जीवन का उद्देश्य

दुःखजन्मप्रवृत्तिदोषमिथ्याज्ञानानामुत्तरोत्तरापाये तदनन्तरापायादपवर्गः II1/1/2 न्यायदर्शन अर्थ : तत्वज्ञान से मिथ्या ज्ञान का नाश हो जाता है और मिथ्या ज्ञान के नाश से राग द्वेषादि दोषों का नाश हो जाता है, दोषों के नाश से प्रवृत्ति का नाश हो जाता है। प्रवृत्ति के नाश होने से कर्म बन्द हो जाते हैं। कर्म के न होने से प्रारम्भ का बनना बन्द हो जाता है, प्रारम्भ के न होने से जन्म-मरण नहीं होते और जन्म मरण ही न हुए तो दुःख-सुख किस प्रकार हो सकता है। क्योंकि दुःख तब ही तक रह सकता है जब तक मन है। और मन में जब तक राग-द्वेष रहते हैं तब तक ही सम्पूर्ण काम चलते रहते हैं। क्योंकि जिन अवस्थाओं में मन हीन विद्यमान हो उनमें दुःख सुख हो ही नहीं सकते । क्योंकि दुःख के रहने का स्थान मन है। मन जिस वस्तु को आत्मा के अनुकूल समझता है उसके प्राप्त करने की इच्छा करता है। इसी का नाम राग है। यदि वह जिस वस्तु से प्यार करता है यदि मिल जाती है तो वह सुख मानता है। यदि नहीं मिलती तो दुःख मानता है। जिस वस्तु की मन इच्छा करता है उसके प्राप्त करने के लिए दो प्रकार के कर्म होते हैं। या तो हिंसा व चोरी करता है या दूसरों का उपकार व दान आदि सुकर्म करता है। सुकर्म का फल सुख और दुष्कर्मों का फल दुःख होता है परन्तु जब तक दुःख सुख दोनों का भोग न हो तब तक मनुष्य शरीर नहीं मिल सकता !

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MK PANDEY PRESIDNT OF GVB

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आरोप

👉 आरोप

 

🔶 एक युगल को शादी के 11 साल बाद एक लड़का हुआ। उनका लड़का उनकी आँखों का तारा था। एक सुबह, आदमी को काम पर जाने के लिए देरी हो रही थी जाते - जाते उसने कमरे में एक दवाई की बोतल खुली देखी, उसने अपनी पत्नी से उस बोतल को ढक्कन लगा कर अलमारी में रखने को कहा, लड़के की मम्मी रसोई घर में तल्लीन थी, वह ये बात पूरी तरह से भूल गयी थी।

 

🔷 लड़का जो तक़रीबन 2 साल का था कमरे में खेलते-खेलते वह बोतल देखी और उस बोतल की ओर गया, उसने उसमें की पूरी दवाई पी ली। उस दवाई की ज्यादा मात्रा छोटे बच्चों को जहरीली हो सकती थी। दवाई पीने के बाद वह लड़का बेहोश हो गया, उसकी मम्मी उसे जल्द से जल्द अस्पताल ले गयी जहाँ उसकी मौत हो गयी। उसकी मम्मी पूरी तरह से हैरान हो गयी थी, वह भयभीत हो गयी थी, की कैसे वह अब अपने पति का सामना करेंगी?

 

🔶 जब लड़के के परेशान पिता अस्पताल में आये तो उन्होंने अपने बेटे को मृत पाया और अपनी पत्नी और देखते हुए सिर्फ चार शब्द कहे। आपको क्या लगता है कौन से होंगे वह चार शब्द?

 

🔷 पति ने सिर्फ इतना ही कहा- “ I Love You Darling”। उसके पति का अनपेक्षित व्यवहार आश्चर्यचकित करने वाला था, उसका लड़का मर चूका था, वह उसे कभी वापिस नहीं आ सकता था, और वह अपनी पत्नी में भी कोई कसूर नहीं ढूंढ रहा था क्योंकि वह सोच रहा था की अगर उसने खुद वह बोतल उठा के बाजू में रख दी होती तो आज उसके साथ यह सब न होता।

 

🔶 वह किसी पर भी आरोप नहीं लगा रहा था, क्योंकि उसकी पत्नी ने भी अपना इकलौता बेटा खो दिया था। उस समय उसे सिर्फ अपने पति से सहानुभूति और दिलासा चाहिये थी। और यही उसके पति ने उस समय उसे दिया।

 

🔷 मित्रों कभी-कभी हम इसी में समय व्यर्थ कर देते है की परिस्थिति के लिए कौन जिम्मेदार है या कौन आरोपी है, ये सब हमारे आपसी रिश्तों  में होता है, जहाँ काम करते है वहाँ या जिन लोगों को हम जानते है उन सभी के साथ होता है, और परिस्थिति के आवेश में आकर हम अपने रिश्तों को भूल जाते है और एक दूसरे का सहारा बनने के बजाये एक दूसरे पर आरोप लगाते है।

 

🔶 कुछ भी हो जाये, हम उस व्यक्ति को कभी भी नहीं भूल सकते जिसे हम प्रेम करते है, इसीलिए जीवन में जो आसान है उसे प्रेम करो।

 

🔷 आपके पास अभी जो है उसे जमा करो, और अपनी तकलीफों को विचार कर-कर के बढ़ाने के बजाये उन्हें भूल जाओ। उन सभी चीजों का सामना करो जो आपको अभी मुश्किल लगती है या जिनसे आपको डर लगता है सामना करने के बाद आप देखोगे के वह चीजें उतनी मुश्किल नहीं है जितना की आप पहले सोच रहे थे। हमें परिस्थिति को समझकर ही लोगों के साथ व्यवहार करना चाहिये, और कठिन परिस्थितियों में उनका हमदर्द बनना चाहिये। 

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