यदग्निरापो अदहत्प्रविश्य - श्लोक 1
यदग्निरापो अदहत्प्रविश्य यत्राकृण्वन् धर्मधृतो नमांसि ।
तत्र त आहुः परमं जनित्रं स नः संविद्वान् परि वृङ्ग्धि तक्मन् ॥१॥
तत्र त आहुः परमं जनित्रं स नः संविद्वान् परि वृङ्ग्धि तक्मन् ॥१॥
Hindi:
जब अग्नि और जल प्रविष्ट होते हैं और धर्मपालक द्वारा पूजा की जाती है, वहां परम जनक का सम्मान किया जाता है। वह हमारे लिए संज्ञानपूर्ण होकर कार्य को पूर्ण करता है।
English:
Where fire and water enter, and the dharma-holder offers homage, there the supreme creator is invoked. He acts knowingly and accomplishes the work for us.
जब अग्नि और जल प्रविष्ट होते हैं और धर्मपालक द्वारा पूजा की जाती है, वहां परम जनक का सम्मान किया जाता है। वह हमारे लिए संज्ञानपूर्ण होकर कार्य को पूर्ण करता है।
English:
Where fire and water enter, and the dharma-holder offers homage, there the supreme creator is invoked. He acts knowingly and accomplishes the work for us.
Word by Word:
यद् = जब | अग्निः = अग्नि | अपः = जल | अदहत् = प्रवेश किया | प्रविश्य = जाकर | यत्र = जहां | अकृण्वन् = किया | धर्मधृतः = धर्मपालक | नमांसि = प्रणाम करता हूँ | तत्र = वहां | आहुः = कहा गया | परमं = सर्वोच्च | जनित्रं = सृजनहार | सः = वह | नः = हमारे लिए | संविद्वान् = ज्ञानी | परि = चारों ओर | वृङ्ग्धि = कार्य | तक्मन् = संपन्न करता है
यद् = जब | अग्निः = अग्नि | अपः = जल | अदहत् = प्रवेश किया | प्रविश्य = जाकर | यत्र = जहां | अकृण्वन् = किया | धर्मधृतः = धर्मपालक | नमांसि = प्रणाम करता हूँ | तत्र = वहां | आहुः = कहा गया | परमं = सर्वोच्च | जनित्रं = सृजनहार | सः = वह | नः = हमारे लिए | संविद्वान् = ज्ञानी | परि = चारों ओर | वृङ्ग्धि = कार्य | तक्मन् = संपन्न करता है
यद्यर्चिर्यदि वासि शोचिः शकल्येषि यदि वा ते जनित्रम् ।
ह्रूडुर्नामासि हरितस्य देव स नः संविद्वान् परि वृङ्ग्धि तक्मन् ॥२॥
ह्रूडुर्नामासि हरितस्य देव स नः संविद्वान् परि वृङ्ग्धि तक्मन् ॥२॥
Hindi:
यदि तुम लंबे समय तक पूजा करते हो या शोचि (धार्मिक कर्म) करते हो, तो हरित देव की भक्ति से वह हमारे लिए संज्ञानपूर्वक कार्य संपन्न करता है।
English:
If you perform worship for long or engage in religious rites, the deity Harit fulfills the work knowingly for us.
यदि तुम लंबे समय तक पूजा करते हो या शोचि (धार्मिक कर्म) करते हो, तो हरित देव की भक्ति से वह हमारे लिए संज्ञानपूर्वक कार्य संपन्न करता है।
English:
If you perform worship for long or engage in religious rites, the deity Harit fulfills the work knowingly for us.
Word by Word:
यद्यर्चिर = यदि लंबे समय तक पूजा | यदि = यदि | वासि = तुम करते हो | शोचिः = धार्मिक कर्म | शकल्येषि = करते हो | यदि वा = या | ते = तुम्हारा | जनित्रम् = सृजनहार | ह्रूडुर्नामासि = सम्मान करता हूँ | हरितस्य देव = हरित देव | सः = वह | नः = हमारे लिए | संविद्वान् = ज्ञानी | परि = चारों ओर | वृङ्ग्धि तक्मन् = कार्य संपन्न करता है
यद्यर्चिर = यदि लंबे समय तक पूजा | यदि = यदि | वासि = तुम करते हो | शोचिः = धार्मिक कर्म | शकल्येषि = करते हो | यदि वा = या | ते = तुम्हारा | जनित्रम् = सृजनहार | ह्रूडुर्नामासि = सम्मान करता हूँ | हरितस्य देव = हरित देव | सः = वह | नः = हमारे लिए | संविद्वान् = ज्ञानी | परि = चारों ओर | वृङ्ग्धि तक्मन् = कार्य संपन्न करता है
यदि शोको यदि वाभिशोको यदि वा राज्ञो वरुणस्यासि पुत्रः ।
ह्रूडुर्नामासि हरितस्य देव स नः संविद्वान् परि वृङ्ग्धि तक्मन् ॥३॥
ह्रूडुर्नामासि हरितस्य देव स नः संविद्वान् परि वृङ्ग्धि तक्मन् ॥३॥
Hindi:
यदि शोक या अत्यधिक शोक हो, या तुम वरुण के पुत्र के रूप में सेवा करते हो, हरित देव हमारे लिए कार्य को पूर्ण करता है।
English:
If there is sorrow or excessive grief, or you serve as the son of Varuna, the deity Harit accomplishes the task knowingly for us.
यदि शोक या अत्यधिक शोक हो, या तुम वरुण के पुत्र के रूप में सेवा करते हो, हरित देव हमारे लिए कार्य को पूर्ण करता है।
English:
If there is sorrow or excessive grief, or you serve as the son of Varuna, the deity Harit accomplishes the task knowingly for us.
Word by Word:
यदि = यदि | शोको = शोक | वा = या | अभिशोको = अत्यधिक शोक | राज्ञो = राजा का | वरुणस्यासि = वरुण का पुत्र | ह्रूडुर्नामासि = सम्मान करता हूँ | हरितस्य देव = हरित देव | सः = वह | नः = हमारे लिए | संविद्वान् = ज्ञानी | परि = चारों ओर | वृङ्ग्धि तक्मन् = कार्य संपन्न करता है
यदि = यदि | शोको = शोक | वा = या | अभिशोको = अत्यधिक शोक | राज्ञो = राजा का | वरुणस्यासि = वरुण का पुत्र | ह्रूडुर्नामासि = सम्मान करता हूँ | हरितस्य देव = हरित देव | सः = वह | नः = हमारे लिए | संविद्वान् = ज्ञानी | परि = चारों ओर | वृङ्ग्धि तक्मन् = कार्य संपन्न करता है
नमः शीताय तक्मने नमो रूराय शोचिषे कृणोमि ।
यो अन्येद्युरुभयद्युरभ्येति तृतीयकाय नमो अस्तु तक्मने ॥४॥
यो अन्येद्युरुभयद्युरभ्येति तृतीयकाय नमो अस्तु तक्मने ॥४॥
Hindi:
मैं नमस्कार करता हूँ शीताय और रूराय को। जो अन्य कर्मों में फसता है, उसके लिए तृतीय उपाय के रूप में नमस्कार हो।
English:
Salutations to Shita and Rura; for one who is engaged in other works, let this third method be honored.
मैं नमस्कार करता हूँ शीताय और रूराय को। जो अन्य कर्मों में फसता है, उसके लिए तृतीय उपाय के रूप में नमस्कार हो।
English:
Salutations to Shita and Rura; for one who is engaged in other works, let this third method be honored.
Word by Word:
नमः = प्रणाम | शीताय = शीत देव | तक्मने = कार्य संपन्न करने वाले | रूराय = रूर देव | शोचिषे = शोक कर्म | कृणोमि = करता हूँ | यो = जो | अन्ये = अन्य | द्युर्भयद्युरभ्येति = अन्य कार्यों में फँसा | तृतीयकाय = तीसरे उपाय के रूप में | नमो अस्तु = नमस्कार हो | तक्मने = कार्य संपन्न करने वाले
नमः = प्रणाम | शीताय = शीत देव | तक्मने = कार्य संपन्न करने वाले | रूराय = रूर देव | शोचिषे = शोक कर्म | कृणोमि = करता हूँ | यो = जो | अन्ये = अन्य | द्युर्भयद्युरभ्येति = अन्य कार्यों में फँसा | तृतीयकाय = तीसरे उपाय के रूप में | नमो अस्तु = नमस्कार हो | तक्मने = कार्य संपन्न करने वाले


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