अध्याय III, खंड IV, परिचय
अधिकरण सारांश: परिचय
पिछले भाग में विद्याओं पर चर्चा की गई थी, जो ब्रह्म के ज्ञान के साधन हैं । इस भाग में चर्चा की गई है कि क्या ब्रह्म का यह ज्ञान कर्ता के माध्यम से कर्मकांड से जुड़ा है, या क्या यह स्वतंत्र रूप से मनुष्य के उद्देश्य ( पुरुषार्थ ) को पूरा करता है। मनुष्य अपनी इच्छाओं की पूर्ति, कर्तव्यों का निर्वहन, धन प्राप्ति और मुक्ति प्राप्त करने का प्रयास करता है। सवाल यह है कि क्या ब्रह्म का ज्ञान इनमें से किसी भी उद्देश्य को पूरा करता है, या केवल बलिदान के कार्यों से जुड़ा है, जहां तक कि यह कर्ता को एक निश्चित योग्यता प्रदान करता है।
100 Questions based on Rigveda Samhita
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