वाली महिलाएँ अमूर्य मार्ग से जाएँ। जामय जैसे भाई की तरह वे हतवर्चस से टिके रहें।

English:
Women wearing gold and red garments go the Amurya path. Like brothers, may they stand firm with Hatavarchas.

Word by Word:
अमूर्या = अमूर्य मार्ग | यन्ति = जाते हैं | योषितः = स्त्रियाँ | हिरा = हीरा / सुनहरा | लोहितवाससः = लाल वस्त्र | अभ्रातर = भाई समान | इव = जैसे | जामयः = नाम / भाई | तिष्ठन्तु = टिके रहें | हतवर्चसः = वीर्य / शक्ति
तिष्ठावरे तिष्ठ पर उत त्वं तिष्ठ मध्यमे ।
कनिष्ठिका च तिष्ठति तिष्ठादिद्धमनिर्मही ॥२॥

Hindi:
तुम ऊपरी और मध्यम स्तर पर टिको, और कनिष्ठिका सबसे निचले स्तर पर रहे।

English:
Stand on the upper and middle level, and let the Kanisthika stay on the lowest level.

Word by Word:
तिष्ठावरे = ऊपरी स्तर पर | तिष्ठ = टिको | पर उत = मध्य स्तर पर | त्वं = तुम | तिष्ठ मध्यमे = मध्यम स्तर पर टिको | कनिष्ठिका = सबसे निचला हिस्सा | च = और | तिष्ठति = रहे | तिष्ठादि = शुरू से टिको | धनिर्मही = पृथ्वी पर
शतस्य धमनीनां सहस्रस्य हिराणाम् ।
अस्थुरिन् मध्यमा इमाः साकमन्ता अरंसत ॥३॥

Hindi:
सौ धमनी और हजारों हिरा हों। मध्यमा अस्त्र इन सबके साथ रहें।

English:
May there be a hundred arteries and a thousand gold ornaments. The medium weapon stands among them.

Word by Word:
शतस्य = सौ | धमनीनां = धमनी / धमनियाँ | सहस्रस्य = हजार | हिराणाम् = सोने / हिरा | अस्थुरिन् = अस्त्र | मध्यमा = मध्य का | इमाः = ये | साकमन्ता = साथ | अरंसत = रहें
परि वः सिकतावती धनूर्बृहत्यक्रमीत्।
तिष्ठतेलयता सु कम् ॥४॥

Hindi:
सिकतावती (साफ स्थान) के चारों ओर धनुष बड़ा क्रम में रखा गया है। सु कम स्थिरता से वहां स्थित हैं।

English:
Around the clear area, large bows are arranged in order. The Su-kam stand there steadily.

Word by Word:
परि वः = चारों ओर | सिकतावती = साफ स्थान | धनूः = धनुष | बृहत्यक्रमीत् = बड़े क्रम में | तिष्ठतेलयता = स्थिरता से स्थित हैं | सुकम् = सु-कम

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