जीवन का उद्देश्य

दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

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रावन के रूप को अमर करने वाले अरविंद तिवारी

अरविंद त्रिवेदी। इस नाम से आप भले ही अच्छी तरह से वाकिफ ना हों, लेकिन इनके निभाए रावण के किरदार को आप बहुत अच्छी तरह से जानते होंगे। कोरोना वायरस के चलते जब सरकार को मजबूरी में सारे देश में लॉकडाउन लगाना पड़ा तो दूरदर्शन पर भी 33 साल बाद फिर से रामायाण का प्रसारण करने का फैसला लिया गया। रामायण जब दूरदर्शन पर फिर से आई तो एक बार फिर से टीआरपी के सभी रिकॉर्ड्स टूट गए। 

देशभर में रामायण और इसके कलाकारों की चर्चा होने लगी। और लोगों को रामायण में रावण का किरदार निभाने वाला ये कलाकार भी याद आया, जिसकी बराबरी टीवी की दुनिया का कोई और रावण नहीं कर पाया। इनका नाम है अरविंद त्रिवेदी और आज हम आपको रामायण में इनके रावण बनने का दिलचस्प किस्सा बताएंगे। यकीनन आपको अरविंद त्रिवेदी का ये किस्सा बेहद पसंद आने वाला है। 

अरविंद त्रिवेदी का शुरूआती जीवन

अरविंद त्रिवेदी का जन्म 8 नवंबर 1938 को इंदौर में हुआ था। इनके पिता का नाम जेठालाल त्रिवेदी था और वो मूलरूप से गुजराती थे। इनके भाई उपेंद्र त्रिवेदी भी इनकी तरह ही एक एक्टर हैं और उन्होंने कई हिंदी और गुजराती फिल्मों में काम किया है। साथ ही रंगमंच की दुनिया से भी उपेंद्र त्रिवेदी जुड़े रहे हैं। बड़े भाई के नक्शे कदम पर चलते हुए अरविंद त्रिवेदी भी फिल्मों की दुनिया में एक्टिव हुए और इन्होंने भी शुरूआत में थिएटर में काम किया। उसके बाद ये फिल्मी दुनिया में उतरे और इन्होंने भी कई हिंदी और गुजराती फिल्मों में काम किया। गुजराती फिल्मों में अरविंद और इनके भाई उपेंद्र को खूब सफलता मिली।

जब रामायण का हिस्सा बनने मुंबई पहुंचे अरविंद त्रिवेदी

फिल्मों के साथ-साथ अरविंद टीवी की दुनिया में भी एक्टिव हुए और इन्होंने सबसे पहले काम किया दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले बेहद मशहूर शो विक्रम और बेताल में। ये टीवी शो 1985 में दूरदर्शन पर प्रसारित होना शुरू हुआ था। 1987 में जब इन्हें मालूम चला कि रामानंद सागर रामायण बना रहे हैं और उसमें फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े और दिग्गज कलाकार काम कर रहे हैं तो इनके दिल में भी रामायण का हिस्सा बनने की ख्वाहिश जगी। उन दिनों अरविंद त्रिवेदी गुजरात में थे और रामायण में केवट का रोल करने के लिए ये ऑडिशन देने के लिए मुंबई निकल पड़े।

अमरीश पुरी बनने वाले थे रावण

तब तक अरुण गोविल भगवान राम के किरदार निभाने के लिए चुन लिए गए थे। अरुण गोविल ने रामानंद सागर को रावण के किरदार के लिए अमरीश पुरी का नाम सुझाया था। रामानंद सागर भी अमरीश पुरी को ही रावण के रोल के लिए कास्ट करना चाहते थे। लेकिन अमरीश पुरी ने ये रोल करने से इन्कार कर दिया। अमरीश पुरी के इन्कार करने की दो वजहें थी। पहली ये, कि अमरीश पुरी उन दिनों विलेन के तौर पर सफल होना शुरू हुए थे। जबकी वो दौर टीवी के लिए एक नया दौर था। अमरीश पुरी खुद को टीवी के दायरे में नहीं बांधना चाहते थे। और दूसरी वजह थी फिल्मों से मिलने वाला पैसा। रामायण सागर अमरीश पुरी को जो ऑफर दे रहे थे, अमरीश पुरी को वो पसंद नहीं आ रहा था। तो इस तरह अमरीश पुरी रामायण का हिस्सा बनने से रह गए।

इस तरह अरविंद त्रिवेदी बने रावण

अरविंद त्रिवेदी मुंबई आए और सीधा रामानंद सागर के ऑफिस पहुंचे। रामानंद सागर ने अरविंद त्रिवेदी का ऑडिशन शुरू किया और उन्हें स्क्रिप्ट पढ़ने को दी। अरविंद त्रिवेदी ने वो स्क्रिप्ट पढ़नी शुरू की और जब अरविंद त्रिवेदी ने वो स्क्रिप्ट पढ़कर खत्म की तो ऑडिशन रूम में सन्नाटा पसर गया। अरविंद को लगा कि शायद रामानंद सागर को उनका ऑडिशन पसंद नहीं आया। एक असिस्टेंट को स्क्रिप्ट लौटाकर अरविंद त्रिवेदी वापस जाने लगे। उन्हें जाता देख रामानंद सागर अपने केबिन से उठकर आए और बोले मुझे लंकेश मिल गया। अब तुम रामायण में लंकेश का किरदार निभाओगे।

ये बोले थे रामानंद सागर

रामानंद सागर की ये बात सुनकर अरविंद त्रिवेदी हैरान थे। उनकी हैरानगी देखकर रामानंद सागर बोले तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज देखकर मैं समझ गया था कि तुम रावण के रोल के लिए एकदम परफेक्ट हो। वो रामायण के किरदार के लिए एक ऐसा एक्टर तलाश रहे थे. जो ना केवल बुद्धिमान दिखता हो, बल्कि बलवान भी नज़र आता हो। इत्तेफाक से तुम्हारे अंदर ये सारी खूबियां हैं। इसलिए तुम ही रामनायण में रावण बनोगे। और इस तरह अरविंद त्रिवेदी रामायण का हिस्सा बने।

ऐसी है इनकी निजी ज़िंदगी

अगर इनकी निजी ज़िंदगी के बारे में बात करें तो अरविंद त्रिवेदी ने 12वीं तक की अपनी पढ़ाई मुंबई के भावन्स कॉलेज से की थी। 4 जून 1966 को इनकी शादी हो गई। इनकी पत्नी का नाम नलिनी है। इनकी तीन बेटियां हुई। अपने एक्टिंग करियर में अरविंद जी ने 300 से भी ज़्यादा हिंदी और गुजराती फिल्मों में काम किया है। 

राजनीति में भी चमके अरविंद

अरविंद त्रिवेदी ने राजनीति में भी अपने कदम रखे। साल 1991 के चुनावों में ये भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गुजरात की साबरकाठा लोकसभा सीट से जीतकर सांसद भी बने। 2002 में वाजपेयी सरकार में अरविंद त्रिवेदी को सीबीएफसी यानि सेंट्रल बोर्ड फॉर फिल्म सर्टिफिकेशन का चेयरमैन भी बनाया गया। इस पद पर ये एक साल से कुछ फालतू समय तक रहे। गुजराती सिनेमा में इनके शानदार योगदान के लिए गुजरात प्रदेश सरकार की तरफ से 7 बार बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड भी दिया गया। छह अक्टूबर 2021 के दिन 82 साल की उम्र में अरविंद त्रिवेदी जी का निधन हो गया। #ArvindTrivedi #ravan

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