१२,३.१ — विश्र्वजिति वत्सत्वङ्नामधेयादितर था तन्त्रभूय त्वादहतं स्यात्
हिन्दी:
विश्र्वजित जैसे वत्सत्व (बछड़े) का उल्लेख अन्य तंत्रों में भी किया जा सकता है। यह नियम तंत्र में प्रमुख माना जाता है।
English:
Animals like calves (vatsatva) mentioned in one text may be applicable in other texts; the rule is prominent in the Tantric context.
१२,३.२ — अविरोधी वा उपरिवासो हि वत्सत्वक्
हिन्दी:
यदि विरोध न हो तो उपरिवास (अन्य नियम) भी वत्सत्व के लिए मान्य होगा।
English:
If no conflict arises, supplementary rules apply to vatsatva as well.
१२,३.३ — अनुनुर्वाप्येषु भूयस्त्वेन तन्त्रनियमः स्याच्छ्विष्ठकृद्दर्शनाच्च
हिन्दी:
अनुकरणीय मामलों में, तंत्र का नियम प्रमुख होगा, जैसा कि शिष्टकर्मों के दर्शन में दिखता है।
English:
In imitable cases, the Tantric rule prevails, as seen in proper rituals.
१२,३.४ — आगन्तुकत्वाद्वा स्वधर्मा स्याच्छ्रुतिविशेषादितरस्य च मुख्यत्वात्
हिन्दी:
यदि आगंतुक नियम हो तो अपने धर्म का पालन प्राथमिक होगा, और अन्य नियमों में शास्त्र विशेष के अनुसार प्राथमिकता दी जाती है।
English:
In the case of visitor rules, one’s own duty is primary, and other rules follow scriptural priority.
१२,३.५ — स्वस्थानत्वाच्च
हिन्दी:
स्वस्थान (स्थानीय नियम) का भी पालन किया जाएगा।
English:
Local or situational rules are to be observed.
१२,३.६ — स्विष्टकृच्छ्रपणान्नेतिचोद्विकारः पवमानवत्
हिन्दी:
स्वीकृत कठिन कार्यों में कोई विकार (विरोध) नहीं होना चाहिए, जैसे कि पवमान (अनुष्ठानिक प्रक्रिया) में।
English:
In approved difficult tasks, no obstruction should occur, as in ritual procedures.
१२,३.७ — अविकारो वा प्रकृतिवच्चोदनां प्रति भानाच्च
हिन्दी:
किसी कार्य में विकार न होने और प्राकृतिक तरीके से पालन होने की स्थिति में नियम लागू होगा।
English:
If there is no obstruction and natural procedure is followed, the rule applies.
१२,३.८ — एक कर्मणिशिष्टत्वाद्गुणानां सर्वकर्म स्यात्
हिन्दी:
यदि किसी एक कर्म में निशिष्टता (पूर्णता) हो, तो उसके गुणानुसार सभी कर्म वैध माने जाएंगे।
English:
If one action is complete, all actions following its qualities are valid.
१२,३.९ — एकार्थास्तुविकल्पेरन्,मुच्चये ह्यावृत्तिः स्यात्प्रधानस्य
हिन्दी:
यदि किसी कर्म का एक ही अर्थ है, तो विकल्प में उसे प्रयोग करना संभव है; मुख्य क्रिया में पुनरावृत्ति नहीं होगी।
English:
If an action has a single meaning, it can be used optionally; repetition in the main action is avoided.
१२,३.१० — अभ्यस्योतार्थवत्त्वादिति चेत्
हिन्दी:
यदि कर्म अभ्यास योग्य और अर्थपूर्ण हो, तो नियम लागू होगा।
English:
If the action is practicable and meaningful, the rule applies.
१२,३.११ — नाश्रुतत्वाद्धि विकल्पवच्चदर्शयति कालान्तरेऽर्थवत्त्वं स्यात्
हिन्दी:
यदि श्रुत (अनुसूचित) नहीं है, तो विकल्प केवल कालांतरे अर्थपूर्ण माना जाएगा।
English:
If not scripturally prescribed, optional action is meaningful only after the appropriate time.
१२,३.१२ — प्रायश्चित्तेषुचैकार्थ्यान्निष्पन्नेनाभिसंयोगस्तस्मात् सर्वस्य निर्घातः
हिन्दी:
प्रायश्चित्त में एक ही अर्थ से निष्पन्न कार्य का अभिसंयोग होने पर, सभी कर्मों का दोष समाप्त होता है।
English:
In penance, if the performed action has a single meaningful combination, all faults are removed.
१२,३.१३ — समुच्चयस्तु दोषार्थः
हिन्दी:
यदि कर्मों का समुच्चय दोषार्थ है, तो यह दोष उत्पन्न करता है।
English:
A combination of actions contrary to the rules results in fault.
१२,३.१४ — मन्त्राणाङ्कर्मसंयोगः स्वधर्मेण प्रयोगः स्याद्धर्मस्य तन्निमित्तत्वात्
हिन्दी:
मंत्र और कर्म के संयोजन का प्रयोग अपने धर्म (स्वधर्म) के अनुसार ही होना चाहिए, क्योंकि यह धर्म का कारण है।
English:
The combination of mantra and action should follow one’s own duty, as it determines the efficacy of the act.
१२,३.१५ — विद्यांप्रतिविधिनाद्वा सर्वकारणं प्रयोगः स्यात् कर्मार्तत्वात् प्रयोगस्य
हिन्दी:
विद्या और विधि के अनुसार, सभी कारणों का प्रयोग कर्मार्थ से होना चाहिए।
English:
According to knowledge and procedure, all causes should be applied for the purpose of action.
१२,३.१६ — भाषास्वरोपदेशादैरवत् प्रायवचनप्रतिषेधः
हिन्दी:
भाषा और स्वर के निर्देशों से स्पष्ट होता है कि सामान्य प्रयोग में प्रतिषेध होगा।
English:
From language and phonetic instructions, it is clear that there is prohibition in ordinary use.
१२,३.१७ — मन्त्रोपदेशो वा न भाषिकस्य प्रायोपपत्तेर्भाषिकश्रुतिः
हिन्दी:
मंत्र का उपदेश भाषिक रूप में न होने पर भी, श्रुतियों के आधार पर इसका सामान्य प्रयोग होता है।
English:
Even if mantra instructions are not verbal, their practice can occur based on scriptural hearing.
१२,३.१८ — विकारः कारणाग्रहणे तन्न्यायत्वाद् दृष्टेऽप्येवम्
हिन्दी:
विकार (विरोध या दोष) को कारण मानने में न्याय होता है, जैसा कि देखा गया है।
English:
A defect or obstruction is considered a cause according to logical reasoning, as observed.
१२,३.१९ — तदुत्पत्तेर्वा प्रवचनलक्षणत्वात्
हिन्दी:
कर्म या मन्त्र की उत्पत्ति प्रवचन (शास्त्रीय वर्णन) से स्पष्ट हो जाती है।
English:
The origin of action or mantra becomes evident from scriptural instructions.
१२,३.२० — मन्त्राणां करणार्थत्वान्मन्त्रान्तेन कर्मादिसन्निपातः स्यात्सर्वस्य वचनार्थत्वात्
हिन्दी:
मंत्र केवल कर्म के उद्देश्य से है, इसलिए कर्म आदि के साथ उसका संयोग होता है; सभी वचनों का अर्थ स्पष्ट रहता है।
English:
Mantras serve the purpose of action, and hence combine with the act; the meaning of all statements remains clear.
१२,३.२१ — सन्ततवचनाद्धारायामादिसंयोगः
हिन्दी:
सतत वचन (लगातार कथन) के कारण धारायाम (क्रमानुसार) प्रारंभिक संयोग होता है।
English:
Due to continuous statements, sequential combinations occur at the beginning.
१२,३.२२ — करमसन्तानो वा नानाकर्मत्वादितरस्याशक्चत्वात्
हिन्दी:
कर्मों की एक श्रृंखला में यदि विभिन्न कर्म हों, तो अन्य कर्मों की अस्थिरता के कारण विकल्प संभव है।
English:
In a series of actions, if there are varied acts, options arise due to instability of other acts.
१२,३.२३ — आघारे च दीर्घधारत्वात्
हिन्दी:
आघार (क्रियापद या आदेश) में लंबी अवधि के कारण नियम लागू होता है।
English:
Due to prolonged duration in the order, the rule applies.
१२,३.२४ — मन्त्राणां सन्निपातित्वादेकार्थानांविकल्पः स्यात्
हिन्दी:
यदि मंत्रों का संयोग हो और वे एक ही अर्थ में हों, तो विकल्प (वैकल्पिक प्रयोग) हो सकता है।
English:
If mantras are combined with a single meaning, optional application is possible.
१२,३.२५ — संख्याविहितेषु समुच्चयोऽसन्निपातित्वात्
हिन्दी:
संख्याविहित कर्मों में यदि संयोग नहीं है, तो समुच्चय (सभी कर्मों का योग) लागू नहीं होगा।
English:
In numerically prescribed actions, if there is no combination, the aggregate does not apply.
१२,३.२६ — ब्राह्मणविहितेषु च संख्यावत्सर्वेषामुपदिष्ठत्वात्
हिन्दी:
ब्राह्मणों के लिए निर्धारित कर्मों में, सभी कर्मों का क्रम संख्यात्मक रूप से उपदेशित है।
English:
In Brahmanical prescriptions, all actions are prescribed in numerical order.
१२,३.२७ — याज्यावषद्कारयोश्र्त समुच्चयदर्शनं तद्वत्
हिन्दी:
याज्य (यज्ञ के लिए) काम, अवषद (अनुष्ठान सामग्री) आदि में भी समुच्चय का दर्शन उसी प्रकार होता है।
English:
In sacrificial actions, offerings, etc., the aggregate is viewed similarly.
१२,३.२८ — विकल्पो वा समुच्चयस्याश्रुतित्वात्
हिन्दी:
यदि समुच्चय श्रुतियों में निर्दिष्ट है, तो विकल्प (वैकल्पिक प्रयोग) संभव है।
English:
If the aggregate is prescribed in texts, optional application is possible.
१२,३.२९ — गुणार्थत्वादुपदेशस्य
हिन्दी:
उपदेश (निर्देश) गुणार्थ को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।
English:
Instruction is based on the intended quality or purpose.
१२,३.३० — वषट्कारे नानार्थत्वात्समुच्चयो हौत्रास्तु विकल्पेरन्नेकार्थत्वात्
हिन्दी:
वषट्कार (विशिष्ट कर्म) में यदि विभिन्न अर्थ हों, तो समुच्चय लागू नहीं होगा; हौत्र कर्मों में विकल्प एक ही अर्थ में होगा।
English:
In specific acts, if multiple meanings exist, the aggregate does not apply; in Haultr rituals, the option has a single meaning.
१२,३.३१ — क्रियमाणानुवादित्वात् समुच्चयो वा हौत्राणाम्
हिन्दी:
हौत्र कर्मों में यदि कार्यानुवाद होता है, तो समुच्चय भी लागू होगा।
English:
In Haultr actions, if the acts are sequentially applied, the aggregate applies.
१२,३.३२ — समुच्चयं च दर्शयति
हिन्दी:
यह सूत्र समुच्चय (सभी संबंधित कर्मों का योग) को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
English:
This verse clearly illustrates the aggregate of all related actions.
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