अथर्ववेदः काण्डं १ सूक्तं १.१ अथर्वा

 

ये त्रिषप्ताः परियन्ति विश्वा रूपाणि बिभ्रतः ।
वाचस्पतिर्बला तेषां तन्वो अद्य दधातु मे ॥१॥

Hindi:
जो अनेक रूपों में सम्पूर्ण जगत में व्याप्त शक्तियाँ हैं, उन सबका स्रोत वाणी का दिव्य तत्त्व है। वह आज मुझमें बल और स्पष्टता स्थापित करे।

English:
All universal forces manifesting in many forms arise from divine speech. May that power establish strength and clarity within me today.

Word by Word:
ये = जो | त्रिषप्ताः = तीन और सात रूपों में | परियन्ति = चारों ओर विचरण करती हैं | विश्वा = सम्पूर्ण | रूपाणि = रूप | बिभ्रतः = धारण करने वाली | वाचस्पतिर्बला = वाणी के स्वामी की शक्तियाँ | तेषां तन्वः = उनकी सत्ता | अद्य = आज | दधातु = स्थापित करे | मे = मुझमें
पुनरेहि वचस्पते देवेन मनसा सह ।
वसोष्पते नि रमय मय्येवास्तु मयि श्रुतम् ॥२॥

Hindi:
हे वाचस्पति! दिव्य मन के साथ मुझमें पुनः प्रवेश करो। जो ज्ञान मैंने सुना है वह मुझमें स्थिर रहे।

English:
O Lord of Speech, return with divine awareness. Let all knowledge I have heard remain firmly within me.

Word by Word:
पुनः = फिर से | एहि = आओ | वचस्पते = हे वाणी के स्वामी | देवेन = दिव्य | मनसा सह = मन के साथ | वसोःपते = समृद्धि के स्वामी | नि रमय = भीतर स्थिर करो | मयि = मुझमें | एव अस्तु = ही रहे | श्रुतम् = सुना हुआ ज्ञान
इहैवाभि वि तनूभे आर्त्नी इव ज्यया ।
वाचस्पतिर्नि यच्छतु मय्येवास्तु मयि श्रुतम् ॥३॥

Hindi:
जैसे प्रत्यंचा बाण को दृढ़ता से बांधती है, वैसे ही ज्ञान मेरी देह और चेतना में स्थिर हो।

English:
As a bowstring holds an arrow firmly, may knowledge be firmly anchored in my being.

Word by Word:
इहैव = यहाँ ही | अभि = चारों ओर | वि = विशेष रूप से | तनूभे = शरीर में | आर्त्नी = धनुष की डोरी | इव = जैसे | ज्यया = प्रत्यंचा | वाचस्पतिर्नि = वाणी का स्वामी दृढ़ करे | यच्छतु = स्थापित करे | मयि एव अस्तु = मुझमें ही रहे | श्रुतम् = ज्ञान
उपहूतो वाचस्पतिरुपास्मान् वाचस्पतिर्ह्वयताम् ।
सं श्रुतेन गमेमहि मा श्रुतेन वि राधिषि ॥४॥

Hindi:
आह्वान किए गए वाचस्पति हमें अपने समीप लाएँ। हम ज्ञान के साथ आगे बढ़ें और उससे विचलित न हों।

English:
May invoked divine speech guide us closer. May we move forward with wisdom and never fall away from it.

Word by Word:
उपहूतः = आह्वान किया गया | वाचस्पतिः = वाणी का स्वामी | उपास्मान् = समीप | ह्वयताम् = बुलाए | सं = साथ-साथ | श्रुतेन = ज्ञान के साथ | गमेमहि = आगे बढ़ें | मा = मत | वि राधिषि = विचलित करो
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