कणाद - वैशेषिक दर्शन 7.1
कणाद - वैशेषिक दर्शन 7.1 (32 सूत्र)
उक्ता गुणाः
अर्थ : गुणों का वर्णन किया गया।
गुणलक्षणं चोक्तम्
अर्थ : गुण का लक्षण स्पष्ट किया गया।
इदं एवंगुणं इदं एवंगुणं इति चोक्तम्
अर्थ : गुण के बार-बार होने और उसका वर्णन।
पृथिव्यां रूपरसगन्धस्पर्शा द्रव्यानित्यत्वादनित्याः
अर्थ : पृथ्वी में रूप, रस, गन्ध, स्पर्श और द्रव्यों का नित्य और अनित्य होना।
अग्निसंयोगाच्च
अर्थ : अग्नि के संयोग के कारण गुण प्रकट होते हैं।
गुणान्तरप्रादुर्भावात्
अर्थ : गुणान्तर के प्रादुर्भाव से गुण व्याख्यात होते हैं।
एतेन नित्येष्वनित्यत्वं उक्तम्
अर्थ : इस प्रकार नित्य और अनित्य का ज्ञान किया गया।
अप्सु तेजसि वायौ च नित्या द्रव्यनित्यत्वात्
अर्थ : जल, तेज और वायु में नित्यत्व द्रव्य के कारण है।
अनित्येष्वनित्या द्रव्यानित्यत्वात्
अर्थ : अनित्य में नित्यत्व द्रव्यनित्यत्व से व्याख्यायित।
कारणगुणपूर्वाः पृथिव्यां पाकजाश्च
अर्थ : पृथ्वी में पाकजा गुण कारणपूर्वक प्रकट होते हैं।
अप्सु तेजसि वायौ च कारणगुणपूर्वाः पाकजा न विद्यन्ते
अर्थ : जल, तेज, वायु में कारणगुणपूर्वक पाकजा नहीं पाए जाते।
अगुणवतो द्रव्यस्य गुणारम्भात्कर्मगुणा अगुणाः
अर्थ : गुणहीन द्रव्य में गुणारंभ से कर्मगुण उत्पन्न होते हैं।
एतेन पाकजा व्याख्याताः
अर्थ : इसी प्रकार पाकजा का वर्णन किया गया।
एकद्रव्यवत्त्वात्
अर्थ : एकद्रव्यत्व के कारण।
अणोर्महतश्चोपलब्ध्यनुपलब्धी नित्ये व्याख्याते
अर्थ : अणु और महत की प्राप्ति या अनुपलब्धि नित्यत्व से व्याख्यायित।
कारणबहुत्वात्कारणमहत्त्वात्प्रचयविशेषाच्च महत
अर्थ : कारणबहुत्व, कारणमहत्त्व और प्रचयविशेष से महत।
तद्विपरीतं अणु
अर्थ : इसके विपरीत अणु।
अणु महदिति तस्मिन्विशेषभावाद्विशेषाभावाच्च
अर्थ : अणु और महद विशेषभाव और विशेषाभाव से व्याख्यायित।
एककालत्वात्
अर्थ : एककालत्व के कारण।
अणुत्वमहत्त्वयोरणुत्वमहत्त्वाभावः कर्मगुणैर्व्याख्यातः
अर्थ : अणु और महत्त्व के कारण कर्म और गुण व्याख्यायित।
अणुत्वमहत्त्वाभ्यां कर्मगुणा अगुणाः
अर्थ : अणु और महत्त्व से कर्म और गुण का अभाव।
एतेन दीर्घत्वह्रस्वत्वे व्याख्याते
अर्थ : दीर्घ और ह्रस्व का वर्णन इसी से।
कर्मभिः कर्माणि गुणैर्गुणाः
अर्थ : कर्मों द्वारा कर्म और गुण द्वारा गुण।
तदनित्ये
अर्थ : तत् नित्य में।
नित्यं परिमण्डलम्
अर्थ : नित्य का परिमण्डल।
अविद्या विद्यालिङ्गम्
अर्थ : अविद्या और विद्यालिङ्ग।
विभवान्महानाकाशः
अर्थ : विभव और महानाकाश।
तथा चात्मा
अर्थ : तथा चात्मा।
तदभावादणु मनः
अर्थ : तदभाव से अणु मन व्याख्यायित।
गुणैर्दिग्व्याख्याता
अर्थ : गुणों द्वारा दिशा का व्याख्यान।
कारणेन कालः
अर्थ : कारण द्वारा काल का ज्ञान।
समाप्त
अर्थ : 7.1 का समापन।
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