भर्तृहरि कृत शृंगार शतक (भाग 1) – प्रेम और सौंदर्य का शाश्वत ग्रंथ
🌸 Introduction
शृंगार शतक, महान संस्कृत कवि 0 द्वारा रचित एक अद्भुत काव्य संग्रह है, जिसमें प्रेम, सौंदर्य और मानव मन के सूक्ष्म भावों का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। यह केवल काव्य नहीं, बल्कि जीवन के रस और आकर्षण का दार्शनिक विश्लेषण भी है।
इस भाग में हम शृंगार शतक के प्रथम 100 श्लोकों को संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेज़ी व्याख्या सहित प्रस्तुत कर रहे हैं।
📜 About Bhartrihari
1 प्राचीन भारत के एक महान दार्शनिक और कवि थे। उन्होंने तीन प्रसिद्ध शतक रचे:
- 🔹 नीति शतक
- 🔹 वैराग्य शतक
- 🔹 शृंगार शतक
इन रचनाओं में उन्होंने मानव जीवन के तीन मुख्य आयाम—नीति, प्रेम और वैराग्य—का गहन विश्लेषण किया है।
📖 Shlokas Section (Collapsible)
नीचे दिए गए प्रत्येक श्लोक में आप संस्कृत मूल, हिन्दी व्याख्या और अंग्रेज़ी अर्थ को विस्तार से देख सकते हैं।
🧠 Philosophy Summary
शृंगार शतक केवल प्रेम और सौंदर्य का वर्णन नहीं करता, बल्कि यह मानव मन की गहराइयों को भी उजागर करता है।
- ✨ प्रेम केवल आकर्षण नहीं, बल्कि मानसिक अनुभव है
- ✨ सौंदर्य मन की धारणा है, वास्तविकता नहीं
- ✨ इन्द्रिय सुख क्षणिक हैं, परन्तु उनका प्रभाव गहरा होता है
- ✨ आसक्ति अंततः बंधन और दुःख का कारण बनती है
भर्तृहरि यह दिखाते हैं कि शृंगार (romance) केवल आनंद नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है।
शम्भुः स्वयम्भुहरयो हरिणेक्षणानां
येनाक्रियन्त सततं गृहकर्मदासाः ॥
वाचामगोचरचरित्रविचित्रिताय
तस्मै नमो भगवते कुसुमायुधाय ॥ १॥
हिन्दी व्याख्या:
यह श्लोक कामदेव (कुसुमायुध) की अद्भुत शक्ति का वर्णन करता है।
वे इतने प्रभावशाली हैं कि उन्होंने स्वयं महादेव (शम्भु), ब्रह्मा (स्वयम्भू) और विष्णु (हरि) जैसे देवताओं को भी सुन्दर स्त्रियों के प्रति आकर्षित कर दिया।
उनकी लीला इतनी रहस्यमयी और विचित्र है कि उसका वर्णन वाणी से परे है।
अतः ऐसे अद्भुत कामदेव को नमस्कार है।
English Explanation:
This verse praises Kamadeva, the god of love, whose power is so extraordinary that even great deities like Shiva, Brahma, and Vishnu become enchanted by beauty.
His nature is mysterious and beyond verbal expression.
Thus, the poet offers salutations to this divine force of attraction.
क्वचित्सुभ्रूभङ्गैः क्वचिदपि च लज्जापरिणतैः
क्वचिद् भीतित्रस्तैः क्वचिदपि च लीलाविलसितैः ॥
कुमारीणामेभिर्वदनकमलैर्नेत्रचलितैः
स्फुरन्नीलाब्जानां प्रकरपरिपूर्णा इव दिशः ॥ २॥
हिन्दी व्याख्या:
कभी भौंहों के आकर्षक भाव, कभी लज्जा से झुकी हुई दृष्टि,
कभी भय और संकोच, तो कभी चंचल और खेल-भाव से भरी हुई चेष्टाएँ—
इन विविध भावों से युक्त युवतियों के मुखकमल और उनकी चंचल आँखें
ऐसा प्रतीत कराती हैं मानो दिशाएँ नीले कमलों से भर गई हों।
English Explanation:
The expressions of maidens—arched brows, modesty, fear, and playful gestures—
along with their lotus-like faces and moving eyes,
make the directions appear as if filled with clusters of blue lotuses.
मुग्धे! धानुष्कता केयमपूर्वा त्वयि दृश्यते ।
यया विध्यसि चेतांसि गुणैरेव न सायकैः ॥ ३॥
हिन्दी व्याख्या:
हे सुन्दरी! यह कैसी अद्भुत धनुर्विद्या है तुम्हारी—
तुम बिना किसी बाण के ही लोगों के हृदय को भेद देती हो।
तुम्हारे गुण, सौंदर्य और आकर्षण ही तुम्हारे बाण हैं,
जो सीधे हृदय को जीत लेते हैं।
English Explanation:
O beautiful one! What kind of archery is this—
you pierce hearts not with arrows, but with your qualities and charm.
Your beauty itself becomes the weapon that captivates minds.
अनाघ्रातं पुष्पं; किसलयमलूनं कररुहै-
रनाविद्धं रत्नं मधु नवमनास्वादितरसम् ॥
अखण्डं पुण्यानां फलमिव च तद्रूपमनघं
न जाने भोक्तारं कमिह समुपस्थास्यति विधिः ॥ ४॥
हिन्दी व्याख्या:
यह सौंदर्य ऐसा है जैसे कोई पुष्प जिसे किसी ने सूँघा न हो,
कोमल पत्ते जिन्हें किसी ने छुआ न हो,
रत्न जिसे किसी ने छेदा न हो,
और मधु जिसका स्वाद किसी ने न लिया हो।
यह शुद्ध और अखंड पुण्य का फल है—
न जाने विधाता इसे किस भाग्यशाली को प्रदान करेगा।
English Explanation:
This beauty is like an untouched flower,
a tender leaf never plucked,
a gem never pierced,
and fresh honey never tasted.
It is the pure fruit of accumulated merit—
and destiny alone knows who will receive it.
स्मितं किञ्चिद् वक्त्रे सरलतरलो दृष्टिविभवः
परिस्पन्दो वाचामभिनवविलासोक्तिसरसः ॥
गतानामारम्भः किसलयितलीलापरिकरः
स्पृशन्त्यास्तारुण्यं किमिह न हि रम्यं मृगदृशः? ॥ ५॥
हिन्दी व्याख्या:
मृगनयनी युवती के मुख पर हल्की मुस्कान,
सरल और चंचल दृष्टि, मधुर और नवीन वाणी,
और कोमल लीलाओं से युक्त उसकी चेष्टाएँ—
जब वह यौवन को प्राप्त होती है,
तो उसमें ऐसा क्या है जो आकर्षक न हो?
English Explanation:
A gentle smile, soft and playful glances,
sweet and charming speech,
and tender graceful gestures—
when a maiden enters youth,
what is there that is not delightful about her?
व्यादीर्घेण चलेन वक्रगतिना तेजस्विना भोगिना
नीलाब्जद्युतिनाऽहिना वरमहं दष्टो, न तच्चक्षुषा ॥
दष्टे सन्ति चिकित्सका दिशि-दिशि प्रायेण धर्मार्थिनो
मुग्धाक्षीक्षणवीक्षितस्य न हि मे वैद्यो न चाप्यौषधम् ॥ ६॥
हिन्दी व्याख्या:
मैं किसी सर्प के डसने से नहीं,
बल्कि उस सुन्दरी की दृष्टि से घायल हुआ हूँ।
सर्प के विष का तो उपचार करने वाले वैद्य हर दिशा में मिल जाते हैं,
परन्तु उस मृगनयनी की दृष्टि से घायल व्यक्ति के लिए
न कोई वैद्य है और न ही कोई औषधि।
English Explanation:
I am not bitten by a serpent,
but by the glance of a beautiful maiden.
For snake bites, physicians can be found everywhere,
but for the wound caused by her gaze,
there exists neither doctor nor cure.
स्मितेन भावेन च लज्जया भिया
पराङ्मुखैरर्धकटाक्षवीक्षणैः ॥
वचोभिरीर्ष्याकलहेन लीलया
समस्तभावैः खलु बन्धनं स्त्रियः ॥ ७॥
हिन्दी व्याख्या:
स्त्रियाँ अपनी मुस्कान, भाव-भंगिमा, लज्जा, भय,
आधे कटाक्ष, प्रेमपूर्ण वचन, ईर्ष्या और कलह—
इन सभी भावों के माध्यम से
पुरुष के मन को अपने बंधन में बाँध लेती हैं।
English Explanation:
Through smiles, expressions, modesty, fear,
side glances, sweet words, jealousy, and playful quarrels—
women bind hearts using all these emotional expressions.
भ्रूचातुर्याकुञ्चिताक्षाः कटाक्षाः
स्निग्धा वाचो लज्जिताश्चैव हासाः ॥
लीलामन्दं प्रस्थितं च स्थितं च
स्त्रीणामेतद् भूषणं चायुधं च ॥ ८॥
हिन्दी व्याख्या:
भौंहों की चतुरता, झुकी हुई आँखें,
कटाक्ष, मधुर वाणी, लज्जा से युक्त हास्य,
धीमी चाल और स्थिरता—
ये सब स्त्रियों के आभूषण भी हैं
और उनके आकर्षण के अस्त्र भी।
English Explanation:
Skillful brows, lowered eyes,
side glances, gentle speech, shy smiles,
slow graceful movements—
these are both the ornaments
and the weapons of women.
🔱 Conclusion
शृंगार शतक (भाग 1) हमें प्रेम, आकर्षण और जीवन के सौंदर्य को समझने का एक नया दृष्टिकोण देता है। यह ग्रंथ आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था।
यदि आप मानव मन, प्रेम और सौंदर्य के गहरे रहस्यों को समझना चाहते हैं, तो यह ग्रंथ आपके लिए अमूल्य है।
👉 आगे पढ़ें: शृंगार शतक भाग 2
👉 सम्पूर्ण संग्रह: 100+ श्लोकों की श्रृंखला
