जीवन का उद्देश्य

दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

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लक्ष्मीपति बालाजी।

लक्ष्मीपति बालाजी। टीम इंडिया का एक मुस्कुराता हुआ चेहरा। कितनी भी स्ट्रैस भरी सिचुएशन हो, चेहरे पर हमेशा तैरती मुस्कान। जी हां, ये थे लक्ष्मीपति बालाजी, जिनके चाहने वालों में भारत ही नहीं, दुश्मन देश पाकिस्तान में भी लंबी फेहरिस्त थी। टीम इंडिया में इनकी एंट्री हुई थी 2002 में। लेकिन इन्हें पहचान मिलनी शुरू हुई थी 2004 में। ये वो वक्त था जब कई सालों बाद टीम इंडिया पाकिस्तान टूर पर गई थी। 

उस वक्त के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान जाने वाली भारतीय टीम के खिलाड़ियों के साथ एक घंटा बिताया था। तब वाजपेयी जी ने टीम इंडिया को तोहफे में एक बैट दिया था, जिस पर लिखा था कि खेल ही नहीं, दिल भी जीतिए। लक्ष्मीपति बालाजी के दिल में शायद वाजपेयी जी की यही बात घर कर गई थी। 

कौन भुला पाएगा वो दिन? 

भारत-पाक के बीच खेली गई 5 मैचों की वनडे सीरीज़ 2-2 से बराबरी पर थी। लाहौर में सीरीज़ का फाइनल 24 मार्च 2004 को खेला जाना था। सीरीज़ पर कब्जा करने के लिए दोनों टीमें आतुर थी। लाहौर का गद्दाफी स्टेडियम पूरा भरा हुआ था। पाकिस्तान के अलावा भारत और दुनिया के कई अन्य देशों से लोग इस सबसे बड़ी क्रिकेट की जंग को देखने के लिए पहुंचे थे। उस मैच में भारत ने पहले बैटिंग की और 293 रन बना दिए। फिर पाकिस्तानी इनिंग के दौरान जो हुआ, वो इतने साल बाद भी क्रिकेटर्स को हंसा देता है।

बिजली खड़ी यहां बिजली खड़ी 

बालाजी का एक्शन बेहद सिंपल था। इनका एक्शन क्विक आर्म एक्शन था। हाथों में गेंद लिए बालाजी स्टंप्स पर निशाना लगाने के लिए तैयार थे। बालाजी जितना तेज अपना रनअप करते, उतनी ही तेज गद्दाफी स्टेडियम्स के स्टैंड्स से आवाज़ें आने लगी। पूरे स्टेडियम में एक ऐसी आवाज़ गूंज रही थी जिसने भारतीय फील्डरों को भी हंसने पर मजबूर कर दिया। पाकिस्तानी दर्शक बालाजी के लिए चिल्ला रहे थे, बालाजी ज़रा धीरे चलो। बिजली खड़ी यहां बिजली खड़ी।

बालाजी की मुस्कुराहट का राज़

उस फाइनल मुकाबले को भारत ने जीता था। मैच के साथ ही भारत ने ये सीरीज़ भी अपने नाम कर ली थी। लेकिन भारत जैसे दुश्मन देश से हारने के बाद भी पाकिस्तानी जनता दुखी नहीं थी, क्योंकि बालाजी उनका दिल चुरा चुके थे। मैच के बाद होने वाली अवार्ड सेरेमनी में जब सांवली काया वाले बालाजी के दांत स्क्रीन पर आते ही लाहौर का गद्दाफी स्टेडियम सीटीयों और तालियों से गूंज उठता। बता दें कि बालाजी के दातों का ऑपरेशन उनके बचपन में हुआ था। इस ऑपरेशन की वजह से उनका चेहरा देखकर हमेशा यही लगता था कि वो मुस्कुरा रहे हैं।

दीवानी हो गई पाकिस्तानी हसीनाएं

पाकिस्तान की कई खूबसूरत लड़कियां बालाजी को शादी के लिए प्रपोज करने आई। ये लड़कियां बालाजी के पोस्टर्स साथ लाती थी और उन पोस्टर्स पर अपने दिल की बातें भी लिख कर लाती थी। उस सीरीज़ के आखिरी दो मैचों में बालाजी ने 5-5 विकेट लिए थे। इतना ही नहीं, बालाजी ने शोएब अख्तर जैसे तूफानी गेंदबाज की गेंद पर एक लंबा छक्का भी लगाया था।

चोटों ने तबाह किया करियर

यूं तो बालाजी को कमबैक का बादशाह कहा जा सकता है लेकिन चोटें बालाजी के करियर में उनकी सबसे बड़ी दुश्मन साबित हुई। अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर में बालाजी ने कुल 30 वनडे मैच, 5 टी20 मैच और 8 टेस्ट मैच ही खेले। बालाजी लगातार 2 सालों तक टीम इंडिया की टेस्ट टीम का हिस्सा बने रहे। लेकिन वनडे क्रिकेट में वो टीम में आते-जाते रहते थे। लेकिन स्ट्रैस फ्रैक्चर के चलते 2005 में बालाजी को तीन सालों तक मैदान से बाहर रहना पड़ा।

आईपीएल में की थी वापसी

फिर बालाजी ने 2008-2009 में आईपीएल में वापसी कर बढ़िया गदर मचाया। बालाजी ने आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए खेला था। उन्होंने अपनी टीम के लिए किंग्स इलेवन के खिलाफ हुए एक मैच में 24 रन देकर 5 विकेट भी लिए थे। इन 5 विकटों में एक हैट्रिक भी थी। यानि आईपीएल के इतिहास में सबसे पहली हैट्रिक लेने वाले गेंदबाज बालाजी ही हैं।

फिर ले लिया संन्यास

आईपीएल में बालाजी के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए  2012 में एक बार फिर इन्हें वर्ल्ड टी20 में खेलने का मौका दिया गया। बालाजी ने भी खुद को साबित किया और टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उस टूर्नामेंट में बालाजी को 9 विकेट हासिल हुए थे। और आखिरकार इसी साल बालाजी ने इंटरनेशनल क्रिकेट से दूरी बना ली और संन्यास की घोषणा कर दी। #LBalaji #LakshmipathyBalaji

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