अथर्ववेदः/काण्डं १/सूक्तम् १०

अयं देवानामसुरो - श्लोक 1

अयं देवानामसुरो - श्लोक 1

अयं देवानामसुरो वि राजति वशा हि सत्या वरुणस्य राज्ञः। ततस्परि ब्रह्मणा शाशदान उग्रस्य मन्योरुदिमं नयामि ॥१॥
Hindi:
यह देवताओं में श्रेष्ठ, सत्य और वरुण के नियमों के अधीन है। मैं इसे ब्रह्म की शक्ति से और उग्र स्वरूप में मार्गदर्शन देता हूँ।

English:
This is the chief among the gods, governed by truth and the rule of Varuna. I guide it with the power of Brahma in its fierce form.

Word by Word:
अयं = यह | देवानाम् = देवताओं का | असुरः = श्रेष्ठ | वि राजति = शासित है | वशा = नियमों के अधीन | हि = निश्चय ही | सत्या = सत्य | वरुणस्य = वरुण का | राज्ञः = राज्य / नियम | ततस् = इसके द्वारा | अपरी = परिपूर्ण | ब्रह्मणा = ब्रह्म की शक्ति से | शाशदान = स्थिर / मार्गदर्शन | उग्रस्य = उग्र | मन्योरुदिमं = इसे मार्गदर्शन करना | नयामि = मैं मार्गदर्शन करता हूँ
नमस्ते रजन् वरुणास्तु मन्यवे विश्वं ह्युग्र निचिकेषि द्रुग्धम्। सहस्रमन्यान् प्र सुवामि साकं शतं जीवाति शरदस्तवायम् ॥२॥
Hindi:
नमस्कार वरुण के लिए। हे मन्यवे, तुम विश्व को नियंत्रित करते हो। मैं तुम्हें हजारों अन्यों के साथ शुभकामनाएँ देता हूँ।

English:
Salutations to Varuna. O Manya, you govern the universe. I offer you blessings along with thousands of others.

Word by Word:
नमस्ते = नमस्कार | रजन् = हे राजा / देवता | वरुणाः = वरुण | अस्तु = हो | मन्यवे = मन्यवे | विश्वं = विश्व | हि = वास्तव में | उग्र = शक्तिशाली | निचिकेषि = नियंत्रित करते हो | द्रुग्धम् = पूरी तरह | सहस्रम् = हजार | अन्यान् = अन्य | प्र = साथ | सुवामि = शुभकामनाएँ देता हूँ | साकं = साथ | शतं = शत | जीवाति = जीवित रहे | शरदः = शुभ | तवायम् = तुम्हारे लिए
यदुवक्थानृतं जिह्वया वृजिनं बहु। राज्ञस्त्वा सत्यधर्मणो मुञ्चामि वरुणादहम् ॥३॥
Hindi:
जो झूठ मैंने अपनी वाणी से कहा, उसे मैं छोड़ देता हूँ। हे सत्यधर्मी राजा, मैं वरुण की सत्ता के अधीन हूँ।

English:
Whatever falsehood I spoke with my tongue, I now release. O king of righteousness, I am under the authority of Varuna.

Word by Word:
यद् = जो | उवक्थ = कहा | आनृतं = झूठ | जिह्वया = जीभ से | वृजिनं = त्यागता हूँ | बहु = बहुत | राज्ञः = राजा | त्वा = तुम | सत्यधर्मणः = सत्यधर्मी | मुञ्चामि = मैं छोड़ता हूँ | वरुणात् = वरुण से | अहम् = मैं
मुञ्चामि त्वा वैश्वानरादर्णवान् महतस्परि। सजातान् उग्रेहा वद ब्रह्म चाप चिकीहि नः ॥४॥
Hindi:
मैं तुम्हें वैश्वानर और महाशक्ति के अधीन छोड़ देता हूँ। हे ब्रह्म, उग्र शक्तियों को नियंत्रित करो और हमें मार्ग दिखाओ।

English:
I release you under Vaishvanara and great power. O Brahma, control the fierce energies and guide us.

Word by Word:
मुञ्चामि = मैं छोड़ता हूँ | त्वा = तुम्हें | वैश्वानरात् = वैश्वानर से | अर्णवान् = महाशक्ति | महत् = महान | स्परि = शक्ति | सजातान् = समान जाति के | उग्रे = उग्र | हः = है | वद = कहो / नियंत्रित करो | ब्रह्म = ब्रह्म | चाप = तथा | चिकीहि = मार्ग दिखाओ | नः = हमारे लिए

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