शृङ्गार शतक श्लोक 90-96: इंद्रियों का धोखा और संसार की माया | व्याख्या

भर्तृहरि के श्लोक, नारी स्वभाव और वैराग्य, संसार सागर बाधा, इंद्रिय वंचना, कुटिल भ्रूलता का अर्थ। H1: शृङ्गार शतक (90-96): सौंदर्य के पीछे का कड़वा सच ​H2: श्लोक 90-91: किम्पाक फल और दर्पण के समान नारी हृदय ​H2: श्लोक 93: वाणी में मधु, हृदय में विष (हालाहल) ​H2: श्लोक 95: शास्त्रों का ज्ञान और मोह की 'कुञ्चिका' (चाबी) ​H2: श्लोक 96: कान्ता रूपी नदी और संसार-सागर का मज्जन ​H3: क्या पांचों इंद्रियां हमें ठग रही हैं? (श्लोक 94 का रहस्य)
श्लोक ९०: समय का विष
छंद: शिखरिणी
यदेतत्पूर्णेन्दुद्युतिहरमुदाराकृतिवरं
मुखाब्जं तन्वङ्ग्याः किल वसति तत्राधरमधु ॥

इदं तत्किम्पाकद्रुमफलमिवातीव विरसं
व्यतीतेऽस्मिन् काले विषमिव भविष्यत्यसुखदम् ॥ ९०॥
हिंदी व्याख्या:

पूर्णिमा के चंद्रमा की कांति को हर लेने वाला सुंदरी का यह जो श्रेष्ठ कमल-मुख है और जिसमें अधर-मधु (होठों का रस) निवास करता है—यह वास्तव में 'किम्पाक' वृक्ष (एक जहरीला फल जो बाहर से सुंदर पर भीतर से कड़वा होता है) के फल के समान है। समय बीत जाने पर (यौवन ढलने पर) यही अत्यंत विरस, दुखद और विष के समान कष्टकारी हो जाएगा।

English Explanation:

The beautiful face of a slender woman, which rivals the full moon and holds the nectar of her lips, is like the 'Kimpaka' fruit—attractive on the outside but bitter within. As time passes and youth fades, this very beauty becomes joyless and painful like poison.

श्लोक ९१: नारी का स्वभाव
छंद: शार्दूलविक्रीडित
अग्राह्यं हृदयं यथैव वदनं यद्दर्पणान्तर्गतं
भावः पर्वतसूक्ष्ममार्गविषमः स्त्रीणां न विज्ञायते ॥

चित्तं पुष्करपत्रतोयतरलं विद्वद्भिराशंसितं
नारी नाम विषाङ्कुरैरिव लता दोषैः समं वर्धिता ॥ ९१॥
हिंदी व्याख्या:

जैसे दर्पण के भीतर दिखने वाले मुख को पकड़ा नहीं जा सकता, वैसे ही स्त्रियों का हृदय अगम्य है। उनके मन के भाव पर्वत के संकरे रास्तों के समान दुर्गम और कठिन हैं। विद्वानों का कहना है कि उनका चित्त कमल के पत्ते पर पड़ी पानी की बूंद की तरह चंचल होता है। वास्तव में नारी दोषों के साथ उसी प्रकार बढ़ती है जैसे कोई लता विषैले अंकुरों के साथ बढ़ती है।

English Explanation:

Just as a reflection in a mirror cannot be grasped, the heart of a woman is incomprehensible. Her emotions are as treacherous as narrow mountain paths. Sages say her mind is as unstable as a drop of water on a lotus leaf; she is like a vine that grows entwined with poisonous sprouts of faults.

श्लोक ९२: स्त्रियों की चंचलता
छंद: अनुष्टुभ्
जल्पन्ति सार्धमन्येन पश्यन्त्यन्यं सविभ्रमम् ।
हृद्गतं चिन्तयन्त्यन्यं प्रियः को नाम योषिताम् ? ॥ ९२॥
हिंदी व्याख्या:

स्त्रियां बातें किसी और से करती हैं, विलासपूर्ण दृष्टि (देखना) किसी और पर डालती हैं और अपने हृदय में चिंतन किसी तीसरे का ही करती हैं। ऐसी स्थिति में भला इस संसार में स्त्रियों का प्रिय (सच्चा प्रेमी) कौन हो सकता है? (अर्थात् वे किसी एक की नहीं होतीं)।

English Explanation:

Women talk to one person, look flirtatiously at another, and think of a third in their hearts. Who, then, can truly be called the beloved of a woman? Their affection is divided and inconsistent.

श्लोक ९३: वाणी का मधु और हृदय का विष
छंद: वैतालीय
मधु तिष्ठति वाचि योषितां हृदि हालाहलमेव केवलम् ।
अत एव निपीयतेऽधरो हृदयं मुष्टिभिरेव ताड्यते ॥ ९३॥
हिंदी व्याख्या:

स्त्रियों की वाणी में शहद (मीठापन) होता है, किंतु उनके हृदय में केवल हलाहल विष भरा होता है। यही कारण है कि प्रेमी उनके होठों का रस तो पीते हैं (प्रेम करते हैं), किंतु उनके हृदय को मुक्कों से ताड़ित करते हैं (काम-क्रीड़ा के दौरान या क्रोधवश हृदय पर प्रहार)।

English Explanation:

Honey resides in the speech of women, but their hearts contain only deadly poison. Therefore, while their lips are kissed, their chests (hearts) are metaphorically or physically struck during the heights of passion or conflict.

श्लोक ९४: पाँचों इंद्रियों का धोखा
छंद: मालिनी
इह हि मधुरगीतं नृत्यमेतद्रसोऽयं
स्फुरति परिमलोऽसौ स्पर्श एष स्तनानाम् ।

इति हतपरमार्थैरिन्द्रियैर्भाम्यमाणः
स्वहितकरणदक्षैः पञ्चभिर्वञ्चितोऽसि ॥ ९४॥
हिंदी व्याख्या:

यहाँ मधुर गान है, नृत्य है, स्वाद है, सुगंध है और कोमल स्पर्श है—इन विषयों में फँसकर तुम्हारी पांचों इंद्रियां तुम्हें भटका रही हैं। परमार्थ (सत्य) को भूलकर तुम इन इंद्रियों के पीछे भाग रहे हो। वास्तव में, तुम अपनी ही इन पांचों ज्ञानेंद्रियों द्वारा ठगे गए हो जो केवल अपना स्वार्थ (क्षणिक सुख) जानती हैं।

English Explanation:

Through sweet songs, dance, tastes, fragrances, and touch, your own five senses are leading you astray from the ultimate truth. You are being deceived by your senses, which seek only temporary gratification at the cost of your long-term welfare.

श्लोक ९५: भ्रूलता की चाबी
छंद: मन्दाक्रान्ता
शास्त्रज्ञोऽपि प्रथितविनयोऽप्यात्मबोधोऽपि बाढं
संसारेऽस्मिन्भवति विरलो भाजनं सद्गतीनाम् ॥

येनैतस्मिन्निरयनगरद्वारमुद्घाटयन्ती
वामाक्षीणां भवति कुटिला भ्रूलता कुञ्चिकेव ॥ ९५॥
हिंदी व्याख्या:

चाहे कोई शास्त्रों का ज्ञाता हो, अत्यंत विनम्र हो या आत्मज्ञानी ही क्यों न हो, इस संसार में सद्गति (मोक्ष) पाने वाला व्यक्ति बहुत विरला (दुर्लभ) होता है। इसका कारण यह है कि सुंदरियों की टेढ़ी भौहें नरक रूपी नगर के द्वार को खोलने के लिए 'कुञ्चिका' (चाबी) का काम करती हैं, जिसमें बड़े-बड़े ज्ञानी भी फँस जाते हैं।

English Explanation:

A man may be a scholar of scriptures, humble, or even self-realized, yet few attain salvation. This is because the playful, arched eyebrows of beautiful women act like a key that opens the gates to the city of hell.

श्लोक ९६: कान्ता रूपी नदी
छंद: शार्दूलविक्रीडित
उन्मीलत्त्रिवलितरङ्गनिलया प्रोत्तुङ्गपीनस्तन-
द्वन्द्वेनोद्यतचक्रवाकमिथुना वक्त्राम्बुजोद्भासिनी ॥

कान्ताकारधरा नदीयमभितः क्रूराशया नेष्यते
संसारार्णवमज्जनं यदि तदा दूरेण सन्त्यज्यताम् ॥ ९६॥
हिंदी व्याख्या:

यह स्त्री कान्ता (प्रिया) के रूप में एक ऐसी नदी है जिसमें पेट की तीन बलियाँ (त्रिवली) लहरों के समान हैं, ऊँचे स्तन चक्रवाक पक्षियों के जोड़े के समान हैं और मुख कमल के समान शोभायमान है। किंतु भीतर से यह नदी अत्यंत क्रूर और खतरनाक है। यदि तुम संसार रूपी समुद्र में डूबना नहीं चाहते, तो इस मोहक नदी का दूर से ही त्याग कर दो।

English Explanation:

A woman is like a river where her skin folds are the waves, her breasts are a pair of ruddy geese, and her face is a blooming lotus. However, this river is treacherous and cruel at its core. If you wish to avoid drowning in the ocean of worldly existence, stay far away from this deceptive river.

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