अथर्ववेदः/काण्डं १/सूक्तम् ०८

इदं हविर्यातुधानान् - श्लोक 1

इदं हविर्यातुधानान् - श्लोक 1

इदं हविर्यातुधानान् नदी फेनमिवा वहत्। य इदं स्त्री पुमान् अकरिह स स्तुवतां जनः ॥१॥
Hindi:
यह हवन राक्षसों को बहाती नदी की तरह है। जिसने भी स्त्री या पुरुष ने इसे नहीं किया, वही स्तुति योग्य है।

English:
This oblation flows over the demons like a foaming river. He who has not performed it, whether man or woman, is worthy of praise.

Word by Word:
इदं = यह | हविर्यातुधानान् = हवन राक्षस | नदी = नदी | फेनमिवा = जैसे फेन / foam | वहत् = बहती | यः = जो | इदं = यह | स्त्री = महिला | पुमान् = पुरुष | अकरिह = नहीं किया | स = वह | स्तुवतां = स्तुति योग्य | जनः = व्यक्ति
अयं स्तुवान आगमदिमं स्म प्रति हर्यत । बृहस्पते वशे लब्ध्वाग्नीषोमा वि विध्यतम् ॥२॥
Hindi:
यह स्तुतिमय अगम इसी स्मृति में प्रकट होता है। बृहस्पति के वश में, अग्नि और सोम से इसे विधिवत् प्राप्त किया जाए।

English:
This praise arises in memory. Under Brihaspati’s control, it is to be properly obtained through Agni and Soma.

Word by Word:
अयं = यह | स्तुवान् = स्तुति करने योग्य | आगमदिमं = प्रकट होना | स्म = स्मृति में | प्रति हर्यत = प्रकट होता है | बृहस्पते = बृहस्पति के वश में | वशे = अधिकार | लब्ध्वा = प्राप्त किया | अग्नी = अग्नि | सोम = सोम | वि विध्यतम् = विधिवत्
यातुधानस्य सोमप जहि प्रजां नयस्व च । नि स्तुवानस्य पातय परमक्ष्युतावरम् ॥३॥
Hindi:
हे सोम, यातुधान के शत्रु को नष्ट करो और उसकी प्रजा को मार्ग दिखाओ। इस स्तुति के द्वारा उच्चतम फल प्राप्त हो।

English:
O Soma, destroy the demons’ enemies and lead their subjects. Through this praise, achieve the highest results.

Word by Word:
यातुधानस्य = राक्षसों का | सोमप = सोम से | जहि = नष्ट करो | प्रजां = प्रजा | नयस्व = मार्ग दिखाओ | च = और | नि स्तुवानस्य = इस स्तुति से | पातय = प्राप्त करो | परमक्ष्युतावरम् = उच्चतम फल
यत्रैषामग्ने जनिमानि वेत्थ गुहा सतामत्त्रिणां जातवेदः । तांस्त्वं ब्रह्मणा वावृधानो जह्येषां शततर्हमग्ने ॥४॥
Hindi:
हे अग्नि, जहां इनके लिए जन्मस्थान ज्ञात हैं, वहां इन राक्षसों को ब्रह्मण की शक्ति से नष्ट करो।

English:
O Agni, where their births are known, destroy these demons with the power of Brahma.

Word by Word:
यत्र = जहां | एषाम् = इनके | अग्ने = हे अग्नि | जनिमानि = जन्मस्थान | वेत्थ = ज्ञात | गुहा = गुप्त | सताम् = उनके | अत्त्रिणां = राक्षसों | जातवेदः = जातवेद / Agni | तान् = उन्हें | त्वम् = तुम | ब्रह्मणा = ब्रह्म की शक्ति | वावृधानः = नष्ट करो | जह्येषां = नष्ट करने के लिए | शततर्हम् = उच्चतम परिणाम | अग्ने = हे अग्नि

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