जीवन का उद्देश्य

दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

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भुतहा घर का रहस्य

 

भुतहा घर का रहस्य

अद्भुत रहस्य-भुतहा घर का रहस्य

न्य इंग्लैंड के इस घर में 1970 के बाद और 1980 के पहले जो एक के बाद एक कई भूत दिखाई दिए, उनकी बाकायदा अमेरिका के एक अंतरराष्ट्रीय नोवैज्ञानिक अनुसंधान फाउंडेशन से खोजबीन भी कराई गई। लेकिन आज तक उन घटनाओं के कारणों का पता नहीं चल सका। अमेरिकी इतिहास में भूत-प्रेत के मामलों की यह सबसे ताजी घटना कही जा सकती है। 

परिवार का सही नाम यहां नहीं दिया जा रहा ताकि वे लोग बाद में परेशानी में ना पड़ें। लेकिन मनोवैज्ञानिक अनुसंधान फाउण्डेशन के खोजकर्ताओं ने उस परिवार का नाम बेरीनी रखा। बेरीनी परिवार के साथ असामान्य घटनाओं का वास्ता तब पड़ने लगा जब फादर जो बेरीनी अपने परिवार को न्यू इंग्लैंड टाउन स्थित अपने पूर्वजों के मकान में लेकर गए। 

भुतहा घर

इस परिवार के पास यह घर कई वर्षों से था। बेरीनी के पिता यहीं बड़े हुए थे और उनके परिवार के कई सदस्यों का निधन भी इसी मकान में हुआ था। जो बेरीनी अपनी पत्नी रोज और अपने दो बच्चों (जोन और डेजी) के साथ जब इस घर में आए तो सब कुछ ठीक-ठाक था। मई, 1989 की एक रात रोज ने एक रहस्यमय आवाज सुनी। रोज ने बताया कि वह किसी छोटी लड़की की आवाज थी और वह कह रही थी, ‘मां, मां, मैं सेरिना हूं।’ 

उस समय कोई नहीं जानता था कि सेरिना कौन है या उस आवाज का क्या मतलब है। बाद में उस परिवार के अतीत की खोजबीन से जो बेरीनी को पता लगा कि उसके पिता की एक बहन थी, जिसका नाम सेरिना था और पचास साल पहले जब वह पांच साल की थी तो मर गई थी। लेकिन सेरिना की जो आवाज आ रही थी उसमें वह क्या कहना चाहती थी, यह कोई नहीं समझा पाया। अलबत्ता परिवार कलोगो ने यह समझा कि सेरिना की आवाज में दिया गया संदेश शायद आने वाले किसी खतरे का संकेत है। 

जब पहली बार सेरिना की आवाज रोज ने सुनी तो उसके ठीक दूसरे दिन डेजी को टॉन्सिल निकलवाने के लिए अस्पताल ले जाया गया। ऑपरेशन के दौरान कुछ गड़बड़ हो गई। डेजी को दिल का दौरा पड़ा और उसकी मरने जैसी हालत हो गई। सेरिना की आवाज बाद में भी कई बार सुनाई देती रही। 

एक बार जून माह में रात को जब सेरिना की आवाज सुनाई दी तो उसके दूसरे दिन जो की दादी को दिल का दौरा पड़ा। फिर नवंबर में सेरिना की आवाज सुनाई देने के दूसरे दिन तो दादी की मृत्यु ही हो गई। चौथी बार सेरिना की आवाज जब सुनाई दी तो उसी रात जो की नींद अपनी पत्नी रोज की घुटन भरी आवाजों से खुल गई। रोज नींद में जोर-जोर से बड़बड़ा रही थी और उसका दम घुट रहा था। उसे जो ने जगाया तो उसने बताया कि नींद में वह अपने पूर्व पति से लड रही थी और वह उसका गला घोंट रहा था।भुतहा घर

इसके बाद सेरिना की आवाज जैसे आना शुरू हुई थी, वैसे ही बन्द हो गई। सन 1979 के अन्त से मार्च 1981 तक इस परिवार की जिंदगी सामान्य सी चलती रही। घर में कुछ भी अनहोनी नहीं हुई। लेकिन सन् 1981 की सर्दियों में रोज को एक बच्चे का प्रेत दिखाई दिया जो सफेद कपड़े पहने हुए था। वह रात को हॉल में से होकर कमरे में जाने के लिए सीढ़ियां चढ़ रहा था। बाद में रोज ने अनुसंधानकर्ताओं को बताया कि उसके कपड़ों का रंग ऐसा था जैसा दूध से भरा बोतल का होता है। रोज ने यह भी बताया कि पहली बार जब उसने उस प्रेत को देखा था तो कोई गड़बड़ उस प्रेत ने नहीं की। बस वह मेरे साथ चलता रहता। कभी दिखाई देता और कभी अन्तर्धान हो जाता। पहली बार केवल दो घंटे तक मेरे साथ रहा। फिर वह करीब डेढ़ सप्ताह बाद नजर आया और इस बार वह उससे बड़ी मासूमियत से पूछ बैठा कि सब आदमी अंत में कहां जाते हैं ? और यह भी कि मैं कौन हूं और कहां हूं? 

वह प्रेत जो को भी दिखाई दिया। जो ने बताया कि उसने उसे एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते देखा और सभी कमरों में घूम कर वह हॉल में आकर रुक गया और घुटनों के बल इस तरह बैठ गया था जैसे हॉल में बिछी कारपेट के नीचे कुछ छुपा हुआ हो और वह उसे ढूंढ़ना चाहता हो। बाद में जब प्रेत चला गया तो जो ने वह कारपेट हटवाई तो वहां एक टूटी चैन से बंधा एक धार्मिक मेडल पड़ा मिला। क्या वह प्रेत इसे ढूंढ रहा था? क्या वह मैडल उसका था? इन सवालों का हल ढंढने के लिए जो ने फिर अपने परिवार के इतिहास को खंगालना शुरू किया। 

इसी दौरान उसे पता लगा कि इस घर में एक और बच्चे की मौत हुई थी। वह बच्चा उसके पिता का छोटा भाई था और उसका नाम जोरजियो था। जोरजियो जब आठ साल का ही था तो उसकी मौत हो गई थी और उसे जब दफनाया गया था तो वह धार्मिक सफेद लिबास पहने हए था। अगले कुछ माह जोरजियो जो और रोज को कई बार दिखाई दिया। 

एक बार जोरजियो के प्रेत ने आरोप लगाया कि उसके जुड़वां भाई कार्लोस | ने इस घर से कोई चीज चुरा ली है। कार्लोस तो अब तक जिन्दा था और पड़ोस के एक मकान में रहता था। कार्लोस भी नहीं बता सका कि जोरजियो ऐसी किस चीज के बारे में कह रहा था। उसे खुद नहीं मालूम था कि वह कौनसी चीज इस मकान से लेकर गया है। जोरजियो के प्रेत ने शायद जो को अपना बड़ा भाई समझा और – इसी कारण उसने जो को कहा था कि मेरा बड़ा भाई ही मेरी मदद कर सकता है। जो ने भी यही समझा और उसने जोरजियो के प्रेत को कहा कि मैं तुम्हारा भाई नहीं बल्कि भाई का बेटा हूं। 

इसके बाद जोरजियो का प्रेत उस रात गायब तो हो गया लेकिन उस रात जो और रोज के बेडरूम का टेलीफोन टेबल से नीचे गिरा हुआ मिला। शायद जोरजियो के प्रेत ने यह सब गुस्सा जाहिर करने के लिए किया था। उसके बाद तो दर्जनों दफा जो और रोज के बेडरूम में उसकी नाइट टेबल से टेलीफोन नीचे फेंका हुआ मिलता। उसके साथ फोन पर जोरजियो का संदेश सुनाई देता कि वह अपने माता पिता को बुलाना चाहता है और उस छोटे से बच्चे की आत्मा संभवतः आना चाहती है। हर बार जब जो फोन पर जोरजियो का नाम पुकारता तो फोन लाइन डेड हो जाती। 

बेरीनी बहुत घबरा गए थे। उन्होंने एक स्थानीय पुजारी से सलाह मशवरा किया, जिसने उन्हें सलाह दी कि अगली बार जब वह आत्मा आए तो आप उसकी तरफ ध्यान ना दें। उसे अनदेखा कर दें। लेकिन उसकी यह सलाह अच्छी नहीं रही। अगली बार वह लड़का सफेद ड्रेस में रोज के सामने प्रकट हआ तो रोज वही किया जो उसे सलाह दी गई थी। उसने उसकी तरफ बिल्कल ध्यान नहीं दिया। अचानक उसने देखा कि एक बंद दरवाजा झटके से खलने और र लगा। ऐसा कई बार हुआ।उसके बाद के कुछ दिनों में घर में किसी के दौड़ने की आवाज आती पर दिखाई कोई नहीं देता और कभी जब रोज अपने हाथों में बख्शा उठाती तो वह अचानक नीचे गिर जाता 

इन घटनाओं से घबराकर बेरीनी दम्पती चर्च गए और वहां के दो पुजारियों को अपने घर लेकर आए। उन दोनों ने घर में बैठ कर प्रार्थना की और आशीर्वाद दिया। जोरजियो की आत्मा का लगता है उद्देश्य पूरा हो गया था या हो सकता है कि कुछ और बात हो। लेकिन इसके बाद वह नजर नहीं आई। फिर भी बेरीनी के समक्ष असामान्य परेशानियां खत्म नहीं हुई थीं। जोरजियो की आत्मा के विदा लेने के बाद उनके घर में एक और आत्मा आ गई। 

जून, 1981 में बेरीनी परिवार को एक काला कुबड़ा आदमी दिखाई दिया। जो काली टोपी पहने हुए था। पूरी गर्मी के दौरान वह घर में लगातार दिखाई देने लगा। बेरीनी ने बताया कि उसके पांव लम्बे थे और उसकी आवाज भारी थी। बेरीनी ने प्रयास किया कि वह आत्मा उसे अपने बारे में बताए लेकिन वह हर बार यही कहता कि वह भगवान का मंत्री है। वह काला शख्स अपनी हरकतों से कभी भी स्वर्ग से आया हुआ नहीं लगा। वह अपनी उपस्थिति का लगातार अहसास कराता रहा। जैसे जब रोज प्रार्थना कर रही होती तो वह ऊल जलूल हरकतें करके उसका ध्यान भंग करने की कोशिश करता। जो, रोज और उनके पन्द्रह वर्षीय लड़के जोन ने बताया कि कई बार वह उन पर चीजें फेंक देता। बेडरूम का टेलीफोन तो कई बार नीचे गिरा मिलता। बिस्तर के पास लगा लैम्प कभी गिरा हुआ और कभी रोज के माथे पर चोट करता हुआ फेंका जाता। कई कमरों में फर्नीचर दर बदर हुआ मिलता। डेजी के बेडरूम में पड़ी मेज कभी सीढियों पर पडी मिलती। दीवारों पर लगी कई धार्मिक तस्वीरें या तो गायब हो जाती या टी मिलती।भुतहा घर

उस आत्मा का खास निशाना शायद रोज थी। कई बार फ्रिजर का दरवाजा अचानक खुलता और उसके सिर में लग जाती। रात के भोजन के समय अचानक कोई उसका हाथ मोड़ देता, तो कई बार कोई उसे एक तरफ से धक्का देता कि वह गिरते-गिरते बचती। कई बार जो ने भी जांचने का प्रयास किया, उसने देखा कि रोज को अचानक किसी ने बिस्तर से उठा लिया है और हवा में लहराते हुए जमीन पर गिरा दिया। ऐसी घटना के बाद रोज के हाथों और पैरों में ऐसे निशान पड़ जाते जैसे उसको किसी मजबूत हाथों से पकड़ा हो। 

इस घर में आने के करीब दो माह बाद काले कुबड़े की वह आत्मा और हिंसक हो उठी। रोज ने बताया कि जब जो अपनी फैक्ट्री में रात की शिफ्ट में काम करने के लिए घर से रवाना हो जाता तो उसके पीछे बेडरूम की दीवारों पर थपथपाने की जोरदार आवाजें होतीं। बिस्तर फर्श से ऊपर उठने लगता। मैं चिल्लाना चाहती थी और कमरे का दरवाजा खोलना चाहती थी लेकिन मैं कमरे से बाहर नहीं निकल पाती थी। किसी तरह कमरे से निकल जाती तो बच्चों के बेडरूम की तरफ भागती। लेकिन उनके दरवाजे बंद मिलते और कोई अनजान ताकत उसे खींच कर वापस उसके कमरे में पटक देती। अदृश्य हाथ उसका गला घोंटने या खरोंचने लगते। वह किसी तरह जो को फोन करती। वह दौड़ कर घर आता और सीढ़ियां चढ़ कर बेडरूम पर पहुंचता तो बिस्तर को हवा में जमीन से दो फीट ऊपर उठा हुआ और रोज को एक कोने में घबराए हुए खड़ा पाता। 

गौर करने लायक बात यह है कि इतना सब होने पर भी बेरीनी परिवार ने अपना घर नहीं छोड़ा। लेकिन उनका इरादा रसोई की टेबल में गड़ा हुआ है। बेरीनी परिवार को यह लगा कि शायद अब उनका जीवन खतरे में है तो उन्होंने एक महीने के लिए अपना घर छोड़ दिया और अपनी ज्यादातर चीजें स्टोर रूम में बन्द कर दीं। एक बार फिर वे चर्च के पादरी की शरण में गए और उसकी मदद मांगी। वह पादरी उनके घर गया और वहां प्रार्थना की। इसके बाद बेरीनी परिवार अपने घर लौटा। उस काले कुबड़े की आत्मा शायद चली गई थी, क्योंकि उसके बाद वैसी कोई घटना नहीं हुई। सही मायने में भूत-प्रेत की घटनाएं तब रुकी जब जो बेरीनी ने उत्तरी केरोलिना प्रांत स्थित दरहम में बने साइकिल रिसर्च फाउण्डेशन से सारे मामले की जांच कराई। यह संगठन अब अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ पेरासाइक्लोजी के नाम से फ्लोरिडा प्रांत में गेन्सविले नामक स्थान पर काम कर रहा है।

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