अधिकांश दर्शनों में Liberation (मोक्ष) को मृत्यु के बाद प्राप्त होने वाली किसी अवस्था की तरह प्रस्तुत किया गया है।
Traita-vāda इस धारणा को जड़ से बदल देता है।
Traita-vāda के अनुसार:
Liberation is not escape from life, it is clarity within life.
मोक्ष जीवन से भागना नहीं, जीवन को स्पष्ट रूप से देख पाना है।
यह कोई स्थान नहीं है, कोई लोक नहीं है, बल्कि एक स्थिति (state of awareness) है।
Traita-vāda में मुक्ति को समझने के लिए पहले यह समझना आवश्यक है कि बंधन (bondage) क्या है।
बंधनों के तीन स्तर हैं:
जब तक ज्ञान को हम “मेरे पास है” कहते हैं, तब तक वही सबसे बड़ा बंधन बन जाता है।
यहाँ Traita-vāda एक गहरी बात कहता है:
Knowledge itself becomes ignorance when it is possessed.
ज्ञान जब संग्रह बन जाता है, तब अज्ञान बन जाता है।
मोक्ष का अर्थ “सब जान लेना” नहीं है, बल्कि
ज्ञान के साथ तादात्म्य का टूट जाना है।
यही कारण है कि ऋषियों को मंत्रद्रष्टा कहा गया,
मंत्रकर्ता नहीं।
Traita-vāda में अंतिम लक्ष्य है:
To remain a Witness (साक्षी) without withdrawal from life
यह साक्षी:
बल्कि सबको देखता है, बिना उलझे।
यही साक्षी-चेतना धीरे-धीरे मुक्ति बन जाती है।
परंपरागत सोच में कर्म और मोक्ष विरोधी लगते हैं।
Traita-vāda कहता है:
Liberation is not freedom from action, but freedom in action.
जब कर्म:
तब वही कर्म बंधन नहीं, साधना बन जाता है।
Traita-vāda किसी स्थायी स्वर्ग या नरक को अंतिम सत्य नहीं मानता।
क्यों?
क्योंकि:
दोनों ही मन की अवस्थाएँ हैं।
मुक्ति वह अवस्था है जहाँ:
सुख–दुःख आते-जाते हैं,
पर देखने वाला अडिग रहता है।
Traita-vāda का सबसे व्यावहारिक योगदान है
Jīvan-Mukta की अवधारणा।
जीवन-मुक्त व्यक्ति:
लेकिन भीतर से:
Unattached, clear, and free
यही कारण है कि Traita-vāda मोक्ष को
post-death reward नहीं,
present-moment realization मानता है।
Traita-vāda का अंतिम लक्ष्य बहुत सरल है:
बस:
Seeing clearly without distortion
यही clarity धीरे-धीरे:
और अंततः मुक्ति।
यह दर्शन कहता है:
True liberation integrates body, mind, and knowledge instead of rejecting them.
यही कारण है कि Traita-vāda:
बल्कि पूर्ण जीवन दर्शन है।
यदि मुक्ति एक आंतरिक स्पष्टता है,
तो प्रश्न उठता है:
क्या Traita-vāda को रोज़मर्रा के जीवन में जिया जा सकता है?
इसी प्रश्न का उत्तर देगा
Chapter 10 – Integrating Traita-vāda into Daily Life
जहाँ दर्शन, जीवन-पद्धति बन जाता है।
Traita-vāda में मोक्ष कोई अंतिम मंज़िल नहीं, बल्कि हर क्षण की जागरूकता है।
0 टिप्पणियाँ