तवमग्ने दरविणोदा अरंक्र्ते तवं देवः सविता रत्नधासि |
तवं भगो नर्पते वस्व ईशिषे तवं पायुर्दमे यस्तेऽविधत ||
यह मंत्र अग्नि को धन-सृजन, संरक्षण, मार्गदर्शन और गृहस्थ-व्यवस्था का अधिष्ठाता घोषित करता है। यहाँ अग्नि केवल यज्ञाग्नि नहीं, बल्कि आर्थिक-धार्मिक-सामाजिक जीवन की मूल चेतना है।
तवम् अग्ने द्रविणोदा अरंक्रते
तवम् देवः सविता रत्नधासि ।
तवम् भगः नृपते वसु ईशिषे
तवम् पायुः दमे यस्तेऽविधत ॥
तवम् अग्ने – हे अग्नि! तुम ही
द्रविणोदा – धन उत्पन्न करने वाले, समृद्धि के स्रोत
अरंक्रते – कार्य को सिद्ध करने वाले, सक्षम
देवः सविता – प्रेरक, उत्प्रेरक शक्ति (सूर्य-तत्त्व)
रत्नधासि – रत्न/मूल्यवान वस्तुओं को धारण करने वाले
भगः – सौभाग्य, समुचित भाग देने वाला
नृपते – हे मनुष्यों के स्वामी (नेतृत्व का तत्त्व)
वसु ईशिषे – धन-साधनों के नियंत्रक
पायुः – रक्षक
दमे – गृह, समाज, व्यवस्था में
यः ते अविधत – जो तुम्हारे विधान के अनुसार कर्म करता है
👉 🔥 Agni Sukta Mantra 6 the cosmic agni mantra, vedic universe hymn
हे अग्नि!
तुम ही धन उत्पन्न करने वाले
और कार्यों को सिद्ध करने वाले हो।
तुम ही प्रेरक सविता हो
जो मूल्यवान रत्नों को धारण करते हो।
तुम ही भाग्य के नियंता और
धन के स्वामी हो।
जो मनुष्य तुम्हारे विधान के अनुसार
कर्म करता है,
उसके घर और जीवन की
तुम रक्षा करते हो।
द्रविणोदा
धन का अर्थ:
👉 बिना अग्नि (उत्साह, अनुशासन) के धन टिकता नहीं।
Agni 👉 Sukta Mantra 5 Inner Strength guidance
देवः सविता
अग्नि:
👉 आज की भाषा में: Motivational Core / Activation Energy
भगः
भाग्य कोई अंधा संयोग नहीं — वह न्यायपूर्ण वितरण है।
जो कर्म करता है,
उसी को भाग मिलता है।
यस्तेऽविधत
अग्नि रक्षा करती है:
👉 अनुशासित कर्म ही सुरक्षा पाता है।
👉Agni Sukta Mantra 4 Protection & Balance
यह मंत्र आज कहता है:
👉 Sustainable Wealth =
Agni (Energy) + Vidhi (Process) + Karma (Action)
यह मंत्र विशेष रूप से उपयोगी है जब:
यह मंत्र गृहस्थ अग्नि को सुदृढ़ करता है।
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