अथर्ववेदः/काण्डं १/सूक्तम् ०७

स्तुवानमग्न - श्लोक 1

स्तुवानमग्न आ वह यातुधानं - श्लोक 1

स्तुवानमग्न आ वह यातुधानं किमीदिनम् । त्वं हि देव वन्दितो हन्ता दस्योर्बभूविथ ॥१॥
Hindi:
हे अग्नि, आज क्यों वह यातुधान (राक्षस) तुम्हारे सामने आया? तुम तो देवों द्वारा पूजित और दस्युओं का संहार करने वाले हो।

English:
O Agni, why has the demon come today? You are revered by the gods and the destroyer of enemies.

Word by Word:
स्तुवानम् = स्तुत / praised | अग्न = अग्नि | आ वह = आया | यातुधानम् = राक्षस | किमीदिनम् = आज | त्वं = तुम | हि = निश्चय ही | देव = देवों द्वारा | वन्दितः = पूजित | हन्ता = हानिकारक / destroyer | दस्युः = शत्रु | अभूविथ = हुआ
आज्यस्य परमेष्ठिन् जातवेदस्तनूवशिन् । अग्ने तौलस्य प्राशान यातुधानान् वि लापय ॥२॥
Hindi:
हे अग्नि, आज्य के परमेष्ठी और शक्ति-संपन्न जातवेद तुम्हारे शरीर में विराजमान हैं। उन यातुधानों का संहार करो।

English:
O Agni, the supreme Jataveda, powerful like the high priest, resides within you. Destroy the demons.

Word by Word:
आज्यस्य = आज्य / high priest | परमेष्ठिन् = परम श्रेष्ठ | जातवेदः = आग्नेय शक्ति / Jataveda | तनूवशिन् = शरीर में विराजमान | अग्ने = हे अग्नि | तौलस्य = शक्ति | प्राशान = संहार | यातुधानान् = राक्षसों | वि लापय = नाश कर दो
वि लपन्तु यातुधाना अत्त्रिणो ये किमीदिनः । अथेदमग्ने नो हविरिन्द्रश्च प्रति हर्यतम् ॥३॥
Hindi:
हे अग्नि, आज जो भी यातुधान उत्पन्न हुए हैं, उन्हें नष्ट करो और हमारा हवन सफल हो।

English:
Let the demons that have appeared today be destroyed, O Agni, and may our sacrifice be successful.

Word by Word:
विलपन्तु = नष्ट करो | यातुधानाः = राक्षस | अत्रिणः = यहां / उत्पन्न | ये = जो | किमीदिनः = आज | अथ = और | एतद् = यह | अग्ने = हे अग्नि | नो = हमारा | हव्यः = हवन / sacrifice | इन्द्रः = इन्द्र | प्रति हर्यतम् = सफलता के लिए
अग्निः पूर्व आ रभतां प्रेन्द्रो नुदतु बाहुमान् । ब्रवीतु सर्वो यातुमान् अयमस्मीत्येत्य ॥४॥
Hindi:
हे अग्नि, पूर्व से ही इन्द्र की शक्ति तुम्हारे साथ है, सभी राक्षसों को नष्ट करो।

English:
O Agni, the power of Indra has been with you from the beginning; destroy all demons.

Word by Word:
अग्निः = अग्नि | पूर्व = पहले से | आरभताम् = शक्ति | प्रेन्द्रः = इन्द्र | नुदतु = नष्ट करे | बाहुमान् = ताकत / armed | ब्रवीतु = कहो | सर्वो = सभी | यातुमान् = राक्षस | अयम् = यह | अस्मीत्येत्य = हमारे लिए
पश्याम ते वीर्यं जातवेदः प्र णो ब्रूहि यातुधानान् नृचक्षः । त्वया सर्वे परितप्ताः पुरस्तात्त आ यन्तु प्रब्रुवाणा उपेदम् ॥५॥
Hindi:
हे जातवेद, हम तुम्हारा वीर्य देखें; हे राक्षस, तुम्हारे लिए सब संकट तुम्हारे सामने आएं।

English:
O Jataveda, we see your power; O demons, may all perils come upon you.

Word by Word:
पश्याम = देखें | ते = तुम्हारा | वीर्यं = शक्ति | जातवेदः = जातवेद / Agni | प्र = सामने | णो = हमारे | ब्रूहि = कहो | यातुधानान् = राक्षसों | नृचक्षः = नष्ट करने योग्य | त्वया = तुम्हारे द्वारा | सर्वे = सभी | परितप्ताः = संकटग्रस्त | पुरस्तात् = सामने | आयन्तु = आएं | प्रब्रुवाणा = कहे | उपेदम् = परिणाम
आरभस्व जातवेदोऽस्माकार्थाय जज्ञिषे । दूतो नो अग्ने भूत्वा यातुधानान् वि लापय ॥६॥
Hindi:
हे जातवेद, अपने उद्देश्य के लिए कार्य प्रारंभ करो; अग्नि, हमारे लिए राक्षसों का संहार कर दो।

English:
O Jataveda, begin the action for your purpose; O Agni, destroy the demons for us.

Word by Word:
आरभस्व = प्रारंभ करो | जातवेदः = जातवेद / Agni | अस्माकार्थाय = अपने उद्देश्य के लिए | जज्ञिषे = कार्य करो | दूतो = दूत | नो = हमारे | अग्ने = हे अग्नि | भूत्वा = बनकर | यातुधानान् = राक्षस | विलापय = नष्ट कर दो
त्वमग्ने यातुधानान् उपबद्धामिहा वह । अथैषामिन्द्रो वज्रेणापि शीर्षाणि वृश्चतु ॥७॥
Hindi:
हे अग्नि, इन राक्षसों को यहाँ बांधो और इन्द्र अपने वज्र से उनके सिर नष्ट करे।

English:
O Agni, bind the demons here; may Indra crush their heads with his thunderbolt.

Word by Word:
त्वम् = तुम | अग्ने = हे अग्नि | यातुधानान् = राक्षस | उपबद्धाम् = बाँधो | इहा = यहाँ | वह = ले जाओ | अथैषाम् = और उनके | इन्द्रः = इन्द्र | वज्रेण = वज्र से | अपि = भी | शीर्षाणि = सिर | वृश्चतु = नष्ट करें

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