ये त्रिषप्ताः परियन्ति विश्वा रूपाणि बिभ्रतः ।
वाचस्पतिर्बला तेषां तन्वो अद्य दधातु मे ॥१॥
वाचस्पतिर्बला तेषां तन्वो अद्य दधातु मे ॥१॥
Hindi:
जो अनेक रूपों में सम्पूर्ण जगत में व्याप्त शक्तियाँ हैं, उन सबका स्रोत वाणी का दिव्य तत्त्व है। वह आज मुझमें बल और स्पष्टता स्थापित करे।
English:
All universal forces manifesting in many forms arise from divine speech. May that power establish strength and clarity within me today.
जो अनेक रूपों में सम्पूर्ण जगत में व्याप्त शक्तियाँ हैं, उन सबका स्रोत वाणी का दिव्य तत्त्व है। वह आज मुझमें बल और स्पष्टता स्थापित करे।
English:
All universal forces manifesting in many forms arise from divine speech. May that power establish strength and clarity within me today.
Word by Word:
ये = जो | त्रिषप्ताः = तीन और सात रूपों में | परियन्ति = चारों ओर विचरण करती हैं | विश्वा = सम्पूर्ण | रूपाणि = रूप | बिभ्रतः = धारण करने वाली | वाचस्पतिर्बला = वाणी के स्वामी की शक्तियाँ | तेषां तन्वः = उनकी सत्ता | अद्य = आज | दधातु = स्थापित करे | मे = मुझमें
ये = जो | त्रिषप्ताः = तीन और सात रूपों में | परियन्ति = चारों ओर विचरण करती हैं | विश्वा = सम्पूर्ण | रूपाणि = रूप | बिभ्रतः = धारण करने वाली | वाचस्पतिर्बला = वाणी के स्वामी की शक्तियाँ | तेषां तन्वः = उनकी सत्ता | अद्य = आज | दधातु = स्थापित करे | मे = मुझमें
पुनरेहि वचस्पते देवेन मनसा सह ।
वसोष्पते नि रमय मय्येवास्तु मयि श्रुतम् ॥२॥
वसोष्पते नि रमय मय्येवास्तु मयि श्रुतम् ॥२॥
Hindi:
हे वाचस्पति! दिव्य मन के साथ मुझमें पुनः प्रवेश करो। जो ज्ञान मैंने सुना है वह मुझमें स्थिर रहे।
English:
O Lord of Speech, return with divine awareness. Let all knowledge I have heard remain firmly within me.
हे वाचस्पति! दिव्य मन के साथ मुझमें पुनः प्रवेश करो। जो ज्ञान मैंने सुना है वह मुझमें स्थिर रहे।
English:
O Lord of Speech, return with divine awareness. Let all knowledge I have heard remain firmly within me.
Word by Word:
पुनः = फिर से | एहि = आओ | वचस्पते = हे वाणी के स्वामी | देवेन = दिव्य | मनसा सह = मन के साथ | वसोःपते = समृद्धि के स्वामी | नि रमय = भीतर स्थिर करो | मयि = मुझमें | एव अस्तु = ही रहे | श्रुतम् = सुना हुआ ज्ञान
पुनः = फिर से | एहि = आओ | वचस्पते = हे वाणी के स्वामी | देवेन = दिव्य | मनसा सह = मन के साथ | वसोःपते = समृद्धि के स्वामी | नि रमय = भीतर स्थिर करो | मयि = मुझमें | एव अस्तु = ही रहे | श्रुतम् = सुना हुआ ज्ञान
इहैवाभि वि तनूभे आर्त्नी इव ज्यया ।
वाचस्पतिर्नि यच्छतु मय्येवास्तु मयि श्रुतम् ॥३॥
वाचस्पतिर्नि यच्छतु मय्येवास्तु मयि श्रुतम् ॥३॥
Hindi:
जैसे प्रत्यंचा बाण को दृढ़ता से बांधती है, वैसे ही ज्ञान मेरी देह और चेतना में स्थिर हो।
English:
As a bowstring holds an arrow firmly, may knowledge be firmly anchored in my being.
जैसे प्रत्यंचा बाण को दृढ़ता से बांधती है, वैसे ही ज्ञान मेरी देह और चेतना में स्थिर हो।
English:
As a bowstring holds an arrow firmly, may knowledge be firmly anchored in my being.
Word by Word:
इहैव = यहाँ ही | अभि = चारों ओर | वि = विशेष रूप से | तनूभे = शरीर में | आर्त्नी = धनुष की डोरी | इव = जैसे | ज्यया = प्रत्यंचा | वाचस्पतिर्नि = वाणी का स्वामी दृढ़ करे | यच्छतु = स्थापित करे | मयि एव अस्तु = मुझमें ही रहे | श्रुतम् = ज्ञान
इहैव = यहाँ ही | अभि = चारों ओर | वि = विशेष रूप से | तनूभे = शरीर में | आर्त्नी = धनुष की डोरी | इव = जैसे | ज्यया = प्रत्यंचा | वाचस्पतिर्नि = वाणी का स्वामी दृढ़ करे | यच्छतु = स्थापित करे | मयि एव अस्तु = मुझमें ही रहे | श्रुतम् = ज्ञान
उपहूतो वाचस्पतिरुपास्मान् वाचस्पतिर्ह्वयताम् ।
सं श्रुतेन गमेमहि मा श्रुतेन वि राधिषि ॥४॥
“Next Sukta 2
Previous Agni Sukta mantra 1
सं श्रुतेन गमेमहि मा श्रुतेन वि राधिषि ॥४॥
Hindi:
आह्वान किए गए वाचस्पति हमें अपने समीप लाएँ। हम ज्ञान के साथ आगे बढ़ें और उससे विचलित न हों।
English:
May invoked divine speech guide us closer. May we move forward with wisdom and never fall away from it.
आह्वान किए गए वाचस्पति हमें अपने समीप लाएँ। हम ज्ञान के साथ आगे बढ़ें और उससे विचलित न हों।
English:
May invoked divine speech guide us closer. May we move forward with wisdom and never fall away from it.
Word by Word:
उपहूतः = आह्वान किया गया | वाचस्पतिः = वाणी का स्वामी | उपास्मान् = समीप | ह्वयताम् = बुलाए | सं = साथ-साथ | श्रुतेन = ज्ञान के साथ | गमेमहि = आगे बढ़ें | मा = मत | वि राधिषि = विचलित करो
उपहूतः = आह्वान किया गया | वाचस्पतिः = वाणी का स्वामी | उपास्मान् = समीप | ह्वयताम् = बुलाए | सं = साथ-साथ | श्रुतेन = ज्ञान के साथ | गमेमहि = आगे बढ़ें | मा = मत | वि राधिषि = विचलित करो


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