शृङ्गार शतक श्लोक 74-82: यौवन, वेश्या और मोह का गहरा यथार्थ | व्याख्या

भर्तृहरि शृङ्गार शतक श्लोक 74-82 (Bhartruhari Shringar Shatakam Shloka 74-82) H1: शृङ्गार शतक: यौवन और मोह का द्वंद्व (श्लोक 74-82) ​H2: श्लोक 74: नव-यौवन का प्रभाव और संयम ​H2: श्लोक 76-78: वेश्या-निंदा और विवेक की तलवार ​H2: श्लोक 81-82: क्या स्त्रियाँ ही संसार-सागर की बाधा हैं? ​H3: भर्तृहरि के वैराग्य और शृङ्गार का अद्भुत समन्वय
श्लोक ७४: नव-यौवन का प्रभाव
छंद: शार्दूलविक्रीडित
श‍ृंगारद्रुमनीरदे प्रसृमरक्रीडारस स्रोतसि
प्रद्युम्नप्रियबान्धवे चतुरतामुक्ताफलोदन्वति ॥

तन्वीनेत्रचकोरपार्वणविधौ सौभाग्यलक्ष्मीनिधौ
धन्यः कोऽपि न विक्रियां कलयति प्राप्ते नवे यौवने ॥ ७४॥
हिंदी व्याख्या:

नया यौवन श्रृंगार रूपी वृक्ष को सींचने वाला बादल है, विलास-रस की बहती धारा है, कामदेव का सबसे प्रिय मित्र है और चतुरता रूपी मोतियों का सागर है। वह सुंदरी के नेत्र रूपी चकोरों के लिए पूर्णिमा का चंद्रमा है। ऐसे शक्तिशाली यौवन के आने पर भी जिसका मन विकारों (वासना) से विचलित नहीं होता, वह पुरुष वास्तव में धन्य है।

English Explanation:

Fresh youth is like a rain-cloud for the tree of love, a flowing stream of pleasure, and a dear friend of Cupid. It is an ocean containing the pearls of cleverness and a full moon for the eyes of beautiful women. Blessed is the man who remains steady and unaffected by passions even when this intoxicating youth arrives.

श्लोक ७५: तृष्णा और वृद्धावस्था
छंद: स्रग्धरा
राजंस्तृष्णाम्बुराशेर्न हि जगति गतः कश्चिदेवावसानं
को वार्थोऽर्थै प्रभूतैः स्ववपुषि गलिते यौवने सानुरागे ॥

गच्छामः सद्म तावद्विकसितकुमुदेन्दीवरालोकिनीनां
यावच्चाक्रम्य रूपं झटिनि न जरया लुप्यते प्रेयसीनाम् ॥ ७५॥
हिंदी व्याख्या:

हे राजन्! इस संसार में आज तक कोई भी तृष्णा (इच्छाओं) के समुद्र के पार नहीं जा पाया है। जब शरीर बूढ़ा हो जाए और सुंदर यौवन नष्ट हो जाए, तब बहुत अधिक धन एकत्र करने का क्या लाभ? अतः जब तक वृद्धावस्था हमारी प्रियतमाओं के खिले हुए कमल जैसे रूप को झपटकर नष्ट नहीं कर देती, तब तक ही विलास का समय है।

English Explanation:

O King, nobody has ever reached the end of the ocean of desire. What is the use of abundant wealth once youth has faded from the body? Let us enjoy the company of our beloveds with lotus-like eyes as long as their beauty is not suddenly snatched away by old age.

श्लोक ७६: पण्यस्त्री (वेश्या) का विवेक
छंद: शार्दूलविक्रीडित
जान्त्यन्धाय च दुर्मुखाय च जराजीर्णाखिलाङ्गाय च
ग्रामीणाय च दुष्कुलाय च गलत्कुष्ठाभिभूताय च ॥

यच्छन्तीषु मनोहरं निजवपुर्लक्ष्मीलवाकाङ्क्षया
पण्यस्त्रीषु विवेककल्पलतिकाशस्त्रीषु रज्येत कः ? ॥ ७६॥
हिंदी व्याख्या:

जो वेश्याएँ थोड़े से धन के लोभ में अपने सुंदर शरीर को अंधे, कुरूप, बूढ़े, गंवार, नीच कुल वाले या कुष्ठ रोग से ग्रस्त व्यक्ति को भी सौंप देती हैं, वे विवेक रूपी कल्पलता को काटने के लिए छुरी के समान हैं। भला ऐसा कौन बुद्धिमान पुरुष होगा जो उन 'बिकाऊ स्त्रियों' (पण्यस्त्री) से प्रेम करेगा?

English Explanation:

Prostitutes offer their beautiful bodies for a small amount of money even to the blind, the ugly, the old, the vulgar, or those suffering from leprosy. They are like knives that cut down the vine of wisdom. Who, then, would be so foolish as to find true love in such women?

श्लोक ७७: काम की ज्वाला
छंद: अनुष्टुभ्
वेश्याऽसौ मदनज्वाला रूपेन्धनविवर्धिता ।
कामिभिर्यत्र हूयन्ते यौवनानि धनानि च ॥ ७७॥
हिंदी व्याख्या:

यह वेश्या कामदेव की वह प्रज्वलित अग्नि है जो रूप रूपी ईंधन से और अधिक बढ़ती है। कामी पुरुष इस आग में अपने यौवन और अपने समस्त धन की आहुति दे देते हैं (अर्थात् सब कुछ नष्ट कर देते हैं)।

English Explanation:

A prostitute is a flame of lust, fueled by the wood of beauty. In this fire, passionate men sacrifice both their precious youth and their hard-earned wealth.

श्लोक ७८: अधर पान का घृणित पक्ष
छंद: आर्या
कश्चुम्बति कुलपुरुषो वेश्याधरपल्लवं मनोज्ञमपि ।
चारभटचौरचेटकनटविटनिष्ठीवनशरावम् ? ॥ ७८॥
हिंदी व्याख्या:

वह कुलीन पुरुष भला वेश्या के होठों को कैसे चूम सकता है, जो दिखने में तो सुंदर (कोमल पत्ते जैसे) हैं, किंतु जो जासूसों, सैनिकों, चोरों, दासों, नटों और लंपटों के थूकने का पात्र (शराव) बने हुए हैं? (अर्थात् जो अनेक नीच लोगों द्वारा जूठे किए गए हों)।

English Explanation:

How can a man of noble birth kiss the lips of a prostitute, which, despite looking attractive, are like a vessel for the spit of spies, soldiers, thieves, servants, and lecherous men?

श्लोक ७९: संसार का बंधन
छंद: स्रग्धरा
संसारेऽस्मिन्नसारे कुनृपतिभवनद्वारसेवावलम्ब
व्यासङ्गध्वस्तधैर्यं कथममलधियो मानसं संविदध्यु: ? ॥

यद्येताः प्रोद्यदिन्दुद्युतिनि वयभृतो न स्युरम्भोजनेत्राः
प्रेङ्खत्काञ्चीकलापाः स्तनभरविनमन्मध्यभाजस्तरुण्यः ? ॥ ७९॥
हिंदी व्याख्या:

यदि इस असार संसार में चंद्रमा के समान चमकते मुख वाली, कमल जैसे नेत्रों वाली और अपनी कमर की करधनी (काञ्ची) को झनकाने वाली सुंदर स्त्रियाँ न होतीं, तो विद्वान पुरुष भला क्यों नीच राजाओं के द्वारों पर सेवा के लिए खड़े रहते और अपना धैर्य खोते? स्त्रियों का मोह ही उन्हें संसार में फँसाए रखता है।

English Explanation:

If it weren't for beautiful women with faces as bright as the moon and eyes like lotuses, why would wise men endure the humiliation of serving bad kings? It is the attachment to women that keeps men bound to this hollow world.

श्लोक ८०: हिमालय और कामदेव
छंद: शार्दूलविक्रीडित
सिद्धाध्यासितकन्दरे हरवृषस्कन्धावरुग्णद्रुमे
गङ्गाधौतशिलातले हिमवतः स्थाने स्थिते श्रेयसि ॥

कः कुर्वीत शिरः प्रमाणमलिनं म्लानं मनस्वी जनो
यद्वित्रस्तरकुरङ्गशावनयना न स्युः स्मरास्त्रं स्त्रियः ॥ ८०॥
हिंदी व्याख्या:

जब हिमालय जैसा श्रेष्ठ स्थान मौजूद है, जहाँ गंगा की धाराओं से धुली हुई शिलाएँ हैं और शिव के नंदी द्वारा रगड़े गए वृक्ष हैं, तब भला कौन स्वाभिमानी पुरुष दूसरों के आगे सिर झुकाता? यदि हिरण के बच्चे जैसी आँखों वाली स्त्रियाँ कामदेव का अस्त्र बनकर बीच में न आतीं, तो सब मुक्ति का मार्ग चुनते।

English Explanation:

When the glorious Himalayas with their holy caves and Ganges-washed rocks are available for meditation, why would a self-respecting man bow his head before anyone? It is only because women, with eyes like frightened fawns, act as Cupid’s weapons and distract men from their spiritual goal.

श्लोक ८१: मदिरेक्षणा की बाधा
छंद: अनुष्टुभ्
संसारोदधिनिस्तार पदवी न दवीयसी ।
अन्तरा दुस्तरा न स्युर्यदि रे मदिरेक्षणा ॥ ८१॥
हिंदी व्याख्या:

इस संसार रूपी समुद्र को पार करने का मार्ग बहुत दूर नहीं है (अर्थात् मोक्ष कठिन नहीं है), यदि बीच में ये मदिरा जैसी नशीली आँखों वाली स्त्रियाँ बाधा बनकर खड़ी न हों, जिन्हें पार करना अत्यंत कठिन है।

English Explanation:

The path to cross the ocean of worldly existence is not very long. However, it becomes impassable because of the presence of women with intoxicating eyes who stand as obstacles in between.

श्लोक ८२: दुःख का एकमात्र कारण
छंद: इंद्रवज्रा
सत्यं जना वच्मि न पक्षपाताल्लोकेषु सप्तस्वपि तथ्यमेतत् ।
नान्यन्मनोहारि नितम्बिनीभ्यो दुःखैकहेतुर्न च कश्चिदन्यः ॥ ८२॥
हिंदी व्याख्या:

हे लोगो! मैं बिना किसी पक्षपात के सत्य कह रहा हूँ और सातों लोकों में यह तथ्य अटल है कि स्त्रियों से बढ़कर न तो कोई वस्तु मन को मोहने वाली है और न ही उनके समान संसार में दुःख का कोई दूसरा बड़ा कारण है।

English Explanation:

I speak the truth without any bias, and this fact holds true across all seven worlds: there is nothing more captivating than a woman, and at the same time, there is no greater cause of sorrow than her.

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