अथर्ववेदः/काण्डं १/सूक्तम् १४

भगमस्या वर्च आदिष्यधि - श्लोक 1

भगमस्या वर्च आदिष्यधि वृक्षादिव स्रजम् - श्लोक 1

भगमस्या वर्च आदिष्यधि वृक्षादिव स्रजम् ।
महाबुध्न इव पर्वतो ज्योक्पितृष्वास्ताम् ॥१॥

Hindi:
हे राजा! यह शक्ति वृक्ष की तरह फैलती है और पर्वत की तरह मजबूत है।

English:
O King! This power spreads like a tree and is as strong as a mountain.

Word by Word:
भगमस्या = उसकी शक्ति | वर्च = प्रभाव | आदिष्यधि = प्रसारित हो | वृक्षादिव = वृक्ष की तरह | स्रजम् = फैलती | महाबुध्न = बड़े पर्वत की तरह | इव = जैसा | पर्वतो = पर्वत | ज्योक्पितृष्वास्ताम् = पिता के समान
एषा ते राजन् कन्या वधूर्नि धूयतां यम ।
सा मातुर्बध्यतां गृहेऽथो भ्रातुरथो पितुः ॥२॥

Hindi:
राजा, यह शक्ति कन्या या वधू में स्थिर हो। वह माता, भाई या पिता के घर में समुचित रूप से बनी रहे।

English:
O King, may this power dwell in the girl or bride. May it remain appropriately in the house of mother, brother, or father.

Word by Word:
एषा = यह | ते = तुम्हारे लिए | राजन् = हे राजा | कन्या = लड़की | वधूर्नि = वधू | धूयतां = स्थिर हो | यम = यथोचित | सा = वह | माता = माता | बद्ध्यातां = बंधी रहे | गृहे = घर में | अथो = या | भ्रातुरथो = भाई के | पितुः = पिता के
एषा ते कुलपा राजन् तामु ते परि दद्मसि ।
ज्योक्पितृष्वासाता आ शीर्ष्णः शमोप्यात्॥३॥

Hindi:
राजा, यह शक्ति तुम्हारी कुलपिता (परिवार) में स्थापित हो और पिता के समान स्थिर रहे।

English:
O King, let this power be established in your family and remain steady like the father.

Word by Word:
एषा = यह | ते = तुम्हारे लिए | कुलपा = कुलपिता / परिवार | राजन् = हे राजा | तामु = उस शक्ति को | ते = तुम्हारे | परि = के आस-पास | दद्मसि = स्थापित करो | ज्योक्पितृष्वासाता = पिता के समान स्थिर | आ = इस प्रकार | शीर्ष्णः = शीर्ष | शमोप्यात् = स्थिर रहे
असितस्य ते ब्रह्मणा कश्यपस्य गयस्य च ।
अन्तःकोशमिव जामयोऽपि नह्यामि ते भगम् ॥४ ॥

Hindi:
हे राजा! मैं आपकी शक्ति को ब्रह्मा, कश्यप और गय की तरह आंतरिक कोष में सुरक्षित रखता हूँ।

English:
O King! I protect your power like Brahma, Kashyapa, and Gaya, as if in an inner treasury.

Word by Word:
असितस्य = यह शक्ति | ते = तुम्हारी | ब्रह्मणा = ब्रह्मा के समान | कश्यपस्य = कश्यप के समान | गयस्य = गय के समान | च = और | अन्तःकोशमिव = आंतरिक कोष की तरह | जामयोऽपि = यहाँ भी | नह्यामि = मैं रखता हूँ | ते = तुम्हारे | भगम् = शक्ति / भाग्य

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