Agni sukta mantra16

 ये सतोत्र्भ्यो गोग्रामश्वपेशसमग्ने रातिमुपस्र्जन्ति सूरयः । 

अस्माञ्च तांश्च पर हि नेषि वस्य आ बर्हद वदेम विदथे सुवीराः |

यह ऋग्वैदिक अग्नि-स्तुति का वह भाग है जहाँ यज्ञ, दान, वाणी और सामाजिक कल्याण एक साथ आते हैं। 


📜 मंत्र (शुद्ध पाठ)

ये स्तोत्र्भ्यो गोग्रामश्वपेशसम्
अग्ने रातिमुपसृजन्ति सूरयः |

अस्माञ्च तांश्च प्र हि नेषि वस्य
आ बृहद् वदेम विदथे सुवीराः ||


🔹 पदच्छेद व शब्दार्थ

  • ये – जो

  • स्तोत्र्भ्यः – स्तुति करने वालों को

  • गो-ग्राम-अश्व-पेशसम् – गायों, समूहों, घोड़ों और समृद्धि से युक्त

  • अग्ने – हे अग्नि

  • रातिम् – दान, कृपा, संपत्ति

  • उपसृजन्ति – प्रदान करते हैं

  • सूरयः – ज्ञानी, दानी, उदार पुरुष

  • अस्मान् च – हमें भी

  • तान् च – उन्हें भी

  • प्र हि नेषि – निश्चय ही आगे ले जाते हो

  • वस्य – श्रेष्ठ पथ की ओर

  • आ बृहद् वदेम – हम महान वाणी बोलें

  • विदथे – सभा/यज्ञ/लोककल्याण के अवसर पर

  • सुवीराः – श्रेष्ठ वीरों से युक्त होकर


🌺 सरल भावार्थ

हे अग्नि!
जो उदार और ज्ञानी लोग
स्तुति करने वालों को
गाय, अश्व और समृद्धि का दान देते हैं—
उन सबको और हमें भी
तुम श्रेष्ठ मार्ग पर आगे ले जाते हो।

ऐसी कृपा से युक्त होकर
हम समाज के मध्य
महान वाणी बोलें
और श्रेष्ठ, तेजस्वी संतानों से युक्त हों।


🔥 गूढ़ अर्थ (यहीं से मंत्र जीवित होता है)

🔸 1. दान = आध्यात्मिक गति

रातिम् उपसृजन्ति सूरयः

वेद में दान कोई सामाजिक मजबूरी नहीं— यह चेतना की गति है।

  • जो देता है → वही आगे बढ़ता है
  • जो रोकता है → वही जड़ हो जाता है

🔸 2. संपत्ति का वैदिक अर्थ

गो–ग्राम–अश्व–पेशसम्

यह केवल पशु नहीं:

  • गो → ज्ञान, प्रकाश
  • अश्व → गति, सामर्थ्य
  • ग्राम → समाज, संरचना
  • पेशस → सौंदर्य, समृद्धि

👉 यानी पूर्ण जीवन-संपदा


🔸 3. अग्नि = नैतिक नेविगेटर

प्र हि नेषि वस्य

अग्नि यहाँ मार्गदर्शक है— वह बताती है:

  • कौन-सा कर्म आगे ले जाएगा
  • कौन-सा पीछे गिराएगा

🔸 4. वाणी भी यज्ञ है

आ बृहद् वदेम विदथे

वेद में—

  • गलत वाणी = पतन
  • बृहद् वाणी = सृष्टि का विस्तार

👉 समाज वही बनता है
जो उसकी वाणी होती है।


🔸 5. सुवीर = केवल योद्धा नहीं

सुवीराः

सुवीर का अर्थ:

  • सद्गुणी
  • साहसी
  • विवेकशील
  • उत्तरदायी मनुष्य

🧠 आधुनिक संदर्भ (आज के युग में)

यह मंत्र कहता है:

  • Ethical Wealth ही टिकाऊ होती है
  • जो Creator को देता है, वही Leader बनता है
  • समाज को आगे वही ले जाता है
    जिसकी वाणी, नीति और दान तीनों शुद्ध हों

🕯️ साधना में प्रयोग

यह मंत्र जप योग्य है जब:

  • धन आए पर दिशा न मिले
  • बोलने की शक्ति चाहिए (लेखक, वक्ता)
  • समाज/परिवार के लिए कार्य कर रहे हों

🔚 सार-वाक्य

जो देता है, वही बढ़ता है;
और जिसे अग्नि आगे ले जाए—
वही समाज का मार्गदर्शक बनता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ