Mimansa Darshan 10.3 (Sutra 1–75) Detailed Explanation
Mimansa Darshan – Chapter 10.3 (Sutra 1–75) Detailed Explanation
१०,३.१ — विकृतौ शब्दवत्त्वात्प्रधानस्य गुणानामधिकोत्पत्तिः सन्निधानात्
हिन्दी:
विकृत रूपों में शब्द का प्रधानत्व होने से गुणों की उत्पत्ति अधिक स्पष्ट होती है।
English:
In modified forms, the predominance of the word makes the emergence of qualities more prominent.
१०,३.२ — प्रकृतिवत्तस्य चानुपरोधः
हिन्दी:
प्रकृति का स्वतन्त्र होना किसी भी पर रोक के बिना कार्य करता है।
English:
Nature operates independently without obstruction.
१०,३.३ — चोदनाप्रभुत्वाच्च
हिन्दी:
चेतना की प्रधानता के कारण यह सक्रिय होती है।
English:
Due to the predominance of the motivating factor, it becomes active.
१०,३.४ — प्रधानं त्वङ्गसंयुक्तं तथाभूतमपूर्वं स्यात्तस्य विध्युपलक्षणात्सर्वो हि पूर्ववान्विधिरविशेषात्प्रवर्तितः
हिन्दी:
प्रधान अंग यदि जुड़ा हुआ और पूर्व के अनुसार अद्भुत हो, तो उसकी विधि के अनुसार पूर्व की विशेषताओं के आधार पर ही कार्य किया जाता है।
English:
If the principal part is united and unprecedented, action follows the rule based on prior established characteristics.
१०,३.५ — न चाङ्गविधिरनङ्गे स्यात्
हिन्दी:
यदि अंग न हो तो विधि लागू नहीं होती।
English:
Without the component, the procedure cannot apply.
१०,३.६ — कर्मणश्चै कशब्द्यात्सन्निधाने विधेराख्यासंयोगो गुणेनतद्विकारः स्याच्छब्दस्य विधिगामित्वाद्गुणस्य चोपदेश्यत्वात्
हिन्दी:
कर्म के उपस्थित होने पर विधि और वर्ण का संयोग गुण और विकार उत्पन्न करता है।
English:
When action is present, the conjunction of method and word produces qualities and modifications.
१०,३.७ — अकार्यत्वाच्च नाम्नः
हिन्दी:
नाम के कार्य न होने के कारण।
English:
Due to the inactivity of the name.
१०,३.८ — तुल्याच प्रभुता गुणे
हिन्दी:
गुण में समान प्रभुता होने पर परिणाम समान होता है।
English:
When qualities have equal predominance, the effect is uniform.
१०,३.९ — सर्वमेवंप्रधानमिति चेत्
हिन्दी:
यदि सभी को प्रधान मान लिया जाए।
English:
If all are considered principal.
१०,३.१० — तथाभूतेनसंयोगाद्यथार्थविधयः स्युः
हिन्दी:
तथाभूत के संयोग से विधियाँ यथार्थ रूप में होती हैं।
English:
Through conjunction with the existent, procedures occur as intended.
१०,३.११ — विधित्वं चाविशिष्ट मेवं प्राकृतानां वैकृतैः कर्मणायोगात्तस्मात्सर्वं प्रधानार्थम्
हिन्दी:
सर्व कर्म प्रधान के अनुसार ही होता है, क्योंकि प्राकृतिक और अपवर्तित कर्मों में विधि का योग रहता है।
English:
All actions pertain to the principal as nature and transformed actions follow the law.
१०,३.१२ — समत्वाच्च तदुत्पत्तेः संस्कारैरधिकारः स्यात्
हिन्दी:
समान होने के कारण संस्कार का अधिकार उत्पत्ति में होगा।
English:
Due to equality, the samskara has authority in its emergence.
१०,३.१३ — हिरण्यगर्भः पूर्वस्य मन्त्रलिङ्गात्
हिन्दी:
हिरण्यगर्भ मंत्र के पूर्व लक्षण के आधार पर।
English:
Hiranyagarbha is based on the previous sign of the mantra.
१०,३.१४ — प्रकृत्यनुपरोधाच्च
हिन्दी:
प्रकृति द्वारा बिना रोक के कार्य।
English:
Action proceeds without obstruction from nature.
१०,३.१५ — उत्तरस्य वा मन्त्रार्थित्वात्
हिन्दी:
उत्तर के अनुसार मंत्र का अर्थ स्पष्ट होता है।
English:
The meaning of the mantra is evident according to the subsequent context.
१०,३.१६ — विध्यतिदेशात्तच्छ्रुतौ बिकारः स्याद्गुणानामुपदेश्यत्वात्
हिन्दी:
विधि के विस्तार के अनुसार, श्रुति में गुणों का निर्देश होने से उनका विकार उत्पन्न होता है।
English:
According to the extension of the procedure, the guidance of qualities in Shruti produces modifications.
१०,३.१७ — पूर्वस्मिश्चामन्त्रत्वदर्शनात्
हिन्दी:
पूर्व के अनुसार मंत्रत्व का दर्शन होता है।
English:
The precedence shows the manifestation of mantra.
१०,३.१८ — संस्कारे तु क्रियान्तर तस्य विधयकत्वात्
हिन्दी:
संस्कार में क्रिया का अंतर विधिक रूप से स्पष्ट होता है।
English:
In samskara, the distinction of action is clear due to its legal context.
१०,३.१९ — प्रकृत्यनुपरोधाच्च
हिन्दी:
प्रकृति द्वारा अवरोध न होने से कार्य स्वतः होता है।
English:
Due to lack of obstruction by nature, action proceeds automatically.
१०,३.२० — विधेस्तु तत्र भावात्सन्देहे यस्य शब्दस्तदर्थः स्यात्
हिन्दी:
यदि विधि में संदेह हो, तो संबंधित शब्द का अर्थ वही होगा।
English:
In case of doubt in procedure, the meaning of the concerned word applies.
१०,३.२१ — संस्कारसामर्थ्याद्गुणसंयोगाच्च
हिन्दी:
संस्कार की सामर्थ्य और गुणों के संयोजन के कारण।
English:
Due to the capacity of samskara and the conjunction of qualities.
१०,३.२२ — विप्रतिषेधात्क्रियाप्रकरणे स्यात्
हिन्दी:
विप्रतिषेध से क्रियाप्रकरण में प्रभाव होता है।
English:
Contradiction produces effect in the action context.
१०,३.२३ — षड्भिर्ःदीक्षयतीति तासां मन्त्रविकारः श्रुतिसंयोगात्
हिन्दी:
छः प्रकार की दीक्षा में मन्त्रों का विकार श्रुति-संयोग से होता है।
English:
In six types of initiation, the modifications of mantras arise from Shruti conjunction.
१०,३.२४ — अभ्यासात्तु प्रधानस्य
हिन्दी:
प्रधान के अभ्यास से प्रभाव उत्पन्न होता है।
English:
Effect arises from the practice of the principal.
१०,३.२५ — आवृत्त्या मन्त्रकर्म स्यात्
हिन्दी:
आवृत्ति के कारण मंत्रकर्म संपन्न होता है।
English:
Due to repetition, mantra action is accomplished.
१०,३.२६ — अपिवा प्रतिमन्त्रत्वात्प्राकृतानामहानिः स्यादन्यायश्च कृतेऽभ्यासः
हिन्दी:
यदि प्रतिमंत्रत्व हो तो प्राकृत मंत्रों का नुकसान नहीं होता; इसलिए अभ्यास उचित है।
English:
If the status of counter-mantra exists, natural mantras are not harmed; thus practice is justified.
१०,३.२७ — पौर्वापर्यञ्चाभ्यासे नोपपद्यते नैमित्तिकत्वात्
हिन्दी:
पूर्व और पर उत्तर का अभ्यास नैमित्तिक होने के कारण नहीं किया जाता।
English:
Practice of earlier and later contexts is not applied due to its incidental nature.
१०,३.२८ — तत्प्रथक्त्वं च दर्शयति
हिन्दी:
यह अलगाव या भिन्नता को दिखाता है।
English:
It demonstrates separation or distinctness.
१०,३.२९ — न चाविशेषाद्व्यपदेशः स्यात्
हिन्दी:
विशेष से विपर्यय नहीं किया जाता।
English:
Contradiction does not arise from a specific case.
१०,३.३० — अग्न्याधेयस्य नैमित्तिके गुणविकारे दक्षिणादानमधिकं स्याद्वाक्यसंयोगात्
हिन्दी:
नैमित्तिक अग्न्याधेय में गुण परिवर्तन के कारण दक्षिणा देने का महत्व अधिक होता है, क्योंकि वाक्य के अनुसार संयोजन होता है।
English:
In incidental Agni offerings, due to quality changes, giving Dakshina is emphasized as conjunction occurs according to the sentence.
१०,३.३१ — शैष्ठत्वाच्चेतरासां यथास्थानम्
हिन्दी:
अन्य मामलों की तुलना में श्रेष्ठता के अनुसार उनकी स्थिति निर्धारित होती है।
English:
The status of others is determined according to precedence or superiority.
१०,३.३२ — विकारस्त्वप्रकरणे हि काम्यानि
हिन्दी:
प्रकरण में आवश्यक कार्यों में विकार उत्पन्न होता है।
English:
Modifications occur in the context of essential actions.
१०,३.३३ — शङ्कते च निवृत्तेरुभयत्वं हि श्रूयते
हिन्दी:
निवृत्ति और दोनों पक्षों में शंका उत्पन्न होती है।
English:
Doubt arises in both cessation and the dual context.
१०,३.३४ — वासो वत्सञ्च सामान्यात्
हिन्दी:
वास जैसी सामान्य वस्तु में समानता होती है।
English:
There is uniformity in common objects like Vasa.
१०,३.३५ — अर्थापत्तेस्तद्धर्माः स्यान्निमित्ताख्याभिसंयोगात्
हिन्दी:
अर्थ की प्राप्ति में धर्म का संबंध उसका कारण और नाम-संयोग से होता है।
English:
In obtaining meaning, dharma is connected through causation and nomenclature.
१०,३.३६ — दाने पाकोऽर्थलक्षणः
हिन्दी:
दान में पकाने की क्रिया अर्थ का लक्षण है।
English:
In donation, the cooking act signifies the essence.
१०,३.३७ — पाकस्थ चान्नकारित्त्वात्
हिन्दी:
पकाने की अवस्था में अन्न की कार्यशीलता होती है।
English:
In the cooking stage, the grain has functionality.
१०,३.३८ — तथाभिघारणस्य
हिन्दी:
भिगार/संग्रहण के अनुसार।
English:
According to collection or addition.
१०,३.३९ — द्रव्यविधिसन्निधौ सङ्ख्या तेषां गुणत्वात्
हिन्दी:
द्रव्य विधि के सन्निकटन में उनकी संख्या उनके गुण के कारण होती है।
English:
In the proximity of material procedures, the number arises due to their qualities.
१०,३.४० — समत्वात्तु गुणानामेकस्य श्रुतिसंयोगात्
हिन्दी:
गुणों की समानता से एक की श्रुति-संयोग होता है।
English:
Due to equality of qualities, there is Shruti-conjunction of one.
१०,३.४१ — यस्य वा सन्निधाने स्याद्वाक्यतोह्यभिसम्बन्धः
हिन्दी:
जिसके निकटता में वाक्य से उसका संबंध होता है।
English:
Where proximity exists, there is connection via the sentence.
१०,३.४२ — असंयुक्तास्तु तुल्यवदितराभिर्विधीयन्ते तस्मात्सर्वाधिकारः स्यात्
हिन्दी:
असंयुक्त वस्तुएँ तुल्यवत् अन्यत्र व्यवस्थित होती हैं; इसलिए सभी अधिकार हैं।
English:
Unconnected entities are arranged elsewhere similarly; hence all rights exist.
१०,३.४३ — असंयोगाद्विधिश्रुतावेकजाताधिकारः स्याच्छ्रुत्याकोपात्क्रतोः
हिन्दी:
असंयोग से विधि-श्रुति का एकजाती अधिकार उत्पन्न होता है।
English:
Due to disjunction, the procedure-Shruti yields single-type authority.
१०,३.४४ — शब्जार्थश्चापि लोकवत्
हिन्दी:
शब्द का अर्थ भी लोक व्यवहार अनुसार होता है।
English:
The meaning of a word is also according to common usage.
१०,३.४५ — सापशूनामुत्पत्तितो विभागात्
हिन्दी:
सापशून्य का उत्पत्ति से विभाग होता है।
English:
Division arises from the origin of the snake-free entity.
१०,३.४६ — अनियमोऽविशेषात्
हिन्दी:
अनियमित होने के कारण विशेषता नहीं होती।
English:
Due to irregularity, there is no distinctness.
१०,३.४७ — भागित्वाद्वा गवां स्यात्
हिन्दी:
गाय में भाग होने के कारण विशेषता प्रकट होती है।
English:
Cattle exhibit distinctness due to divisibility.
१०,३.४८ — प्रत्ययात्
हिन्दी:
प्रत्यय से अर्थ और क्रिया स्थापित होती है।
English:
Through suffix or indication, meaning and action are established.
१०,३.४९ — लिङ्गदर्शनाच्च
हिन्दी:
लिङ्ग का दर्शन करने से भेद और अर्थ स्पष्ट होता है।
English:
Observation of a sign reveals distinction and meaning.
१०,३.५० — तत्र दानं विभागेन प्रदानानां पृथक्त्वात्
हिन्दी:
दान में, वितरण के कारण प्रत्येक प्राप्तकर्ता का पृथकत्व स्पष्ट होता है।
English:
In donation, division makes each recipient distinct.
१०,३.५१ — परिक्राच्च लोकवत्
हिन्दी:
परिक्रिया का सामान्य व्यवहार के अनुसार पालन होता है।
English:
The procedure follows customary practice.
१०,३.५२ — विभागं चापि दर्शयति
हिन्दी:
यह विभाजन का भी प्रदर्शन करता है।
English:
It also indicates the division.
१०,३.५३ — समं स्यादश्रुतित्वात्
हिन्दी:
श्रुति के समान होने के कारण समत्व प्रकट होता है।
English:
Uniformity arises due to conformity with Shruti.
१०,३.५४ — अपि वा कर्मवैषम्यात्
हिन्दी:
कर्म में असमानता होने पर भी भेद उत्पन्न होता है।
English:
Even with inequality in action, distinction occurs.
१०,३.५५ — अतुल्याः स्युः परिक्रये विषमाख्या विधिश्रुतौ परिक्रयान्न कर्मण्युपपद्यते दर्शनाद्विशेषस्य तथाभ्युदये
हिन्दी:
विभिन्न नाम और नियम के अनुसार परिक्रिया में असमानता होती है; दर्शन से भेद और परिणाम स्पष्ट होते हैं।
English:
Unequal actions arise due to differing names and rules; distinction and outcome are clear through observation.
१०,३.५६ — तस्य धेनुरिति गवां प्रकृतौ विभक्तचोदितत्वात्सामान्यात्तद्विकारः स्याद्यथेष्टिर्गुणशब्देन
हिन्दी:
गाय के रूप में विभाजन होने पर उसका सामान्य विकार गुण और शब्द के अनुसार होता है।
English:
When divided as a cow, its general modification corresponds to quality and word.
१०,३.५७ — सर्वस्य वा क्रतुसंयोगादेकत्वं दक्षिणार्थस्य गुणानां कार्यैकत्वादर्थे विकृतौ श्रुतिभूतं स्यात्तस्मात् समवायाद्धिकर्मभिः
हिन्दी:
सर्व क्रियाओं के संयुक्त होने से एकत्व उत्पन्न होता है; गुण और कार्य के एकत्व से अर्थ विकृत होता है; इसलिए समान प्रयोग अधिक कर्मों के साथ होता है।
English:
Unity arises from the conjunction of all acts; due to the unity of qualities and actions, meaning is modified; hence multiple actions occur with the same use.
१०,३.५८ — चोदनानामनाश्रयाल्लिङ्गेन नियमः स्यात्
हिन्दी:
चोदनाओं का पालन लिङ्ग के आधार पर किया जाता है।
English:
Instructions are regulated based on the sign.
१०,३.५९ — एका पञ्चेति धेनुवत्
हिन्दी:
धेनु के समान एक को पाँच में विभाजित किया जाता है।
English:
One is divided into five like a cow.
१०,३.६० — त्रिवत्सश्च
हिन्दी:
तीन के समान रूप में।
English:
In the form of three.
१०,३.६१ — तथा च लिङ्गदर्शनम्
हिन्दी:
लिङ्ग के दर्शन से भी भेद और अर्थ स्पष्ट होता है।
English:
Observation of the sign also reveals distinction and meaning.
१०,३.६२ — एके ति श्रुतिभूतत्वात्सङ्ख्यया गवां लिङ्गविशेषेण
हिन्दी:
श्रुति के अनुसार, संख्या के आधार पर गाय का विशेष लिङ्ग प्रकट होता है।
English:
According to Shruti, the number determines the specific sign of the cow.
१०,३.६३ — प्राकाशौ तथेति चेत्
हिन्दी:
यदि ऐसा कहा जाए तो यह सामान्य रूप से भी स्वीकार्य है।
English:
If stated so, it is generally acceptable.
१०,३.६४ — अपि त्ववयवार्थत्वाद्विभक्तप्रकृतित्वाद्गुणेदन्ताविकारः स्यात्
हिन्दी:
व्यक्तिगत अर्थ और विभाजन की प्रकृति के कारण गुणों में अंतर्विकार उत्पन्न होता है।
English:
Due to individual meaning and divided nature, internal modification of qualities arises.
१०,३.६५ — धेनुवच्चाश्चदक्षिणा स ब्रह्मण इति पुरुषापनयो यथा हिरण्यस्य
हिन्दी:
गाय और दक्षिणा पुरुषापनय के रूप में ब्रह्म को दर्शाती है, जैसे हिरण्य में।
English:
The cow and Dakshina symbolize Brahman, as in the case of gold.
१०,३.६६ — एके तु कर्तृसंयोगात्स्रग्वत्तस्य लिङ्गविशेषेण
हिन्दी:
कर्तृ के संयोजन से, स्रग्वत का लिङ्ग विशेष प्रकट होता है।
English:
By combination of the agent, the specific sign of Sragvat appears.
१०,३.६७ — अपि वा तदधिकाराद्धिरण्यवद्विकारः स्यात्
हिन्दी:
अधिकार होने पर भी हिरण्य के समान विकार हो सकता है।
English:
Even with authority, modification occurs similar to gold.
१०,३.६८ — तथा च सोमचमसः
हिन्दी:
इसी प्रकार सोमचमस में भी समान नियम लागू होता है।
English:
Similarly, the same rule applies to Somachamasa.
१०,३.६९ — सर्वविकारो वा क्रत्वर्थे प्रतिषेधात् पशूनां
हिन्दी:
पशुओं के क्रतुओं में सभी विकार प्रतिषेध के कारण होते हैं।
English:
All modifications in animals’ acts occur due to prohibition.
१०,३.७० — ब्रह्मदानेऽविशिष्टमिति चेत्
हिन्दी:
यदि कहा जाए कि ब्रह्मदान में विशिष्टता नहीं होती।
English:
It may be said that in Brahma-dana there is no distinctness.
१०,३.७१ — उत्सर्गस्य क्रत्वर्थत्वात्प्रतिषिद्धस्य कर्मस्यान्न च गौणः प्रयोजनमर्थः स दक्षिणानां स्यात्
हिन्दी:
उत्सर्ग के कारण, निषिद्ध कर्म का गौण उद्देश्य नहीं होता; दक्षिणा का प्रयोग इस हेतु होता है।
English:
Due to offering, the forbidden act has no secondary purpose; Dakshina serves this function.
१०,३.७२ — यदि तु ब्रह्मणस्तदूनं तद्विकारः स्यात्
हिन्दी:
यदि ब्रह्म को दिया जाए, तो उस पर विकार लागू हो सकता है।
English:
If given to Brahman, modification may apply.
१०,३.७३ — सर्वं वा पुरुषापनयात्तासां क्रतुप्रधानत्वात्
हिन्दी:
सभी पुरुषापनय से क्रतुप्रधानता प्रकट होती है।
English:
All offerings indicate predominance of the act due to Purusha-apana.
१०,३.७४ — यजुर्युक्तेऽध्वर्योर्दक्षिणा विकारः स्यात्
हिन्दी:
यजुर्वेद के अनुसार, अध्वर्य की दक्षिणा में विकार उत्पन्न होता है।
English:
According to Yajurveda, modification occurs in Dakshina of Adhvarya.
१०,३.७५ — अपि वा श्रुतिभूतत्वात्सर्वासां तस्य भागो नियम्यते
हिन्दी:
श्रुति के अनुसार, सभी में उसका भाग निर्धारित होता है।
English:
According to Shruti, its portion is regulated in all.
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