भगमस्या वर्च आदिष्यधि वृक्षादिव स्रजम् - श्लोक 1
भगमस्या वर्च आदिष्यधि वृक्षादिव स्रजम् ।
महाबुध्न इव पर्वतो ज्योक्पितृष्वास्ताम् ॥१॥
महाबुध्न इव पर्वतो ज्योक्पितृष्वास्ताम् ॥१॥
Hindi:
हे राजा! यह शक्ति वृक्ष की तरह फैलती है और पर्वत की तरह मजबूत है।
English:
O King! This power spreads like a tree and is as strong as a mountain.
हे राजा! यह शक्ति वृक्ष की तरह फैलती है और पर्वत की तरह मजबूत है।
English:
O King! This power spreads like a tree and is as strong as a mountain.
Word by Word:
भगमस्या = उसकी शक्ति | वर्च = प्रभाव | आदिष्यधि = प्रसारित हो | वृक्षादिव = वृक्ष की तरह | स्रजम् = फैलती | महाबुध्न = बड़े पर्वत की तरह | इव = जैसा | पर्वतो = पर्वत | ज्योक्पितृष्वास्ताम् = पिता के समान
भगमस्या = उसकी शक्ति | वर्च = प्रभाव | आदिष्यधि = प्रसारित हो | वृक्षादिव = वृक्ष की तरह | स्रजम् = फैलती | महाबुध्न = बड़े पर्वत की तरह | इव = जैसा | पर्वतो = पर्वत | ज्योक्पितृष्वास्ताम् = पिता के समान
एषा ते राजन् कन्या वधूर्नि धूयतां यम ।
सा मातुर्बध्यतां गृहेऽथो भ्रातुरथो पितुः ॥२॥
सा मातुर्बध्यतां गृहेऽथो भ्रातुरथो पितुः ॥२॥
Hindi:
राजा, यह शक्ति कन्या या वधू में स्थिर हो। वह माता, भाई या पिता के घर में समुचित रूप से बनी रहे।
English:
O King, may this power dwell in the girl or bride. May it remain appropriately in the house of mother, brother, or father.
राजा, यह शक्ति कन्या या वधू में स्थिर हो। वह माता, भाई या पिता के घर में समुचित रूप से बनी रहे।
English:
O King, may this power dwell in the girl or bride. May it remain appropriately in the house of mother, brother, or father.
Word by Word:
एषा = यह | ते = तुम्हारे लिए | राजन् = हे राजा | कन्या = लड़की | वधूर्नि = वधू | धूयतां = स्थिर हो | यम = यथोचित | सा = वह | माता = माता | बद्ध्यातां = बंधी रहे | गृहे = घर में | अथो = या | भ्रातुरथो = भाई के | पितुः = पिता के
एषा = यह | ते = तुम्हारे लिए | राजन् = हे राजा | कन्या = लड़की | वधूर्नि = वधू | धूयतां = स्थिर हो | यम = यथोचित | सा = वह | माता = माता | बद्ध्यातां = बंधी रहे | गृहे = घर में | अथो = या | भ्रातुरथो = भाई के | पितुः = पिता के
एषा ते कुलपा राजन् तामु ते परि दद्मसि ।
ज्योक्पितृष्वासाता आ शीर्ष्णः शमोप्यात्॥३॥
ज्योक्पितृष्वासाता आ शीर्ष्णः शमोप्यात्॥३॥
Hindi:
राजा, यह शक्ति तुम्हारी कुलपिता (परिवार) में स्थापित हो और पिता के समान स्थिर रहे।
English:
O King, let this power be established in your family and remain steady like the father.
राजा, यह शक्ति तुम्हारी कुलपिता (परिवार) में स्थापित हो और पिता के समान स्थिर रहे।
English:
O King, let this power be established in your family and remain steady like the father.
Word by Word:
एषा = यह | ते = तुम्हारे लिए | कुलपा = कुलपिता / परिवार | राजन् = हे राजा | तामु = उस शक्ति को | ते = तुम्हारे | परि = के आस-पास | दद्मसि = स्थापित करो | ज्योक्पितृष्वासाता = पिता के समान स्थिर | आ = इस प्रकार | शीर्ष्णः = शीर्ष | शमोप्यात् = स्थिर रहे
एषा = यह | ते = तुम्हारे लिए | कुलपा = कुलपिता / परिवार | राजन् = हे राजा | तामु = उस शक्ति को | ते = तुम्हारे | परि = के आस-पास | दद्मसि = स्थापित करो | ज्योक्पितृष्वासाता = पिता के समान स्थिर | आ = इस प्रकार | शीर्ष्णः = शीर्ष | शमोप्यात् = स्थिर रहे
असितस्य ते ब्रह्मणा कश्यपस्य गयस्य च ।
अन्तःकोशमिव जामयोऽपि नह्यामि ते भगम् ॥४ ॥
अन्तःकोशमिव जामयोऽपि नह्यामि ते भगम् ॥४ ॥
Hindi:
हे राजा! मैं आपकी शक्ति को ब्रह्मा, कश्यप और गय की तरह आंतरिक कोष में सुरक्षित रखता हूँ।
English:
O King! I protect your power like Brahma, Kashyapa, and Gaya, as if in an inner treasury.
हे राजा! मैं आपकी शक्ति को ब्रह्मा, कश्यप और गय की तरह आंतरिक कोष में सुरक्षित रखता हूँ।
English:
O King! I protect your power like Brahma, Kashyapa, and Gaya, as if in an inner treasury.
Word by Word:
असितस्य = यह शक्ति | ते = तुम्हारी | ब्रह्मणा = ब्रह्मा के समान | कश्यपस्य = कश्यप के समान | गयस्य = गय के समान | च = और | अन्तःकोशमिव = आंतरिक कोष की तरह | जामयोऽपि = यहाँ भी | नह्यामि = मैं रखता हूँ | ते = तुम्हारे | भगम् = शक्ति / भाग्य
असितस्य = यह शक्ति | ते = तुम्हारी | ब्रह्मणा = ब्रह्मा के समान | कश्यपस्य = कश्यप के समान | गयस्य = गय के समान | च = और | अन्तःकोशमिव = आंतरिक कोष की तरह | जामयोऽपि = यहाँ भी | नह्यामि = मैं रखता हूँ | ते = तुम्हारे | भगम् = शक्ति / भाग्य


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