Mimansa Darshan Chapter 3. 6.1

मीमांसा दर्शन सूत्र 3.6.1–20 हिन्दी-अंग्रेज़ी व्याख्या

मीमांसा दर्शन – अध्याय 3.6

सूत्र 3.6.1–20: हिन्दी और English Explanation

३.६.१ — तत् सर्वार्थम् अप्रकरणात्

हिन्दी: प्रकरण (context) के बाहर इसका सभी अर्थों में प्रयोग होता है।
English: Outside the specific context, it applies to all meanings.

३.६.२ — प्रकृतौ वाद्विरुक्तत्वात्

हिन्दी: प्रकृति में वाद (संवाद) से अलग रहकर इसका प्रयोग होता है।
English: In nature, it is separate from debate or discussion.

३.६.३ — तद्वर्जं तु वचनप्राप्ते

हिन्दी: यदि वचन प्राप्त है तो यह निषिद्ध नहीं माना जाता।
English: If the statement exists, it is not prohibited.

३.६.४ — दर्शनाद् इति चेत्

हिन्दी: यदि दर्शन या संकेत प्राप्त हो तो इसका पालन किया जाता है।
English: If observed or indicated, it is followed.

३.६.५ — न चोदनैकार्थ्यात्

हिन्दी: एक ही उद्देश्य के लिए चोदना (प्रेरणा) नहीं होती।
English: There is no single purpose in a prompting act.

३.६.६ — उत्पत्तिर् इति चेत्

हिन्दी: यदि उत्पत्ति (source) दृष्टि से पुष्टि हो तो वह मान्य है।
English: If the origin is confirmed, it is considered valid.

३.६.७ — न तुल्यत्वात्

हिन्दी: समानता के कारण इसे तुल्य नहीं माना जाता।
English: It is not considered equivalent merely due to similarity.

३.६.८ — चोदनार्थकार्त्स्न्यात् तु मुख्यविप्रतिषेधात् प्रकृत्यर्थः

हिन्दी: चोदना के उद्देश्य से पूरे मुख्य विप्रतिषेध के कारण इसका वास्तविक अर्थ निर्धारित होता है।
English: The true meaning is determined by the main prohibition in relation to the prompting purpose.

३.६.९ — प्रकरणविशेषात् तु विकृतौ विरोधि स्यात्

हिन्दी: प्रकरण विशेष के कारण विकृत में विरोध उत्पन्न हो सकता है।
English: Specific context may cause conflict in case of deviation.

३.६.१० — नैमित्तिकं तु प्रकृतौ तद्विकारः संयोगविशेषात्

हिन्दी: प्रकृति में यह परिवर्तन केवल नैमित्तिक है और विशेष संयोग के कारण होता है।
English: In nature, this change is incidental, arising due to special conjunctions.

३.६.११ — इष्टयर्थमग्न्याधेयं प्रकरणात्

हिन्दी: इष्ट कर्म के लिए अग्नि उपयुक्त होती है, यह प्रकरण से प्रमाणित है।
English: Agni is appropriate for the desired act, as established by context.

३.६.१२ — न वा तासां तदर्थत्वात्

हिन्दी: इसका अर्थ उन कर्मों के लिए नहीं लागू होता।
English: Its meaning does not apply to those acts.

३.६.१३ — लिङ्गदर्शनाच् च

हिन्दी: लिङ्ग (संकेत) के दर्शन से भी पुष्टि होती है।
English: Observation of the linga confirms the act.

३.६.१४ — तत्प्रकृत्यर्थं यथान्येऽनारभ्यवादाः

हिन्दी: अन्यत्र प्रारंभ नहीं होने पर यह अपने प्राकृतिक अर्थ में लागू होता है।
English: In absence of prior initiation, it applies in its natural meaning.

३.६.१५ — सर्वार्थ वाग्न्यधानस्य स्वकालत्वात्

हिन्दी: सभी अर्थ उसी समय के आग्नि-धान (अर्पित अग्नि) में लागू होते हैं।
English: All meanings apply to the timely Agni-dhana.

३.६.१६ — तासाम् अग्निः प्रकृतितः प्रयाजवत् स्यात्

हिन्दी: उनका अग्नि प्राकृतिक रूप से प्रयाजवत् (अर्पित) माना जाता है।
English: Their Agni is naturally considered offered.

३.६.१७ — न वा तासां तदर्थत्वात्

हिन्दी: इसका अर्थ उन कर्मों पर लागू नहीं होता।
English: Its meaning does not extend to those acts.

३.६.१८ — तुल्यः सर्वेषां पशुविधिः प्रकरणाविशेषात्

हिन्दी: सभी पशु-व्यवस्था समान होती है, प्रकरण विशेष के अनुसार।
English: All animal procedures are uniform, based on specific context.

३.६.१९ — स्थानाच् च पूर्वस्य

हिन्दी: स्थान भी पूर्व के अनुसार निर्धारित होता है।
English: Location is also determined according to precedent.

३.६.२० — श्वस् त्व् एकेषां तत्र प्राक्श्रुतिर् गुणार्था

हिन्दी: एक विशेष प्राणी (श्वस्) के लिए पूर्वश्रुति गुणार्थ में लागू होती है।
English: For a specific animal, prior instruction applies in the context of the quality effect.
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