मीमांसा दर्शन सूत्र 3.4.16–30 हिन्दी-अंग्रेज़ी व्याख्या
मीमांसा दर्शन – अध्याय 3.4.16–30
हिन्दी एवं English Explanation
३.४.१६ — व्यपदेशाद् अपकृष्येत
हिन्दी: विरोधी कथन को हटाया जाता है या उसका विचार नहीं किया जाता।
English: Contradictory statements are disregarded.
३.४.१७ — शंयौ च सर्वपरिदानात्
हिन्दी: सभी उपदान और परिस्थितियों का विचार किया जाता है।
English: All provisions and contexts are taken into account.
३.४.१८ — प्रागपरोधान् मलवद् वाससः
हिन्दी: पूर्व परिहार और दोषों को दूर रखा जाता है।
English: Previous objections or defects are set aside.
३.४.१९ — अन्नप्रतिषेधाच् च
हिन्दी: अन्न के निषेध का पालन किया जाता है।
English: The prohibition regarding food is observed.
३.४.२० — अप्रकरणे तु तद्वर्मस् ततो विशेषात्
हिन्दी: प्रकरण में नियम लागू होता है, और उसमें विशेष ध्यान रखा जाता है।
English: The rule applies in the context, with special consideration.
३.४.२१ — अद्रव्यत्वात् तु शेषः स्यात्
हिन्दी: वस्तु न होने पर भी शेष नियम लागू होता है।
English: Even in the absence of an object, the remaining rule is applied.
३.४.२२ — वेदसंयोगात्
हिन्दी: वेद में निर्दिष्ट संबंध के अनुसार लागू होता है।
English: Applies according to the connection mentioned in the Veda.
३.४.२३ — द्रव्यसंयोगाच् च
हिन्दी: वस्तु के संयुक्त होने पर भी नियम लागू होता है।
English: The rule applies when objects are combined.
३.४.२४ — स्याद् वास्य संयोगवत् फलेन सम्बन्धस् तस्मात् कर्मैतिशायनः
हिन्दी: कर्म और फल के संबंध में संयोग के आधार पर नियम लागू होता है।
English: The rule applies based on the connection of action and its result.
३.४.२५ — शेषाः प्रकरणेऽविशेषात् सर्वकर्मणाम्
हिन्दी: प्रकरण में शेष नियम सभी कर्मों पर लागू होता है।
English: Remaining rules apply to all actions within the context.
३.४.२६ — होमास् तु व्यवतिष्ठेर् अन्नाहवनीयसंयोगात्
हिन्दी: होम कर्म में अन्न के हवनीय संयोग के कारण नियम लागू होता है।
English: In Homa rites, rules apply due to the combination of offerings.
३.४.२७ — शेषश् च समाख्यानात्
हिन्दी: शेष नियम सामान्य कथा से सिद्ध होते हैं।
English: Remaining rules are validated by general narration.
३.४.२८ — दोषात् त्व् इष्टिर् लौकिके स्याच् छास्त्राद् धि वैदिक न दोषः स्यात्
हिन्दी: लौकिक दोष मान्य हो सकता है, पर वैदिक नियम में दोष नहीं होता।
English: Mundane defects may exist, but there is no defect in Vedic injunctions.
३.४.२९ — अर्थवादो वानुपपातत् तस्माद् यज्ञे प्रतीयेत
हिन्दी: अर्थवाद के अनुसार यज्ञ में नियम लागू किया जाता है।
English: According to the Arthavada, the rule applies in Yajna.
३.४.३० — अचोदित च कर्मभेदात्
हिन्दी: अनचोदित कर्मभेद का भी पालन किया जाता है।
English: Even unmentioned distinctions of action are considered.
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