जीवन का उद्देश्य

दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

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पुनर्जन्म की सच्ची घटना-विदेशों में पुनर्जन्म

 

पुनर्जन्म की सच्ची घटना-विदेशों में पुनर्जन्म 

पुनर्जन्म की सच्ची घटना- विदेशों में पुनर्जन्म 

पुनर्जन्म पर बहस जारी है। इस बारे में अनेकों प्रकार के दिलचस्प उदाहरण प्राप्त हो रहे हैं। थिरीज गे नामक एक मासूम बालिका फ्रांस में जन्मी थी और उसने अपने माता-पिता को तब चौंका दिया जब वह सिर्फ चार महीने की थी। 

उसने एक शब्द कहा, ‘अइख पाई’ इस शब्द पर माता-पिता हंसने लगे। जब उन्होंने विद्वानों से परामर्श किया तो पता चला कि यह संस्कृत भाषा का शब्द अरूप है जिसका अर्थ रूप रहित होता है।

माता-पिता उसे फ्रेन्च सिखाना चाहते थे। किन्तु जब वह दो वर्ष की थी तो अंग्रेजी का उच्चारण करती और जब वह चार वर्ष की हुई तो उसने गांधीजी के विषय में बोलना शुरू कर दिया। वह उन्हें बापू कहकर सम्बोधित करती। उसने बोअर युद्ध (दक्षिणी अफ्रीका) की अनेक घटनाओं का जिक्र किया तथा यह भी बतलाया कि वह भारत निवासिनी है जो अफ्रीका में मरी और फ्रांस में जन्मी। 

कनाडा की भी एक घटना पुनर्जन्म से सम्बन्धित है। वहां की एक महिला ने बतलाया कि जब वह मोटर से अपने पति के साथ जा रही थी तो रास्ते में स्मिथ फॉल्स नामक नगर पड़ा, जिसका महिला ने बेधड़क वर्णन करना आरम्भ कर दिया। उनके पतिदेव यह जानते थे कि उनकी पत्नी इससे पहले तो कनाडा कभी भी नहीं आई। अत: उन्हें स्मिथ फाल्स के वर्णन से आश्चर्य होने लगा। पतिदेव को तब तो और भी अधिक आश्चर्य हुआ जब उसने उस नगर के मुख्य बाजार का भी वर्णन किया। उसने जिस किराने की दुकान तथा बैंक का वर्णन किया था वह सत्य निकला। 

पुनर्जन्म की सच्ची घटना

एक अन्य घटना थाइलैण्ड की है। बौद्ध भिक्षु थाइलैण्ड के नाखोन सावने नामक गांव में दाखिल हुआ। अपने साथियों से गांव के बीचोंबीच के हिस्से का वर्णन करते हुए उसने कहा कि वह पचास वर्ष पूर्व यहीं मरा था। उसने तत्काल अपने शव को जलाने की रस्म को भी देखा था। उसका नाम ‘फ्रा’ था। 

श्रीलंका में भी एक ऐसी घटना प्रकाश में आई, जिससे वहां पुनर्जन्म विषयक धारणा का ज्ञान होता है। 1963 में रूबी नामक लड़की का जन्म श्रीलंका के बाटामोला नामक गांव में हुआ था। उसका बाप डाकिया था।

रूबी ने बचपन से ही बतलाना आरम्भ कर दिया कि वह पूर्वजन्म में लड़का थी। उसका पूर्वजन्म का घर अलूथवाला नामक गांव में था, जो यहां से लगभग पांच मील की दूरी पर है। उसने अपनी मां तथा अन्य परिवार वालों के नाम भी बतलाए। क्यूबा के हवाना नामक नगर में तीन वर्ष के एक लड़के ने अपनी मां को बतलाया कि वह उसकी असली मां नहीं है। उसकी असली मां तो कम्पानारियो नामक नगर के 69 नम्बर के मकान में रहती है। उसके दो भाई तथा एक बहन भी हैं|

उसने अपने भाइयों के नाम मरसिडीज तथा जीन बतलाए और बहन का नाम लीला बतलाया। जब उसके पिता ने विशेष जानकारी के लिए अपने पुत्र सहित कम्पानारियो के लिए प्रस्थान किया तो उन्हें तब हैरानी हुई जब छोटा सा बच्चा सेकें न केवल घर और गली को पहचान गया बल्कि अपने पूर्व जन्म की मां से भी लिपट कर रोने लगा और जब वह वहीं रहने की जिद करने लगा तो उसके पिता को काफी परेशानी हुई। 

कुछ दिनों पूर्व आस्ट्रेलिया में भी एक घटना का समाचार मिला था कि वहां के अर्नेस्ट ब्रिग नामक व्यक्ति को मिश्र प्रदेश में अपने पूर्व जन्म की स्पष्ट याद है। अमेरिका की एक महिला रोअन वर्ग अक्सर अपने मुंह से जैन शब्द का प्रयोग करती थी। किन्तु वह स्वयं भी जैन शब्द का अर्थ नहीं जानती थी। एक बार जब संयोगवश वह वहां किसी जैन धर्म सम्बन्धी गोष्ठी में भाग लेने गई तो अपने को पूर्व जन्म में भारत के जैन मन्दिर की प्रवासिनी बतलाने लगी। 

तुर्की के इस्ताबूल नामक नगर में एक बच्चे ने कहना शुरू किया, ‘मैं अपने बाल बच्चों के पास जाना चाहता हूं। यहां पर परेशान हूं।’ अबोध बच्चे के मुंह से ऐसी बात सुनकर सभी को आश्चर्य हुआ। इस्माइल अपने पूर्व जन्म की सारी बातें तीन वर्ष की अवस्था में ही बतलाने लगा था। 

इन घटनाओं में कितना सत्य है और इनका कितना महत्व है यह तो समाज विज्ञानी तथा परामनोविज्ञानवेत्ता ही बतला सकेंगे। 


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