तेज और आयु – श्लोक व्याख्या
बालस्यापि रवेः पादाः पतन्त्युपरि भूभृताम् ।
तेजसा सह जातानां वयः कुत्रोपयुज्यते ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • बालस्य अपि – Even of the young / बाल अवस्था में भी
  • रवेः – Of the sun / सूर्य के
  • पादाः – Rays / किरणें
  • पतन्ति – Fall / पड़ती हैं
  • उपरि – Upon / ऊपर
  • भूभृताम् – On mountains / पर्वतों पर
  • तेजसा सह जातानाम् – Those born with brilliance / जो तेज के साथ जन्मे हैं
  • वयः – Age / आयु
  • कुत्र उपयुज्यते – Of what use is age / आयु का क्या महत्व
हिन्दी अर्थ

सूर्य जब **बाल अवस्था में (उदय के समय)** भी होता है, तब भी उसकी किरणें **ऊँचे-ऊँचे पर्वतों पर पड़ती हैं**। इसी प्रकार जो लोग **तेज और प्रतिभा के साथ जन्म लेते हैं**, उनके लिए **आयु (बड़ा या छोटा होना) कोई विशेष महत्व नहीं रखती**।

English Meaning

Even when the **sun is young (at sunrise)**, its rays **reach the tops of great mountains**. Similarly, for those **born with brilliance and talent**, **age does not matter**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक सिखाता है कि **प्रतिभा और तेज उम्र पर निर्भर नहीं होते**। यदि किसी व्यक्ति में **ज्ञान, क्षमता और उत्साह है**, तो वह **कम उम्र में भी महान कार्य कर सकता है**। अतः **योग्यता का मूल्य आयु से अधिक महत्वपूर्ण है**।

धन और समाज की दृष्टि – श्लोक व्याख्या
यस्य अस्ति वित्तं स वरः कुलिनः ।
स पण्डितः स श्रुतवान् गुणज्ञः ।
स एव वक्ता स च दर्शनीयः ।
सर्वे गुणाः काञ्चनम् आश्रयन्ते ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • यस्य अस्ति वित्तम् – One who has wealth / जिसके पास धन है
  • स वरः – He is considered excellent / वही श्रेष्ठ माना जाता है
  • कुलिनः – Noble / कुलीन
  • पण्डितः – Learned / विद्वान
  • श्रुतवान् – Well-educated / सुना-पढ़ा हुआ
  • गुणज्ञः – Knower of virtues / गुणों का ज्ञाता
  • वक्ता – Speaker / वक्ता
  • दर्शनीयः – Handsome or respectable / देखने योग्य
  • सर्वे गुणाः – All qualities / सभी गुण
  • काञ्चनम् आश्रयन्ते – Take refuge in gold (wealth) / धन में आश्रय लेते हैं
हिन्दी अर्थ

जिस व्यक्ति के पास **धन होता है**, समाज में वही **श्रेष्ठ, कुलीन, विद्वान, गुणी और सम्मानित** माना जाता है। वही **अच्छा वक्ता और आकर्षक व्यक्ति** समझा जाता है। अर्थात् संसार में प्रायः **सभी गुण धन में ही आश्रित मान लिए जाते हैं**।

English Meaning

A person **who possesses wealth** is often regarded as **noble, learned, wise, and virtuous** in society. He is considered **a good speaker and admirable person**. Thus, it is said that **all virtues seem to take refuge in wealth**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक समाज की एक **व्यंग्यात्मक वास्तविकता** को दर्शाता है कि लोग अक्सर **धन के आधार पर ही किसी व्यक्ति का सम्मान और मूल्यांकन करते हैं**। परन्तु वास्तविक दृष्टि से **सच्चे गुण धन से नहीं, बल्कि ज्ञान, चरित्र और सदाचार से उत्पन्न होते हैं**।

शंकर की अपवर्गदायिनी मूर्ति – श्लोक व्याख्या
पार्वती फणि बालेन्दु भस्म मन्दाकिनी युता ।
अपवर्गप्रदा मूर्तिः कथं स्यात् तव शङ्कर ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • पार्वती – Goddess Parvati / पार्वती
  • फणि – Serpent / सर्प
  • बालेन्दु – Crescent moon / अर्धचन्द्र
  • भस्म – Sacred ash / भस्म
  • मन्दाकिनी – The river Ganga / गंगा
  • युता – Adorned with / युक्त
  • अपवर्गप्रदा – Bestower of liberation / मोक्ष देने वाली
  • मूर्ति – Form / स्वरूप
  • कथं – How / कैसे
  • स्यात् – Can be / हो सकती है
  • तव – Your / आपकी
  • शङ्कर – O Shiva / हे शंकर
हिन्दी अर्थ

हे शंकर! आपकी मूर्ति **पार्वती, सर्प, अर्धचन्द्र, भस्म और गंगा से युक्त** है। इन सभी प्रतीकों से युक्त आपका स्वरूप **मोक्ष (अपवर्ग) देने वाला** कैसे नहीं हो सकता?

English Meaning

O Shankara! Your form is adorned with **Parvati, a serpent, the crescent moon, sacred ash, and the river Ganga**. How can such a divine form **not be the giver of liberation (moksha)**?

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

भगवान शिव का स्वरूप **वैराग्य, ज्ञान, शक्ति और पवित्रता** का प्रतीक है। गंगा, चन्द्र, सर्प और भस्म जैसे चिन्ह **जीवन की नश्वरता और आध्यात्मिक जागरण** का संदेश देते हैं। इसलिए शिव की उपासना **मोक्ष और आत्मज्ञान की प्राप्ति का मार्ग** मानी जाती है।

विरह का करुण भाव – श्लोक व्याख्या
सुमित्रानन्दनासक्तं इमं राजानं ईक्ष्य वा ।
अथ वा मां कृशतनुं जलधे रोदिषि स्वयम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • सुमित्रा नन्दन – Son of Sumitra (Lakshmana) / सुमित्रा के पुत्र (लक्ष्मण)
  • आसक्तं – Attached / आसक्त
  • इमं राजानं – This king / इस राजा को
  • ईक्ष्य – Seeing / देखकर
  • अथ वा – Or else / अथवा
  • मां – Me / मुझे
  • कृश तनुं – With a weak body / कृश शरीर वाली
  • जलधे – O ocean / हे समुद्र
  • रोदिषि – You cry / तुम रोते हो
  • स्वयम् – Yourself / स्वयं
हिन्दी अर्थ

हे समुद्र! क्या तुम **सुमित्रा के पुत्र (लक्ष्मण) के प्रति इस राजा की गहरी आसक्ति को देखकर रो रहे हो**, या फिर **मुझे इस कृशकाय अवस्था में देखकर स्वयं विलाप कर रहे हो**?

English Meaning

O Ocean! Are you **weeping after seeing the deep affection of this king for the son of Sumitra (Lakshmana)**, or are you **lamenting on seeing me in this weakened condition**?

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक **विरह, करुणा और गहन भावनात्मक संबंध** को दर्शाता है। मनुष्य के हृदय में **प्रेम और लगाव की तीव्रता** इतनी गहरी होती है कि प्रकृति भी मानो उसके साथ दुःख व्यक्त करती हुई प्रतीत होती है।

परोपकारमय जीवन – श्लोक व्याख्या
जीविते यस्य जीवन्ति लोके मित्राणि बान्धवाः ।
सफलं जीवितं तस्य को न स्वार्थाय जीवति ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • जीविते – In one's life / जीवन में
  • यस्य – Of whom / जिसके
  • जीवन्ति – Live, survive / जीवित रहते हैं
  • लोके – In the world / संसार में
  • मित्राणि – Friends / मित्र
  • बान्धवाः – Relatives / बन्धु-बान्धव
  • सफलं – Successful / सफल
  • जीवितं – Life / जीवन
  • तस्य – His / उसका
  • कः न – Who does not / कौन नहीं
  • स्वार्थाय – For self-interest / अपने स्वार्थ के लिए
  • जीवति – Lives / जीता है
हिन्दी अर्थ

जिस व्यक्ति के जीवन से **मित्र और बन्धु-बान्धव भी जीवनयापन कर सकें**, अर्थात् जिसके कारण **दूसरों का भी जीवन सुखी और सुरक्षित बने**, उसी का जीवन वास्तव में **सफल माना जाता है**। क्योंकि **केवल अपने स्वार्थ के लिए तो हर कोई जीता है**।

English Meaning

A person whose **life supports and sustains friends and relatives in this world** is considered to have a **truly successful life**. After all, **who does not live for their own self-interest?**

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक सिखाता है कि **सच्चे जीवन की सफलता परोपकार और दूसरों के कल्याण में निहित है**। स्वार्थ के लिए जीना सामान्य बात है, परन्तु **जो दूसरों के जीवन को भी समृद्ध और सुखी बनाता है**, वही वास्तव में **महान और सार्थक जीवन जीता है**।

चातक की प्रतीक्षा – श्लोक व्याख्या
चातक धूमसमूहं दृष्ट्वा मा धाव वारिधर बुद्ध्या ।
इह हि भविष्यति भवतः नयनयुगादेव वारिणां पूरः ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • चातक – The Chataka bird / चातक पक्षी
  • धूमसमूहं – A mass of smoke / धुएँ का समूह
  • दृष्ट्वा – Seeing / देखकर
  • मा धाव – Do not run / मत दौड़ो
  • वारिधर बुद्ध्या – Thinking it to be a cloud / उसे मेघ समझकर
  • इह – Here / यहाँ
  • हि – Indeed / वास्तव में
  • भविष्यति – Will happen / होगा
  • भवतः – Your / तुम्हारे
  • नयनयुगात् – From your pair of eyes / तुम्हारी दोनों आँखों से
  • एव – Indeed / ही
  • वारिणां पूरः – A flood of water / जल की धारा
हिन्दी अर्थ

हे चातक! **धुएँ के समूह को मेघ समझकर उसकी ओर मत दौड़ो**। क्योंकि यहाँ तो **तुम्हारी आँखों से ही आँसुओं का जलप्रवाह होने वाला है**। अर्थात् कभी-कभी आशा में किया गया भ्रम **निराशा और दुःख का कारण बन जाता है**।

English Meaning

O Chataka bird! **Do not rush towards the mass of smoke thinking it to be a rain cloud**. For here, **a flood of water will flow from your own eyes (tears)**. This verse symbolizes how **mistaking illusion for hope often leads to disappointment and sorrow**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक हमें सिखाता है कि **हर चमकती या दिखने वाली वस्तु वास्तविक नहीं होती**। अज्ञान या भ्रम के कारण मनुष्य **मिथ्या आशाओं के पीछे दौड़ता है**, जिससे अंततः **निराशा और दुःख उत्पन्न होता है**।

वाणी और बाण का सामर्थ्य – श्लोक व्याख्या
जाता शिखण्डिनी प्राक् यथा शिखण्डि तथावगच्छामि ।
प्रागल्भ्यमधिकमाप्तुं वाणी बाणो बभूवेति ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • जाता – Was born / जन्म हुआ
  • शिखण्डिनी – Shikhandini (female form of Shikhandi) / शिखण्डिनी
  • प्राक् – Formerly / पहले
  • यथा – As / जैसे
  • शिखण्डि – Shikhandi / शिखण्डी
  • तथा – Similarly / वैसे ही
  • अवगच्छामि – I understand / मैं समझता हूँ
  • प्रागल्भ्यम् – Boldness / साहस, निर्भीकता
  • अधिकम् – Greater / अधिक
  • आप्तुम् – To obtain / प्राप्त करने के लिए
  • वाणी – Speech / वाणी
  • बाणः – Arrow / बाण
  • बभूव – Became / बन गई
हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार **शिखण्डिनी पहले स्त्री थी और बाद में शिखण्डी बनी**, उसी प्रकार मैं समझता हूँ कि **अधिक प्रभाव और साहस प्राप्त करने के लिए वाणी बाण के समान हो जाती है**। अर्थात् शब्दों में भी उतनी ही शक्ति हो सकती है जितनी **तीर में होती है**।

English Meaning

Just as **Shikhandini was once a woman and later became Shikhandi**, similarly it is understood that **speech, in order to gain greater force and boldness, becomes like an arrow**. In other words, **words can possess the same powerful impact as arrows**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक बताता है कि **वाणी अत्यंत शक्तिशाली होती है**। सही समय और सही शब्द **मनुष्य के विचारों को तीक्ष्ण और प्रभावशाली बना देते हैं**, जैसे **बाण लक्ष्य को भेदता है**, वैसे ही **वाणी हृदय और बुद्धि को प्रभावित करती है**।

श्रीराम वन्दना – श्लोक व्याख्या
दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा ।
पुरतः मारुतिः यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • दक्षिणे – On the right side / दाहिनी ओर
  • लक्ष्मणः – Lakshmana / लक्ष्मण
  • यस्य – Of whom / जिसके
  • वामे – On the left side / बायीं ओर
  • जनकात्मजा – Daughter of King Janaka (Sita) / जनक की पुत्री सीता
  • पुरतः – In front / सामने
  • मारुतिः – Son of the wind (Hanuman) / हनुमान
  • तं – That / उस
  • वन्दे – I bow / मैं वंदन करता हूँ
  • रघुनन्दनम् – Son of the Raghu dynasty (Lord Rama) / रघुवंश के नन्दन श्रीराम
हिन्दी अर्थ

जिनके **दाहिने ओर लक्ष्मण**, **बायीं ओर जनकनंदिनी सीता**, और **सामने पवनपुत्र हनुमान** उपस्थित हैं, ऐसे **रघुवंश के नन्दन भगवान श्रीराम को मैं प्रणाम करता हूँ**।

English Meaning

I bow to **Lord Rama**, the son of the Raghu dynasty, who has **Lakshmana on his right side**, **Sita (daughter of Janaka) on his left**, and **Hanuman, the son of the wind god, standing before him**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक **भगवान श्रीराम के दिव्य दरबार का चित्रण** करता है। यह हमें **भक्ति, सेवा, प्रेम और आदर्श संबंधों** का संदेश देता है— जहाँ **सीता प्रेम और धर्म का प्रतीक हैं, लक्ष्मण सेवा और समर्पण का, और हनुमान भक्तिभाव का**।

धन का सदुपयोग – श्लोक व्याख्या
दातव्यं भोक्तव्यं धनविषये संचयः न कर्तव्यः ।
पश्य इह मधुकरीणां संचितार्थं हरन्ति अन्ये ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • दातव्यम् – Should be given / दान देना चाहिए
  • भोक्तव्यम् – Should be enjoyed / उपयोग करना चाहिए
  • धनविषये – Regarding wealth / धन के विषय में
  • संचयः – Hoarding / संग्रह
  • न कर्तव्यः – Should not be done / नहीं करना चाहिए
  • पश्य – See / देखो
  • इह – Here / यहाँ
  • मधुकरीणाम् – Of bees / मधुमक्खियों का
  • संचितार्थम् – Stored wealth (honey) / संचित धन (मधु)
  • हरन्ति – Take away / ले जाते हैं
  • अन्ये – Others / दूसरे लोग
हिन्दी अर्थ

धन के विषय में **दान करना और उसका उचित उपभोग करना चाहिए**, केवल **संग्रह करते रहना उचित नहीं है**। देखो, **मधुमक्खियाँ परिश्रम से मधु इकट्ठा करती हैं**, लेकिन अंत में **कोई दूसरा व्यक्ति उसे ले जाता है**।

English Meaning

In matters of wealth, one should **give charity and also enjoy it properly**, but **mere hoarding should not be done**. Observe how **bees collect honey with great effort**, yet in the end **others come and take it away**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक सिखाता है कि **धन का उद्देश्य केवल संग्रह करना नहीं है**। धन का सही उपयोग **दान, परोपकार और जीवन के संतुलित उपभोग** में है। अत्यधिक संग्रह अंततः **व्यर्थ सिद्ध हो सकता है**, जैसे मधुमक्खियों का संचित मधु।

धन और सामाजिक संबंध – श्लोक व्याख्या
त्यजन्ति मित्राणि धनैर्विहीनं दाराश्च पुत्राश्च सुहृज्जनाश्च ।
तं अर्थवन्तं पुनराश्रयन्ति अर्थो हि लोके पुरुषस्य बन्धुः ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • त्यजन्ति – Abandon / छोड़ देते हैं
  • मित्राणि – Friends / मित्र
  • धनैः विहीनम् – One who is without wealth / धन से रहित व्यक्ति
  • दाराः – Wife / पत्नी
  • पुत्राः – Sons / पुत्र
  • सुहृज्जनाः – Well-wishers / मित्र और संबंधी
  • तं – Him / उसे
  • अर्थवन्तम् – One who has wealth / धनवान
  • पुनः आश्रयन्ति – Again take refuge / फिर से सहारा लेते हैं
  • अर्थः – Wealth / धन
  • हि – Indeed / वास्तव में
  • लोके – In the world / संसार में
  • पुरुषस्य – Of a person / मनुष्य का
  • बन्धुः – Relative / सच्चा साथी
हिन्दी अर्थ

जब मनुष्य **धनहीन हो जाता है**, तब उसके **मित्र, पत्नी, पुत्र और संबंधी भी उसे छोड़ देते हैं**। लेकिन जब वही व्यक्ति **फिर से धनवान बन जाता है**, तो वे लोग **फिर से उसके पास लौट आते हैं**। इसलिए कहा गया है कि संसार में **धन ही मनुष्य का सच्चा साथी माना जाता है**।

English Meaning

When a person **loses his wealth**, his **friends, wife, children, and relatives abandon him**. But when he **regains wealth**, they **return to him again**. Thus, it is said that **in this world, wealth often becomes a person's true companion**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक संसार की **व्यावहारिक और कभी-कभी कठोर वास्तविकता** को दर्शाता है। अनेक संबंध **धन और स्वार्थ पर आधारित होते हैं**। इससे यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को **सच्चे संबंधों और चरित्र के मूल्य को समझना चाहिए**, क्योंकि केवल धन पर आधारित संबंध स्थायी नहीं होते।

याचना की लघुता – श्लोक व्याख्या
तृणादपि लघुस्तूलस्तूलादपि च याचकः ।
वायुना किं न नीतोऽसौ मामयं प्रार्थयेदिति ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • तृणात् अपि – Even lighter than grass / तिनके से भी
  • लघुः – Light, insignificant / हल्का, तुच्छ
  • स्तूलः – Cotton / रूई
  • स्तूलात् अपि – Even lighter than cotton / रूई से भी
  • याचकः – Beggar / याचक
  • वायुना – By the wind / हवा द्वारा
  • किं न नीतः – Why was he not carried away / क्यों नहीं उड़ा दिया गया
  • असौ – That / वह
  • माम् – Me / मुझे
  • अयम् – This person / यह व्यक्ति
  • प्रार्थयेत् – May request / याचना करे
  • इति – Thus / ऐसा सोचकर
हिन्दी अर्थ

तिनका रूई से भी हल्का होता है, और **रूई से भी अधिक हल्का याचक (भीख माँगने वाला)** माना गया है। शायद इसी कारण **वायु उसे नहीं उड़ाती**, क्योंकि वह सोचती होगी कि “कहीं यह व्यक्ति **मुझसे भी कुछ माँग न बैठे**!”

English Meaning

Grass is lighter than many things, and **cotton is even lighter**, but a **beggar is considered lighter than cotton**. Perhaps that is why **the wind does not carry him away**, thinking that **he might ask something from it as well**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक **याचना की प्रवृत्ति पर व्यंग्य** करता है। अत्यधिक याचना मनुष्य की **गरिमा और आत्मसम्मान को कम कर देती है**। इसलिए जीवन में **स्वावलंबन, परिश्रम और आत्मसम्मान** को महत्व देना चाहिए।

वसुधैव कुटुम्बकम् – श्लोक व्याख्या
अयं निजः परो वा इति गणना लघुचेतसाम् ।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • अयम् – This / यह
  • निजः – One’s own / अपना
  • परः – Another, stranger / पराया
  • वा – Or / या
  • इति – Thus / ऐसा
  • गणना – Calculation, thinking / विचार, गणना
  • लघुचेतसाम् – Of narrow-minded people / संकीर्ण बुद्धि वालों की
  • उदारचरितानाम् – Of noble-hearted people / उदार चरित्र वाले लोगों की
  • तु – But / परन्तु
  • वसुधा – The earth / पृथ्वी
  • एव – Indeed / ही
  • कुटुम्बकम् – Family / परिवार
हिन्दी अर्थ

“यह मेरा है और वह पराया है” – ऐसा विचार **संकीर्ण बुद्धि वाले लोगों का होता है**। परन्तु **उदार चरित्र वाले लोगों के लिए पूरी पृथ्वी ही परिवार के समान होती है**।

English Meaning

“This person is mine and that one is a stranger” – such thinking belongs to **narrow-minded people**. But for **noble and broad-minded individuals, the whole world is one family**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक **मानवता और वैश्विक भाईचारे का महान संदेश** देता है। उदार हृदय वाले लोग **जाति, देश, भाषा या धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर** समस्त मानवता को **एक ही परिवार के रूप में देखते हैं**। इसी आदर्श को **“वसुधैव कुटुम्बकम्”** कहा जाता है।

अतिपरिचयादवज्ञा – श्लोक व्याख्या
अतिपरिचयादवज्ञा सन्ततगमनादनादरो भवति ।
मलये भिल्लपुरन्ध्री चन्दनतरुकाष्ठमिन्धनं कुरुते ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • अतिपरिचयात् – Too much familiarity / अत्यधिक परिचय से
  • अवज्ञा – Disrespect / अवमान
  • सन्ततगमनात् – Frequent visiting / बार-बार आने-जाने से
  • अनादरः – Lack of respect / आदर का अभाव
  • भवति – Happens / हो जाता है
  • मलये – In the Malaya mountain / मलय पर्वत में
  • भिल्लपुरन्ध्री – Tribal woman / भील स्त्री
  • चन्दनतरुकाष्ठम् – Sandalwood tree wood / चन्दन वृक्ष की लकड़ी
  • इन्धनं – Fuel / ईंधन
  • कुरुते – Makes / बना लेती है
हिन्दी अर्थ

अत्यधिक परिचय से **अवमान उत्पन्न हो जाता है**, और बार-बार आने-जाने से **आदर कम हो जाता है**। जैसे **मलय पर्वत में रहने वाली भील स्त्री चन्दन के वृक्ष की लकड़ी को भी ईंधन के रूप में जला देती है**।

English Meaning

Too much familiarity leads to **disrespect**, and frequent visits often reduce **honor and regard**. Just as a **tribal woman in the Malaya mountains uses sandalwood as ordinary fuel**, because its great value is not appreciated due to constant familiarity.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक बताता है कि **अत्यधिक निकटता या उपलब्धता से मूल्य कम हो जाता है**। जब कोई वस्तु या व्यक्ति हमेशा उपलब्ध रहता है, तो लोग उसके महत्व को भूल जाते हैं। इसलिए जीवन में **मर्यादा, संतुलन और उचित दूरी** भी आवश्यक होती है।

वृक्ष और सत्पुरुष – श्लोक व्याख्या
छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयं आतपे ।
फलानि अपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • छायाम् – Shade / छाया
  • अन्यस्य – For others / दूसरों के लिए
  • कुर्वन्ति – They provide / प्रदान करते हैं
  • तिष्ठन्ति – They stand / खड़े रहते हैं
  • स्वयम् – Themselves / स्वयं
  • आतपे – In the heat of the sun / धूप में
  • फलानि – Fruits / फल
  • अपि – Also / भी
  • परार्थाय – For the benefit of others / दूसरों के हित के लिए
  • वृक्षाः – Trees / वृक्ष
  • सत्पुरुषाः – Noble persons / सज्जन पुरुष
  • इव – Like / के समान
हिन्दी अर्थ

वृक्ष स्वयं **धूप में खड़े रहते हैं**, लेकिन **दूसरों को छाया प्रदान करते हैं**। वे अपने **फल भी दूसरों के हित के लिए देते हैं**। इसी प्रकार **सत्पुरुष भी अपने जीवन को दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित कर देते हैं**।

English Meaning

Trees **stand in the heat themselves** but **provide shade for others**. They also produce **fruits for the benefit of others**. In the same way, **noble people dedicate their lives to the welfare of others**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक हमें **परोपकार और निःस्वार्थ सेवा** का आदर्श सिखाता है। जैसे वृक्ष बिना किसी अपेक्षा के दूसरों को लाभ देते हैं, वैसे ही **सत्पुरुष अपने जीवन को समाज के कल्याण के लिए समर्पित करते हैं**।

पुत्र पालन की नीति – श्लोक व्याख्या
लालयेत् पंच वर्षाणि दश वर्षाणि ताडयेत् ।
प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रे मित्रवद् आचरेत् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • लालयेत् – Should be loved and cared for / स्नेहपूर्वक पालन करना
  • पंच वर्षाणि – For five years / पाँच वर्ष तक
  • दश वर्षाणि – For ten years / दस वर्ष तक
  • ताडयेत् – Should discipline / अनुशासन करना
  • प्राप्ते – When attained / जब प्राप्त हो
  • तु – But / परन्तु
  • षोडशे वर्षे – At the age of sixteen / सोलह वर्ष की आयु में
  • पुत्रे – The son / पुत्र
  • मित्रवत् – Like a friend / मित्र के समान
  • आचरेत् – Should behave / व्यवहार करना चाहिए
हिन्दी अर्थ

पुत्र को **पहले पाँच वर्षों तक प्रेम और स्नेह से पालना चाहिए**। अगले **दस वर्षों तक उसे अनुशासन और शिक्षा देनी चाहिए**। और जब वह **सोलह वर्ष का हो जाए**, तब उसके साथ **मित्र के समान व्यवहार करना चाहिए**।

English Meaning

A child should be **nurtured with love for the first five years**. For the **next ten years, he should be disciplined and educated**. When he **reaches the age of sixteen**, he should be **treated like a friend**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक **बाल-पालन और शिक्षा की एक संतुलित नीति** प्रस्तुत करता है। जीवन के अलग-अलग चरणों में **प्रेम, अनुशासन और मित्रता** का सही संतुलन ही बच्चे के **संपूर्ण व्यक्तित्व विकास** का आधार बनता है।

वैद्य पर व्यंग्य – श्लोक व्याख्या
वैद्यराज नमस्तुभ्यं यमराज सहोदर ।
यमः हरति प्राणान् वैद्यः प्राणान् धनानि च ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • वैद्यराज – King of physicians / श्रेष्ठ वैद्य
  • नमस्तुभ्यम् – Salutations to you / आपको नमस्कार
  • यमराज – God of death / यमराज
  • सहोदर – Brother / भाई
  • यमः – Yama / यमराज
  • हरति – Takes away / ले जाता है
  • प्राणान् – Life / प्राण
  • वैद्यः – Physician / वैद्य
  • प्राणान् धनानि च – Life and wealth both / प्राण और धन दोनों
हिन्दी अर्थ

हे वैद्यराज! आपको नमस्कार है, आप तो **यमराज के भाई के समान हैं**। क्योंकि **यमराज केवल प्राण ही लेते हैं**, लेकिन **वैद्य प्राण के साथ-साथ धन भी ले लेते हैं**।

English Meaning

O king of physicians! Salutations to you, you seem to be the **brother of Yama, the god of death**. For **Yama takes only life**, but a **physician sometimes takes both life and wealth**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक **हास्य और व्यंग्य के माध्यम से चिकित्सा पर एक टिप्पणी** करता है। यह बताता है कि कभी-कभी **उपचार में अत्यधिक धन खर्च होता है**, जिससे रोगी को आर्थिक कष्ट भी उठाना पड़ता है। हालाँकि इसका उद्देश्य **वैद्य की निंदा नहीं बल्कि व्यंग्यात्मक हास्य** प्रस्तुत करना है।

वैद्य और चिता – श्लोक व्याख्या
चितां प्रज्वलितां दृष्ट्वा वैद्यः विस्मयमागतः ।
नाहं गतः न मयि भ्राता कस्येदं हस्तलाघवम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • चिताम् – Funeral pyre / चिता
  • प्रज्वलिताम् – Burning / प्रज्वलित
  • दृष्ट्वा – Seeing / देखकर
  • वैद्यः – Physician / वैद्य
  • विस्मयम् आगतः – Became surprised / आश्चर्यचकित हो गया
  • न अहम् – Not I / मैं नहीं
  • गतः – Went / गया
  • न मयि भ्राता – Nor my brother / न ही मेरा भाई
  • कस्य – Whose / किसका
  • इदम् – This / यह
  • हस्तलाघवम् – Skill of the hand (treatment) / हाथ की कुशलता
हिन्दी अर्थ

एक वैद्य ने **जलती हुई चिता को देखकर आश्चर्य से कहा** – “यह क्या हुआ? **मैं तो वहाँ गया नहीं और न ही मेरा भाई गया**, फिर यह **किसके हाथ की कुशलता है** जिसके कारण यह चिता जल रही है?”

English Meaning

Seeing a **burning funeral pyre**, the physician became surprised and said: “I did not go there, nor did my brother go there. Then **whose medical skill is responsible for this**?”

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक **हास्य और व्यंग्य के माध्यम से चिकित्सा पर कटाक्ष** करता है। कभी-कभी लोग मजाक में कहते हैं कि **वैद्य के उपचार से रोगी की स्थिति और खराब हो जाती है**। इसलिए यह श्लोक **व्यंग्यात्मक हास्य** के रूप में प्रचलित है।

उद्यम का महत्व – श्लोक व्याख्या
यथा एकेन न हस्तेन तालिका सम्प्रपद्यते ।
तथा उद्यमपरित्यक्तं कर्म न उत्पादयेत् फलम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • यथा – Just as / जैसे
  • एकेन – By one / एक से
  • – Not / नहीं
  • हस्तेन – With a hand / हाथ से
  • तालिका – Clapping sound / ताली
  • सम्प्रपद्यते – Is produced / उत्पन्न होती है
  • तथा – Similarly / उसी प्रकार
  • उद्यम – Effort / प्रयास
  • परित्यक्तम् – Abandoned / छोड़ा हुआ
  • कर्म – Work / कार्य
  • न उत्पादयेत् – Does not produce / उत्पन्न नहीं करता
  • फलम् – Result / फल
हिन्दी अर्थ

जैसे **एक हाथ से ताली नहीं बज सकती**, उसी प्रकार **प्रयास के बिना किया गया कार्य फल उत्पन्न नहीं करता**। सफलता प्राप्त करने के लिए **परिश्रम और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं**।

English Meaning

Just as **a clap cannot be produced with one hand**, similarly **a task abandoned without effort cannot yield results**. Success always requires **hard work and persistent effort**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक **उद्यम (प्रयास) के महत्व** को स्पष्ट करता है। जीवन में किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए **कर्म, परिश्रम और निरंतर प्रयास** अनिवार्य हैं। बिना प्रयास के **कोई भी कार्य सफल नहीं हो सकता**।

अष्टादश पुराणों का सार – श्लोक व्याख्या
अष्टादश पुराणानां सारं व्यासेन कीर्तितम् ।
परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • अष्टादश – Eighteen / अठारह
  • पुराणानाम् – Of the Puranas / पुराणों का
  • सारम् – Essence / सार
  • व्यासेन – By Vyasa / व्यास द्वारा
  • कीर्तितम् – Declared / बताया गया
  • परोपकारः – Helping others / दूसरों का उपकार
  • पुण्याय – For merit / पुण्य के लिए
  • पापाय – For sin / पाप के लिए
  • परपीडनम् – Causing pain to others / दूसरों को पीड़ा देना
हिन्दी अर्थ

महर्षि व्यास ने **अठारह पुराणों का सार** इस प्रकार बताया है— **दूसरों का उपकार करना पुण्य है** और **दूसरों को कष्ट देना पाप है**।

English Meaning

The sage **Vyasa** summarized the essence of the **eighteen Puranas** as follows: **Helping others leads to merit (virtue)**, while **causing suffering to others leads to sin**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक **धर्म और अधर्म का सरल और सार्वभौमिक सिद्धांत** प्रस्तुत करता है। सभी शास्त्रों का सार यही है कि **परोपकार और करुणा धर्म का मार्ग है**, जबकि **दूसरों को कष्ट देना अधर्म और पाप का कारण है**।

जीवन के छह सुख – श्लोक व्याख्या
अर्थागमो नित्यमरोगिता च प्रिया च भार्या प्रियवादिनी च ।
वश्यश्च पुत्रोऽर्थकारी च विद्या षड् जीवलोकस्य सुखानि राजन् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • अर्थागमः – Earning of wealth / धन की प्राप्ति
  • नित्यम् – Constant / निरंतर
  • अरोगिता – Good health / निरोगी होना
  • प्रिया भार्या – Beloved wife / प्रिय पत्नी
  • प्रियवादिनी – Sweet-speaking / मधुर वाणी बोलने वाली
  • वश्यः पुत्रः – Obedient son / आज्ञाकारी पुत्र
  • अर्थकारी विद्या – Knowledge that brings livelihood / उपयोगी विद्या
  • षट् – Six / छह
  • जीवलोकस्य – For people in the world / संसार के मनुष्यों के लिए
  • सुखानि – Happiness / सुख
  • राजन् – O king / हे राजन्
हिन्दी अर्थ

हे राजन्! संसार में मनुष्यों के लिए **छह प्रकार के सुख** बताए गए हैं— (1) **धन की प्राप्ति**, (2) **निरंतर अच्छा स्वास्थ्य**, (3) **प्रिय और मधुर बोलने वाली पत्नी**, (4) **आज्ञाकारी पुत्र**, (5) **धन अर्जित कराने वाली विद्या**, और (6) **जीवन को सफल बनाने वाला ज्ञान**।

English Meaning

O King, there are **six sources of happiness** in human life: (1) **steady income or wealth**, (2) **good health**, (3) **a loving and sweet-speaking wife**, (4) **an obedient son**, (5) **knowledge that helps earn a livelihood**, and (6) **useful education** that supports life.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक बताता है कि **सुख केवल धन से नहीं मिलता**, बल्कि **स्वास्थ्य, परिवार, और उपयोगी ज्ञान** भी जीवन की समृद्धि के आवश्यक अंग हैं। संतुलित जीवन के लिए **धन, स्वास्थ्य, संबंध और विद्या** चारों का सामंजस्य आवश्यक है।

सज्जन मार्ग का महत्व – श्लोक व्याख्या
अकृत्वा परसन्तापं अगत्वा खलमन्दिरम् ।
साधोर्मार्गमनुसृत्य यत् स्वल्पमपि तद् बहु ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • अकृत्वा – Without doing / किए बिना
  • परसन्तापम् – Causing pain to others / दूसरों को कष्ट देना
  • अगत्वा – Without going / गए बिना
  • खलमन्दिरम् – House of wicked people / दुष्टों का स्थान
  • साधोः मार्गम् – Path of the virtuous / सज्जनों का मार्ग
  • अनुसृत्य – Following / अनुसरण करके
  • यत् – Whatever / जो
  • स्वल्पम् अपि – Even little / थोड़ा सा भी
  • तत् बहु – That becomes great / वह बहुत हो जाता है
हिन्दी अर्थ

दूसरों को कष्ट दिए बिना, दुष्टों की संगति से दूर रहकर और **सज्जनों के मार्ग का अनुसरण करके** जो थोड़ी सी भी प्राप्ति होती है, वह वास्तव में **बहुत बड़ी और मूल्यवान होती है**।

English Meaning

Without causing suffering to others, without visiting the houses of the wicked, and by following the **path of the virtuous**, whatever little one gains becomes **truly great and valuable**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक सिखाता है कि **सच्ची समृद्धि और सफलता नैतिक मार्ग से ही प्राप्त होती है**। दुष्टों की संगति और दूसरों को कष्ट देकर प्राप्त की गई बड़ी सफलता भी व्यर्थ है, जबकि **सज्जन मार्ग से प्राप्त थोड़ी उपलब्धि भी महान मानी जाती है**।

मनुष्य की परीक्षा – श्लोक व्याख्या
आपदि मित्रपरीक्षा शूरपरीक्षा रणाङ्गणे भवति ।
विनये वंशपरीक्षा शीलपरीक्षा धनक्षये भवति ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • आपदि – In adversity / विपत्ति में
  • मित्र परीक्षा – Test of a friend / मित्र की परीक्षा
  • शूर परीक्षा – Test of bravery / वीरता की परीक्षा
  • रणाङ्गणे – In the battlefield / युद्धभूमि में
  • विनये – In humility / विनम्रता में
  • वंश परीक्षा – Test of noble lineage / कुल या वंश की परीक्षा
  • शील परीक्षा – Test of character / चरित्र की परीक्षा
  • धन क्षये – When wealth is lost / धन के नष्ट होने पर
हिन्दी अर्थ

**विपत्ति के समय मित्र की परीक्षा होती है**, **युद्धभूमि में वीर की परीक्षा होती है**, **विनम्रता से कुल या वंश की पहचान होती है**, और **धन के नष्ट होने पर मनुष्य के चरित्र की परीक्षा होती है**।

English Meaning

A **friend is tested in adversity**, a **brave person is tested on the battlefield**, a **person’s noble lineage is known through humility**, and **one’s character is tested when wealth is lost**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक बताता है कि **मनुष्य का वास्तविक स्वरूप कठिन परिस्थितियों में प्रकट होता है**। विपत्ति, युद्ध, विनम्रता और धन का अभाव—ये सभी परिस्थितियाँ मनुष्य के **मित्रता, साहस, कुलीनता और चरित्र** की सच्ची परीक्षा लेती हैं।

विद्वान् का महत्व – श्लोक व्याख्या
विद्वत्त्वं च नृपत्वं च न एव तुल्ये कदाचन ।
स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • विद्वत्त्वम् – Scholarship / विद्वत्ता, ज्ञान
  • नृपत्वम् – Kingship / राजत्व
  • न एव तुल्ये – Not equal / समान नहीं
  • कदाचन – Ever / कभी भी
  • स्वदेशे – In one’s own country / अपने देश में
  • पूज्यते – Is respected / सम्मानित होता है
  • राजा – King / राजा
  • विद्वान् – Learned person / विद्वान
  • सर्वत्र – Everywhere / सर्वत्र
हिन्दी अर्थ

**विद्वत्ता और राजत्व कभी भी समान नहीं होते।** राजा का सम्मान केवल **अपने देश में** होता है, लेकिन **विद्वान व्यक्ति का सम्मान पूरे संसार में** होता है।

English Meaning

Scholarship and kingship are **never equal**. A **king is respected only in his own country**, but a **learned person is respected everywhere in the world**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक बताता है कि **ज्ञान और विद्या की महिमा राजसत्ता से भी अधिक होती है**। राज्य की सीमा होती है, लेकिन **ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती**। इसी कारण **विद्वान का सम्मान पूरे विश्व में होता है**।

कृषक परिश्रम का महत्त्व – श्लोक व्याख्या
गणयन्ति न ये सूर्यं वृष्टिं शीतं च कर्षकाः ।
यतन्ते सस्यलाभाय तैः साकं हि वसामि अहम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • गणयन्ति न – Do not count / ध्यान नहीं देते
  • सूर्यम् – The heat of the sun / सूर्य की तपन
  • वृष्टिम् – Rain / वर्षा
  • शीतम् – Cold / ठंड
  • कर्षकाः – Farmers / किसान
  • यतन्ते – Strive, make effort / प्रयास करते हैं
  • सस्यलाभाय – For obtaining crops / फसल प्राप्त करने के लिए
  • तैः साकम् – With them / उनके साथ
  • हि – Indeed / वास्तव में
  • वसामि अहम् – I reside / मैं निवास करता हूँ
हिन्दी अर्थ

जो किसान **सूर्य की तपन, वर्षा और ठंड की परवाह किए बिना** फसल प्राप्त करने के लिए निरंतर परिश्रम करते हैं, **मैं उन्हीं के साथ निवास करता हूँ**।

English Meaning

Farmers who **do not care about the scorching sun, rain, or cold** and constantly strive to obtain crops— **I dwell with such hardworking people**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक **परिश्रम और कर्म की महिमा** को दर्शाता है। जो लोग कठिन परिस्थितियों की परवाह किए बिना अपने कार्य में लगे रहते हैं, **ईश्वर की कृपा और सफलता उन्हीं के साथ होती है**।

मूर्ख के पाँच लक्षण – श्लोक व्याख्या
मूर्खस्य पञ्च चिह्नानि गर्वो दुर्वचनं तथा ।
क्रोधश्च दृढवादश्च परवाक्येष्वनादरः ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • मूर्खस्य – Of a foolish person / मूर्ख व्यक्ति के
  • पञ्च चिह्नानि – Five signs / पाँच लक्षण
  • गर्वः – Pride / अहंकार
  • दुर्वचनम् – Harsh speech / कठोर वचन
  • क्रोधः – Anger / क्रोध
  • दृढवादः – Stubborn argument / हठपूर्वक बोलना
  • परवाक्येषु – In others' words / दूसरों की बातों में
  • अनादरः – Disrespect / अनादर करना
हिन्दी अर्थ

मूर्ख व्यक्ति के **पाँच लक्षण** बताए गए हैं— अहंकार, कठोर वचन बोलना, क्रोध, हठपूर्वक अपनी बात पर अड़े रहना, और दूसरों की बातों का अनादर करना

English Meaning

Five signs of a foolish person are described here: pride, harsh speech, anger, stubborn insistence on one's own views, and disrespect for the words of others.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक बताता है कि मूर्खता केवल ज्ञान की कमी नहीं है, बल्कि **अहंकार, क्रोध और दूसरों की बात न सुनना** भी उसका लक्षण है। विवेकशील व्यक्ति **विनम्र, संयमी और दूसरों की बातों का सम्मान करने वाला** होता है।

अष्टौ गुणाः – श्रेष्ठ पुरुष के आठ गुण
अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा सुशीलत्वदमौ श्रुतं च ।
पराक्रमश्च अबहुभाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • अष्टौ गुणाः – Eight qualities / आठ गुण
  • पुरुषं दीपयन्ति – Illuminate a person / व्यक्ति को प्रकाशित करते हैं
  • प्रज्ञा – Wisdom / बुद्धि
  • सुशीलत्वम् – Good character / अच्छा स्वभाव
  • दमः – Self-control / इन्द्रिय संयम
  • श्रुतम् – Learning / शास्त्र ज्ञान
  • पराक्रमः – Courage and valor / पराक्रम
  • अबहुभाषिता – Not talking excessively / कम बोलना
  • दानम् – Charity / दान
  • यथाशक्ति – According to one's ability / अपनी क्षमता के अनुसार
  • कृतज्ञता – Gratitude / कृतज्ञता
हिन्दी अर्थ

मनुष्य को महान और तेजस्वी बनाने वाले **आठ गुण** हैं — बुद्धि, अच्छा स्वभाव, इन्द्रिय संयम, ज्ञान, पराक्रम, कम बोलना, अपनी शक्ति के अनुसार दान करना और कृतज्ञता। ये गुण व्यक्ति के चरित्र को प्रकाशित करते हैं और उसे समाज में सम्मान दिलाते हैं।

English Meaning

Eight qualities illuminate a person: wisdom, good character, self-control, learning, courage, speaking little, charity according to one's ability, and gratitude. These virtues make a person noble and respected in society.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक बताता है कि **सच्ची महानता बाहरी पद या धन से नहीं, बल्कि गुणों से आती है**। जो व्यक्ति बुद्धिमान, संयमी, साहसी और कृतज्ञ होता है, वही वास्तव में **समाज को प्रकाश देने वाला व्यक्तित्व** बनता है।

लोभ और वश में करने का स्वभाव – श्लोक व्याख्या
कः न याति वशं लोके मुखं पिण्डेन पूरितः ।
मृदंगः मुखलेपेन करोति मधुरं ध्वनिम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • कः न – Who does not / कौन नहीं
  • याति वशं – Comes under control / वश में हो जाता है
  • लोके – In the world / संसार में
  • मुखं – Mouth / मुख
  • पिण्डेन – With a lump of food / भोजन के ग्रास से
  • पूरितः – Filled / भरा हुआ
  • मृदंगः – Mridang drum / मृदंग
  • मुखलेपेन – By coating the surface / मुख पर लेप करने से
  • करोति – Produces / करता है
  • मधुरं ध्वनिम् – Sweet sound / मधुर ध्वनि
हिन्दी अर्थ

इस संसार में ऐसा कौन है जो **लाभ या भोजन मिलने पर वश में न हो जाए**। जैसे **मृदंग के मुख पर लेप करने से वह मधुर ध्वनि उत्पन्न करता है**, वैसे ही मनुष्य भी लाभ मिलने पर प्रसन्न होकर दूसरों के वश में हो जाता है।

English Meaning

Who in this world does not come under control when his **mouth is filled with food or benefit**? Just as a **mridang drum produces sweet sound when its surface is coated**, similarly people often become agreeable or submissive when they receive benefits.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक मानव स्वभाव को दर्शाता है कि **लोभ और लाभ मनुष्य को प्रभावित कर देते हैं**। इसलिए विवेकशील व्यक्ति को चाहिए कि वह **लोभ से प्रभावित हुए बिना सत्य और धर्म का पालन करे**।

ऐक्यं बलं समाजस्य – श्लोक व्याख्या
ऐक्यं बलं समाजस्य तदभावे स दुर्बलः ।
तस्मात् ऐक्यं प्रशंसन्ति दृढं राष्ट्रहितैषिणः ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • ऐक्यम् – Unity / एकता
  • बलम् – Strength / शक्ति
  • समाजस्य – Of society / समाज का
  • तदभावे – In its absence / उसके अभाव में
  • सः – It / वह
  • दुर्बलः – Weak / दुर्बल
  • तस्मात् – Therefore / इसलिए
  • ऐक्यम् प्रशंसन्ति – Praise unity / एकता की प्रशंसा करते हैं
  • दृढम् – Firmly / दृढ़ रूप से
  • राष्ट्रहितैषिणः – Well-wishers of the nation / राष्ट्र का हित चाहने वाले
हिन्दी अर्थ

एकता ही समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। जब समाज में एकता नहीं होती, तब वह दुर्बल हो जाता है। इसी कारण जो लोग राष्ट्र के हितैषी होते हैं, वे सदैव दृढ़ एकता की प्रशंसा और स्थापना करते हैं।

English Meaning

Unity is the strength of society. In its absence, society becomes weak. Therefore, those who truly wish for the welfare of the nation always praise and promote strong unity.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक सिखाता है कि **समाज और राष्ट्र की उन्नति का आधार एकता है**। जब लोग मिलकर कार्य करते हैं, तब वे बड़ी से बड़ी कठिनाइयों को भी पार कर सकते हैं। विभाजन और मतभेद समाज को दुर्बल बनाते हैं, जबकि **संगठन और सहयोग समाज को शक्तिशाली बनाते हैं**।

श्रीकृष्णलीलामृतम् – श्लोक व्याख्या
आदौ देवकीदेवगर्भजननं गोपीगृहे वर्धनं
मायापूतनजीवितापहरणं गोवर्धनोद्धारणम् ।
कंसच्छेदनकौरवादिहननं कुन्तीतनूजावनं
एतद्भागवतं पुराणकथितं श्रीकृष्णलीलामृतम् ॥१६॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • आदौ – In the beginning / प्रारम्भ में
  • देवकीदेवगर्भजननम् – Birth from the womb of Devaki / देवकी के गर्भ से जन्म
  • गोपीगृहे वर्धनम् – Raised in the house of Gopis / गोपियों के घर में पालन-पोषण
  • मायापूतनजीवितापहरणम् – Slaying of the demoness Putana / पूतना का वध
  • गोवर्धनोद्धारणम् – Lifting of Govardhan mountain / गोवर्धन पर्वत उठाना
  • कंसच्छेदनम् – Killing of Kansa / कंस का वध
  • कौरवादिहननम् – Destruction of the Kauravas and evil forces / कौरव आदि का विनाश
  • कुन्तीतनूजावनम् – Protection of the sons of Kunti (Pandavas) / पाण्डवों की रक्षा
  • एतत् – This / यह
  • भागवतम् पुराणकथितम् – Described in the Bhagavata Purana / भागवत पुराण में वर्णित
  • श्रीकृष्णलीलामृतम् – The nectar of Krishna’s divine pastimes / श्रीकृष्ण की लीलाओं का अमृत
हिन्दी अर्थ

प्रारम्भ में देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म, फिर गोपियों के घर में उनका पालन-पोषण, इसके बाद माया रूपी पूतना का वध और गोवर्धन पर्वत को उठाना। फिर कंस का वध, कौरव आदि दुष्टों का नाश और कुंती के पुत्रों (पाण्डवों) की रक्षा। इन सब घटनाओं का वर्णन भागवत पुराण में श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं के अमृत के रूप में किया गया है।

English Meaning

First, the birth of Lord Krishna from Devaki, then his childhood upbringing in the homes of the Gopis. After that, the slaying of the demoness Putana and the lifting of Govardhan mountain. Later, the killing of Kansa, the destruction of the Kauravas and other evil forces, and the protection of the sons of Kunti (the Pandavas). All these events together form the nectar of Krishna’s divine pastimes as narrated in the Bhagavata Purana.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक श्रीकृष्ण के सम्पूर्ण जीवन की प्रमुख लीलाओं का संक्षिप्त सार प्रस्तुत करता है। भगवान श्रीकृष्ण का अवतार केवल लीला के लिए नहीं बल्कि धर्म की स्थापना, अधर्म का नाश और भक्तों की रक्षा के लिए हुआ। इस प्रकार श्रीकृष्ण की कथा मनुष्य को भक्ति, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

गर्वाय परपीडायै – श्लोक व्याख्या
गर्वाय परपीडायै दुर्जनस्य धनं बलम् ।
सुजनस्य तु दानाय रक्षणाय च ते सदा ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • गर्वाय – For arrogance / गर्व के लिए
  • परपीडायै – For harming others / परपीड़ा करने के लिए
  • दुर्जनस्य – Of evil people / दुराचारी, दुर्जन
  • धनं बलम् – Wealth and power / धन और शक्ति
  • सुजनस्य – Of virtuous people / सज्जन व्यक्ति
  • दानाय – For charity / दान करने के लिए
  • रक्षणाय – For protection / रक्षा के लिए
  • च ते सदा – These are always / ये हमेशा होते हैं
हिन्दी अर्थ

दुर्जनों के पास धन और शक्ति अक्सर अहंकार और परपीड़ा करने के लिए होती है। सज्जनों के पास धन और शक्ति दान देने और दूसरों की रक्षा करने के लिए होती है। इस प्रकार, धन और शक्ति का उपयोग व्यक्ति के स्वभाव और उद्देश्य के अनुसार भिन्न होता है।

English Meaning

The wealth and power of the wicked are often used for arrogance and harming others. The wealth and power of virtuous people are used for charity and protection of others. Thus, the purpose of wealth and power depends on the nature and intent of the individual.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक हमें सिखाता है कि धन और शक्ति अपने आप में कोई पुण्य या पाप नहीं है; इनका मूल्य उनके उपयोग में निहित है। सज्जन अपने संसाधनों का उपयोग भलाई, दया और रक्षा के लिए करते हैं, जबकि असज्जन इन्हें अहंकार और अन्याय के लिए खर्च करते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि साधन और नैतिकता का संतुलन जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

गुरुः बन्धुः अबन्धूनां – श्लोक व्याख्या
गुरुः बन्धुः अबन्धूनां गुरुः चक्षुः अचक्षुषाम् ।
गुरुः पिता च माता च सर्वेषां न्यायवर्तिनाम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • गुरुः – Teacher / गुरु
  • बन्धुः – Relative, friend / बन्धु, सहायक
  • अबन्धूनाम् – Of those who have no relatives / जिनका कोई बन्धु नहीं
  • चक्षुः – Eye, guide / आँख, मार्गदर्शक
  • अचक्षुषाम् – Of the blind / जो अज्ञान या दृष्टि से रहित हैं
  • पिता – Father / पिता
  • माता – Mother / माता
  • सर्वेषाम् – Of all / सबके लिए
  • न्यायवर्तिनाम् – Those who follow the path of righteousness / जो धर्म और न्याय के मार्ग पर चलते हैं
हिन्दी अर्थ

जिसके पास कोई सहारा नहीं होता, उसके लिए गुरु ही बन्धु (सहायक) होते हैं। जो अज्ञान के कारण अंधकार में हैं, उनके लिए गुरु ही आँख के समान मार्गदर्शक होते हैं। गुरु ही अपने शिष्यों के लिए पिता और माता के समान होते हैं, और वे उन सभी लोगों के लिए मार्गदर्शक हैं जो न्याय और धर्म के मार्ग पर चलना चाहते हैं

English Meaning

For those who have no relatives, the Guru is their true companion. For those who are blind in knowledge, the Guru acts as their guiding eye. The Guru is like a father and mother to the disciples and a guide for all who walk on the path of righteousness and justice.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक गुरु के महत्व को दर्शाता है। गुरु केवल ज्ञान देने वाला शिक्षक ही नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शक, संरक्षक और प्रेरणा स्रोत होता है। गुरु अज्ञान के अंधकार को दूर कर सत्य, ज्ञान और धर्म का मार्ग दिखाते हैं। इसलिए भारतीय परम्परा में गुरु को माता-पिता के समान सम्मान दिया गया है।

अम्बा यस्य उमादेवी – श्लोक व्याख्या
अम्बा यस्य उमादेवी जनकः यस्य शंकरः ।
विद्यां ददाति सर्वेभ्यः स नः पातु गजाननः ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • अम्बा – Mother Goddess / माता देवी
  • यस्य – Whose / जिसके
  • उमादेवी – Goddess Uma (Parvati) / देवी उमा, पार्वती
  • जनकः – Father / पिता
  • शंकरः – Lord Shiva / भगवान शंकर
  • विद्यां ददाति – Bestows knowledge / ज्ञान प्रदान करता है
  • सर्वेभ्यः – To all / सभी को
  • स नः पातु – May protect us / वह हमारी रक्षा करें
  • गजाननः – Lord Ganesha / गजानन, भगवान गणेश
हिन्दी अर्थ

जिसके माता-पिता उमा देवी और भगवान शंकर हैं, वह सर्वेभ्यः ज्ञान प्रदान करता है। भगवान गजानन हम सभी की रक्षा करें और हमें बुद्धि और विद्या की प्राप्ति करें।

English Meaning

The one whose parents are Goddess Uma and Lord Shiva, bestows knowledge to all beings. May Lord Ganesha protect us and grant us wisdom and learning.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक गणेश जी के महत्त्व और उनके ज्ञानप्रदायक स्वरूप को दर्शाता है। गणेश विद्या और बुद्धि के देवता हैं, और वे शिष्यों को ज्ञान, सुरक्षा और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह हमें सिखाता है कि ज्ञान की प्राप्ति और सुरक्षा हेतु ईश्वर का आशीर्वाद आवश्यक है

गौरवं प्राप्यते दानात् – श्लोक व्याख्या
गौरवं प्राप्यते दानात् न तु वित्तस्य संचयात् ।
स्थितिः उच्चैः पयोदानां पयोधीनां अधः स्थितिः ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • गौरवं – Respect / सम्मान
  • प्राप्यते – Is attained / प्राप्त होता है
  • दानात् – Through charity / दान द्वारा
  • न तु – Not / नहीं
  • वित्तस्य संचयात् – By accumulation of wealth / धन के संचय से
  • स्थितिः – Level, position / स्थिति
  • उच्चैः पयोदानां – Top of milk containers / दूध की ऊपरी सतह
  • पयोधीनां अधः स्थितिः – The bottom position in milk containers / दूध की नीचली सतह
हिन्दी अर्थ

सम्मान और गौरव धन के संचय से नहीं बल्कि दान और परोपकार से प्राप्त होते हैं। जैसे दूध के ऊपरी हिस्से को सम्मान और उच्चता प्राप्त होती है, नीचे खड़ा होने वाला दूध भी महत्वपूर्ण है, लेकिन दृष्टि में कम रहता है। अर्थात, सच्ची प्रतिष्ठा दान और पुण्य कार्यों से होती है, न कि केवल धन से

English Meaning

Respect and honor are attained through charity and good deeds, not merely by accumulating wealth. Just as the cream rises to the top of milk, giving it prominence, true stature in society is achieved through generosity and righteous actions, not through material accumulation.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक समाज में सच्चे गौरव और प्रतिष्ठा की मूल भावना को स्पष्ट करता है। धन केवल भौतिक सुरक्षा देता है, परन्तु सम्मान और आदर सद्गुण और दानशीलता से आता है। सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से, व्यक्ति की महानता उसके आचार और परोपकार में निहित होती है।

उद्यमः साहसं धैर्यं – श्लोक व्याख्या
उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः ।
षड् एते यत्र वर्तन्ते देवः तत्र सहायकृत् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • उद्यमः – Effort, initiative / प्रयास, उद्योग
  • साहसं – Courage / साहस
  • धैर्यं – Patience, steadfastness / धैर्य
  • बुद्धिः – Intelligence / बुद्धि
  • शक्तिः – Strength / शक्ति
  • पराक्रमः – Valor, bravery / पराक्रम, वीरता
  • षड् एते – These six / ये छह
  • यत्र वर्तन्ते – Where they exist / जहाँ मौजूद हैं
  • देवः सहायकृत् – God assists / वहाँ देवता मदद करते हैं
हिन्दी अर्थ

जहाँ उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम मौजूद होते हैं, वहाँ देवता भी उनकी सहायता करते हैं। अर्थात्, सफलता केवल प्रयास और गुणों से ही प्राप्त होती है; ईश्वर का सहारा उन लोगों के साथ होता है जो सच्चे प्रयास और योग्य गुणों के साथ कार्य करते हैं।

English Meaning

Where effort, courage, patience, intelligence, strength, and valor exist, God also assists there. Success is achieved through one's own qualities and efforts, and divine support comes to those who act with determination and virtuous attributes.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक हमें सिखाता है कि मानव प्रयास और गुणों का महत्व सर्वोच्च है। ईश्वर केवल उन लोगों की सहायता करते हैं जो संकल्प, साहस और बुद्धि के साथ जीवन में कदम रखते हैं। सफलता का मार्ग व्यक्ति के गुणों और कर्मों से निकलता है, न कि केवल भाग्य से।

उपदेशः हि मूर्खाणां – श्लोक व्याख्या
उपदेशः हि मूर्खाणां प्रकोपाय न शान्तये ।
पयः पानं भुजंगानां केवलं विषवर्धनम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • उपदेशः – Advice, teaching / उपदेश, शिक्षा
  • मूर्खाणां – Of fools / मूर्खों का
  • प्रकोपाय – Causes anger / क्रोध उत्पन्न करने के लिए
  • न शान्तये – Does not bring peace / शांति नहीं लाता
  • पयः पानं – Drinking milk / दूध पीना
  • भुजंगानां – Of snakes / साँपों का
  • केवलं विषवर्धनम् – Only increases poison / केवल विष बढ़ाता है
हिन्दी अर्थ

जैसे साँप को दूध पिलाने से उसका विष बढ़ता है**, वैसे ही मूर्ख को उपदेश देने से वह **क्रोध और प्रकोप में वृद्धि करता है**। इसलिए मूर्खों को अनावश्यक उपदेश देना लाभकारी नहीं होता।

English Meaning

Just as giving milk to snakes only increases their poison, giving advice to fools only increases their anger. Hence, instructing the ignorant may not bring any peace and can be counterproductive.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि ज्ञान और उपदेश का प्रभाव उस व्यक्ति की बुद्धि और स्वभाव पर निर्भर करता है। सही और विवेकी व्यक्ति को उपदेश लाभकारी होता है, जबकि मूर्ख और जड़ मन वाला व्यक्ति इसे क्रोध, अहंकार और अवज्ञा के लिए प्रयोग कर सकता है। इसलिए बुद्धिमत्ता और विवेक का ध्यान रखते हुए ही शिक्षा और सलाह देना चाहिए।

आत्मनः मुख दोषेण – श्लोक व्याख्या
आत्मनः मुख दोषेण बध्यन्ते शुक सारिकाः ।
बकाः तत्र न बध्यन्ते मौनं सर्वार्थ साधनम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • आत्मनः मुख दोषेण – By one’s own mouth or faults / अपने मुँह के दोष से
  • बध्यन्ते – Are hurt / प्रभावित होते हैं
  • शुक – Parrots / तोते
  • सारिकाः – Crows / कौवे
  • बकाः तत्र न बध्यन्ते – Herons are not affected there / बक वहां प्रभावित नहीं होते
  • मौनं – Silence / मौन
  • सर्वार्थ साधनम् – Means to achieve all goals / सभी कार्यों की साधना का उपाय
हिन्दी अर्थ

जैसे **तोते और कौवे** अपने बोलने और चोरी-चुगली से नुकसान में पड़ जाते हैं, वैसे ही व्यक्ति के **अपने वचन और दोष उसके लिए हानिकारक** हो सकते हैं। जहाँ **मौन है**, वहाँ **सभी कार्य और साधन सफल होते हैं**। अर्थात्, **मौन एक महत्वपूर्ण साधन है जो जीवन में सफलता और शांति दिलाता है**।

English Meaning

Just as parrots and crows are harmed by their own speech and faults, similarly, a person’s **own words and defects can cause harm**. Where there is **silence**, all efforts and endeavors succeed. Hence, **silence is a key practice for achieving success and peace**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि **वाणी का संयम और मौन का पालन** अत्यंत महत्वपूर्ण है। अविवेकी बोलने से स्वयं को और दूसरों को हानि पहुँच सकती है, जबकि **मौन व्यक्ति को सत्कर्म और सफलता की ओर ले जाता है**। इसलिए **सत्संग और आत्मनियंत्रण में मौन का महत्व अत्यधिक है**।

खलः करोति दुर्वृत्तं – श्लोक व्याख्या
खलः करोति दुर्वृत्तं नूनं फलति साधुषु ।
दशाननोऽहरत् सीतां बन्धनं तु महोदधेः ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • खलः – Wicked person / दुर्जन, दुष्ट
  • करोति दुर्वृत्तं – Performs evil deeds / दुर्वृत्त करता है
  • नूनं फलति साधुषु – Surely harms the virtuous / निश्चित रूप से साधु जनों को प्रभावित करता है
  • दशाननः – Ravana / दशानन (रावण)
  • अहरत् सीतां – Carried away Sita / सीता का हरण किया
  • बन्धनं तु महोदधेः – Bound her in the great ocean / महोदधि में बंधन किया
हिन्दी अर्थ

दुष्ट व्यक्ति अपने दुर्वृत्तों से **साधु और पुण्यवान लोगों को हानि पहुँचाता है**। जैसे रावण (दशानन) ने सीता का हरण किया और उन्हें महोदधि में बांध दिया, वैसे ही **अहंकारी और पापी व्यक्ति दूसरों के लिए संकट उत्पन्न करते हैं**।

English Meaning

A wicked person, by his evil deeds, surely harms the virtuous. Just as Ravana (Dashanana) abducted Sita and bound her in the great ocean, similarly, **a sinful or arrogant person brings difficulties and suffering to others**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि **दुष्ट कर्मों का प्रभाव केवल स्वयं पर नहीं, बल्कि दूसरों पर भी पड़ता है**। सत्य, धर्म और पुण्य के मार्ग पर चलने वाले लोगों के लिए भी **पापी का क्रूर प्रभाव अस्थायी संकट पैदा कर सकता है**। इसलिए सत्कर्म और सत्संग का पालन करना और दुष्टों से सावधान रहना आवश्यक है।

कार्यार्थी भजते – श्लोक व्याख्या
कार्यार्थी भजते लोकः यावत् कार्यं न सिध्यति ।
उत्तीर्णे च परे पारे नौकायाः किं प्रयोजनम् ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • कार्यार्थी – One who desires results / कार्य की इच्छा रखने वाला
  • भजते लोकः – People follow / लोग उनका अनुसरण करते हैं
  • यावत् कार्यं न सिध्यति – Until the task is not completed / जब तक कार्य पूर्ण नहीं होता
  • उत्तीर्णे परे पारे – After crossing the other shore / जब नाव दूसरी ओर पहुँच जाती है
  • नौकायाः किं प्रयोजनम् – What is the use of the boat / नाव का क्या लाभ
हिन्दी अर्थ

जैसे **लोग केवल तब तक किसी का अनुसरण करते हैं जब तक वह कार्य संपन्न नहीं करता**, वैसे ही **नाव का लाभ तब होता है जब वह पार लगा देता है; कार्य न पूर्ण होने पर प्रयास व्यर्थ है**। अर्थात, **सफलता और परिणाम के बिना प्रयास का पूर्ण महत्व नहीं होता**।

English Meaning

People follow a person who desires to accomplish work **only until the task is completed**. Similarly, the **use of a boat is realized only when it reaches the other shore**. Hence, **effort without completion or results is of limited value**.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि **सफलता और परिणाम के बिना प्रयास का महत्व अधूरा है**। सत्य, ज्ञान और कर्म का मूल्य तभी स्पष्ट होता है जब कार्य का परिणाम दृष्टिगोचर हो। इसलिए व्यक्ति को न केवल प्रयास करना चाहिए, बल्कि उसे **समाप्ति और परिणाम की दिशा में भी निरंतर चलना चाहिए**।

मनः मधुकरः – श्लोक व्याख्या
मनः मधुकरः मेघः मद्यपः मत्कुणः मरुत् ।
मा मदः मर्कटः मत्स्यः मकाराः दश चंचलाः ॥
शब्दार्थ (Word Meaning)
  • मनः – Mind / मन
  • मधुकरः – Honeybee / मधुमक्खी
  • मेघः – Cloud / बादल
  • मद्यपः – Drunkard / मद्यपान करने वाला
  • मत्कुणः – Monkey / बंदर
  • मरुत् – Wind / वायु
  • मा मदः – Do not be arrogant / अहंकार न करें
  • मर्कटः – Monkey / वानर
  • मत्स्यः – Fish / मछली
  • मकाराः – Crocodiles / मगर
  • दश चंचलाः – Ten are restless / ये सभी चंचल हैं
हिन्दी अर्थ

यह श्लोक **मन की चंचलता और अस्थिरता** को दर्शाता है। जैसे **मधुमक्खी, बादल, मद्यप, बंदर, मछली, मगर और वायु** चंचल और नियंत्रणहीन हैं, वैसे ही **मन भी अस्थिर और नियंत्रित करना कठिन है**। यह हमें चेतावनी देता है कि **मन पर संयम और नियंत्रण आवश्यक है**, अन्यथा यह भ्रम और दोषों की ओर ले जाता है।

English Meaning

This verse illustrates the **restlessness and instability of the mind**. Just as **the honeybee, clouds, drunkard, monkey, fish, crocodiles, and wind** are restless and difficult to control, so is the mind. It teaches that **discipline and control over the mind are essential** to avoid confusion and faults.

दार्शनिक भाव (Philosophical Insight)

श्लोक का संदेश यह है कि **मन हमेशा चंचल और अनियंत्रित प्रवृत्ति का होता है**, और इसे स्थिर करने के लिए **ध्यान, संयम और विवेक** का अभ्यास आवश्यक है। मन पर विजय पाकर ही व्यक्ति जीवन में **सत्य, ज्ञान और शांति** प्राप्त कर सकता है।